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यूपी बोर्ड: परीक्षा निरस्त होने पर प्रधानाचार्यों और विद्यार्थियों ने दी प्रतिक्रिया, बोले- कोरोना की दहशत के बीच परीक्षा देना था चुनौतीपूर्ण
Fri, 04 Jun 2021 10:47 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:47 AM IST
सार
प्रदेश सरकार के इस फैसले का अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और विद्यार्थियों ने स्वागत किया है।
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उत्तर प्रदेश बोर्ड : यूपी बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना महामारी से विद्यार्थियों को बचाने के लिए सीबीएसई और सीआईएससीई की तर्ज पर यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा भी निरस्त कर दी गई है। प्रदेश सरकार के इस फैसले का अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और विद्यार्थियों ने स्वागत किया है। सभी ने एक स्वर में कहा कि कोरोना की दहशत के बीच परीक्षा देना चुनौतीपूर्ण था।
अगर परीक्षा के समय को आगे बढ़ाया जाता तो आगे चलकर इंजीनियरिंग या मेडिकल सरीखी प्रतियोगी परीक्षाओं के समय से आयोजन पर खतरा मंडराता। निश्चित रूप से इन कक्षाओं में चढ़ने वाले नंबर जीवन पर्यंत आप के काम आते हैं, मगर जीवन ही नहीं रहेगा तो अंक लेकर कोई क्या करेगा। थोड़ी निराशा हुई है मगर सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रहा है। सरकार विद्यार्थियों को प्रमोट करने के लिए जो नियम बनाए, उसमें थोड़ी नरमी बरते।
तो सिर्फ पछतावा ही हाथ लगता
एमजी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ओपी सिंह ने बताया कि मनुष्य परिस्थितियों का दास होता है। विद्यार्थियों का जीवन परीक्षा से महत्वपूर्ण है। निसंदेह अन्य विकल्प थे मगर उनमें भी खतरा हो सकता था। अगर एक भी विद्यार्थी संक्रमित हो जाता तो पछताने के अलावा कोई विकल्प न बचता।
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अगर परीक्षा के समय को आगे बढ़ाया जाता तो आगे चलकर इंजीनियरिंग या मेडिकल सरीखी प्रतियोगी परीक्षाओं के समय से आयोजन पर खतरा मंडराता। निश्चित रूप से इन कक्षाओं में चढ़ने वाले नंबर जीवन पर्यंत आप के काम आते हैं, मगर जीवन ही नहीं रहेगा तो अंक लेकर कोई क्या करेगा। थोड़ी निराशा हुई है मगर सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रहा है। सरकार विद्यार्थियों को प्रमोट करने के लिए जो नियम बनाए, उसमें थोड़ी नरमी बरते।
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तो सिर्फ पछतावा ही हाथ लगता
एमजी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ओपी सिंह ने बताया कि मनुष्य परिस्थितियों का दास होता है। विद्यार्थियों का जीवन परीक्षा से महत्वपूर्ण है। निसंदेह अन्य विकल्प थे मगर उनमें भी खतरा हो सकता था। अगर एक भी विद्यार्थी संक्रमित हो जाता तो पछताने के अलावा कोई विकल्प न बचता।
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मौजूदा हालात में उचित निर्णय
एमजी इंटर कॉलेज के कक्षा बारहवीं के छात्र श्रीविलास मिश्रा ने बताया कि साल भर परीक्षा की तैयारी की है। सरकार के फैसले से थोड़ी निराशा हुई है। मगर मौजूदा वक्त को देखते हुए उचित निर्णय लिया गया। कोरोना के संकट के बीच दूसरा विकल्प भी क्या था?
हर विद्यार्थी का रखा जाए ख्याल
एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज के कक्षा बारहवीं की छात्रा ऐश्वर्या जायसवाल ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त होने के बाद से ही इंटर की परीक्षा भी निरस्त करने की मांग हो रही थी। उम्मीद नहीं थी कि परीक्षा निरस्त होगी। सरकार प्रमोट करने के नियमों में हर विद्यार्थी का ख्याल रखे।
जीवन बचाना ही प्राथमिकता
एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रेमी यादव ने बताया कि कोविड संक्रमण के दौर में ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर बच्चों की तैयारी कराई गई है। थोड़ी निराशा हुई मगर बच्चों के जीवन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। खुश हूं।
हर विद्यार्थी का रखा जाए ख्याल
एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज के कक्षा बारहवीं की छात्रा ऐश्वर्या जायसवाल ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त होने के बाद से ही इंटर की परीक्षा भी निरस्त करने की मांग हो रही थी। उम्मीद नहीं थी कि परीक्षा निरस्त होगी। सरकार प्रमोट करने के नियमों में हर विद्यार्थी का ख्याल रखे।
जीवन बचाना ही प्राथमिकता
एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रेमी यादव ने बताया कि कोविड संक्रमण के दौर में ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर बच्चों की तैयारी कराई गई है। थोड़ी निराशा हुई मगर बच्चों के जीवन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। खुश हूं।