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दोहरी मार: पंखा चला न बल्ब जले फिर भी बिल हर महीने जैसा
Fri, 04 Jun 2021 12:45 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 04 Jun 2021 12:45 PM IST
सार
लॉकडाउन में दुकानें बंद होने के बाद भी ज्यादा बिल आने से व्यापारी परेशान।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर पिछले डेढ़ माह से सभी प्रकार की दुकानें बंद हैं। इसके बाद भी इन दुकानदारों के पास विद्युत निगम की तरफ से जो बिल भेजे गए हैं उससे व्यापारियों की मुसीबत बढ़ गई है। बंदी के दौरान उन्हें जो बिल मिला है वह सामान्य दिनों की अपेक्षा डेढ़ से दोगुना तक ज्यादा है। जबकि डेढ़ महीने के दौरान दुकानें खुली ही नहीं है।
केस 1
राप्तीनगर के मनोज का जनरल स्टोर है। लगभग डेढ़ महीने से दुकान बंद है। न फ्रिज चल रहा और न ही डीप फ्रीजर, इसके अलावा दुकान में कूलर, पंखा, बल्ब जलना भी बंद है। उन्होंने दो-तीन बार ही दुकान साफ-सफाई के लिए खोली। मार्च में जब दुकान रोज खुल रही थी तो महीने का बिल 1600 रुपये था। वहीं बंदी के समय में उनका वर्तमान माह का बिल 6000 रुपये आया है। इससे परेशान मनोज खंड दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं।
केस 2
जाफरा बाजार में शिवम की रेडीमेड कपड़े की दुकान है। बड़े बाजार में लॉकडाउन लगने के बाद एक भी दुकान नहीं खुली। चाहे कपड़े की हो, इलेक्ट्रॉनिक्स, सराफा या फिर अन्य। सभी पर ताले पड़ें हैं। शिवम ने बताया कि उनके दुकान पर औसतन दो से ढाई हजार रुपये का बिजली बिल आता था। अप्रैल के अंत से पूरे मई दुकान नहीं खुली इसके बाद भी 5430 रुपये का बिल भेज दिया गया। अब वे इसे ठीक कराने के लिए परेशान हैं।
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केस 1
राप्तीनगर के मनोज का जनरल स्टोर है। लगभग डेढ़ महीने से दुकान बंद है। न फ्रिज चल रहा और न ही डीप फ्रीजर, इसके अलावा दुकान में कूलर, पंखा, बल्ब जलना भी बंद है। उन्होंने दो-तीन बार ही दुकान साफ-सफाई के लिए खोली। मार्च में जब दुकान रोज खुल रही थी तो महीने का बिल 1600 रुपये था। वहीं बंदी के समय में उनका वर्तमान माह का बिल 6000 रुपये आया है। इससे परेशान मनोज खंड दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं।
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केस 2
जाफरा बाजार में शिवम की रेडीमेड कपड़े की दुकान है। बड़े बाजार में लॉकडाउन लगने के बाद एक भी दुकान नहीं खुली। चाहे कपड़े की हो, इलेक्ट्रॉनिक्स, सराफा या फिर अन्य। सभी पर ताले पड़ें हैं। शिवम ने बताया कि उनके दुकान पर औसतन दो से ढाई हजार रुपये का बिजली बिल आता था। अप्रैल के अंत से पूरे मई दुकान नहीं खुली इसके बाद भी 5430 रुपये का बिल भेज दिया गया। अब वे इसे ठीक कराने के लिए परेशान हैं।
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दुकानें बंद होने और अब बिजली के बिल भी ज्यादा मिलने से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब वे क्या करें। मोहद्दीपुर के अभिनव ने बताया कि उनकी दुकान के बिल में गड़बड़ी थी। उन्होंने बिजली निगम के कार्यालय जाकर अपना बिल दिखाया। उन्हें अगले दिन बुलाया गया। अगले दिन जाने पर चला कि कोरोना के कारण 50 प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यालय आ रहे हैं। उनकी शिकायत जिस कर्मचारी ने सुनी थी उसकी आज छुट्टी है। यह कहकर उन्हें फिर अगले दिन बुलाया गया।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि दुकानें अगर बंद रही हैं बिल गलत नहीं आएंगे। अगर किसी के पास गलत या अधिक बिल पहुंच गया है तो वह सीधे अपने अधिशासी अभियंता या उपखंड अधिकारी कार्यालय जाकर सही करवा सकता है। कोरोना से बिजली निगम के भी कर्मचारी संक्रमित हो गए थे। बीच में कुछ परेशानी आई थी।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि दुकानें अगर बंद रही हैं बिल गलत नहीं आएंगे। अगर किसी के पास गलत या अधिक बिल पहुंच गया है तो वह सीधे अपने अधिशासी अभियंता या उपखंड अधिकारी कार्यालय जाकर सही करवा सकता है। कोरोना से बिजली निगम के भी कर्मचारी संक्रमित हो गए थे। बीच में कुछ परेशानी आई थी।