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UP: सचिवालय की नौकरी के नाम पर फर्जी लेटर थमाया, 3.50 लाख RTGS और 6.50 लाख नकद लिए- गिरफ्तार
Tue, 21 Jul 2026 11:28 AM IST
Rohit Singh
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:28 AM IST
सार
बांसगांव थाने में 13 जून को खुशी यादव की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि विनय उर्फ विपिन तिवारी ने सचिवालय में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर उससे 10 लाख रुपये ले लिए थे। इसमें 3.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से और 6.50 लाख रुपये नकद दिए गए थे।
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गिरफ्तार आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सचिवालय में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर 10 लाख रुपये की ठगी के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान कौड़ीराम निवासी विनय उर्फ विपिन तिवारी के रूप में हुई है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उसने इस तरह कितने और लोगों को शिकार बनाया है।
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पुलिस के अनुसार, बांसगांव थाने में 13 जून को खुशी यादव की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि विनय उर्फ विपिन तिवारी ने सचिवालय में नौकरी लगवाने का भरोसा देकर उससे 10 लाख रुपये ले लिए थे। इसमें 3.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से और 6.50 लाख रुपये नकद दिए गए थे।
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आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी ने पीड़िता को सचिवालय का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया और लखनऊ पहुंचकर जॉइनिंग कराने का भरोसा दिलाया। जब पीड़िता नियुक्ति पत्र लेकर सचिवालय पहुंची तो जांच में वह फर्जी निकला। इसके बाद पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
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शिकायत के आधार पर बांसगांव पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सीओ बांसगांव अनुज सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। आरोपी के अन्य ठगी के मामलों में शामिल होने की भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सीओ बांसगांव अनुज सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। आरोपी के अन्य ठगी के मामलों में शामिल होने की भी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।