गोरखपुर सीलिंग प्रकरण: दशकों से अपने ही अभिलेख दुरुस्त नहीं कर सका प्रशासन
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि सीलिंग के गाटों को सार्वजनिक करने के पीछे इनकी खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के साथ ही रिकार्ड दुरुस्त करना भी एक मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी को आपत्ति है तो वे एसडीएम कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं।
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गोरखपुर जिले के चौरीचौरा और सदर तहसील में 2600 से अधिक गाटों को सीलिंग की जमीन घोषित करने के बाद जहां जमीन बेचने और खरीदने वालों में हड़कंप मची है वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ज्यादातर लोगों का यही सवाल है कि आम आदमी को जमीन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हो पाती है। जब सीलिंग की जमीनों के खारिज-दाखिल की प्रक्रिया हुई तो प्रशासन के जिम्मेदार अफसर क्या कर रहे थे।
कैसे राजस्व कर्मियों ने इन जमीनों को सीलिंग मुक्त होने की रिपोर्ट दे दी। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो की सीलिंग की जमीनों के मामले में एक दशक पहले ही राहत देते हुए इन्हें सीलिंग मुक्त करने का आदेश दे दिया है। बावजूद इसके प्रशासन ने इन जमीनों को सीलिंग की जमीन बताते हुए इनका गाटा भी सार्वजनिक किया है।
पिछले महीने चौरीचौरा और फिर फरवरी के दूसरे सप्ताह में सदर तहसील में सीलिंग पंजिका में दर्ज गाटों को सार्वजनिक करते हुए प्रशासन ने आपत्तियां मांगी है। हालांकि प्रशासन ने इसी बहाने रिकार्ड दुरुस्त करने की भी बात कही है लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में यह तो साफ हो गया है कि लंबे समय से प्रशासन सीलिंग रजिस्टर को अपडेट नहीं कर सका।
यही वजह है कि जिन जमीनों को कोर्ट या प्रशासनिक अधिकारियों ने सीलिंग मुक्त कर दिया, उन गाटों का भी सीलिंग की जमीन बताते हुए प्रकाशन कर दिया गया। इसी तरह सिक्टौर क्षेत्र में एक पूरी कालोनी जिस गाटा नंबर में बसी है, वह भी सीलिंग पंजिका में दर्ज है। कालोनाइजर का कहना है कि मुख्य राजस्व अधिकारी के स्तर से 1992 में यह जमीन सीलिंग मुक्त घोषित हो चुकी है।
सीलिंग के गाटे सार्वजनिक होते ही कई लोगों के पैरों तले से जमीन ही खिसक गई है। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने जमीन रजिस्ट्री करा ली है। खारिज- दाखिल भी हो चुका है और राजस्व अभिलेखों में उनके नाम भी दर्ज हैं। उनकी दलील है कि बैनामे के बाद तहसीलदार या नायब तहसीलदार कोर्ट से नामांतरण किया जाता है।
इससे पहले संबंधित क्षेत्र के लेखपाल एवं कानूनगो अपनी रिपोर्ट देते हैं। रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट की जाती है कि नामांतरण के लिए प्रस्तुत भूखंड ताल-तलैया या सीलिंग में नहीं दर्ज है। यह रिपोर्ट मिलने के बाद ही नामांतरण होता है। जितने भी नामांतरण हुए हैं, सभी में इस तरह की रिपोर्ट लगी है।
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि सीलिंग के गाटों को सार्वजनिक करने के पीछे इनकी खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के साथ ही रिकार्ड दुरुस्त करना भी एक मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी को आपत्ति है तो वे एसडीएम कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं। वैध दस्तावेजों के आधार पर प्रपत्रों को दुरुस्त कर लिया जाएगा। यदि गलत तरीके से नामांतरण किया गया है, तो उसमें संलिप्त रहे राजस्व कर्मियों पर भी कार्रवाई होगी।