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गोरखपुर: अफसर कर रहे माथापच्ची, थानेदार मौज, छोटे से लेकर बड़े मामले में बिना आदेश के नहीं दर्ज होता केस 

Sun, 12 Jun 2022 09:17 AM IST
प्राची प्रियम शिवम सिंह, गोरखपुर
शिवम सिंह, गोरखपुर Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 12 Jun 2022 09:17 AM IST
सार

एडीजी जोन, डीआईजी रेंज, एसएसपी हो या फिर एसपी सिटी, एसपी साउथ, एसपी नॉर्थ सभी के दफ्तरों में रोजाना 150 से ज्यादा फरियादी प्रार्थना पत्र लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

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Gorakhpur police avoids registering cases in any matter people facing problems
एसएसपी विपिन टाडा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर में आमलोगों को कानूनी मदद दिलाने में अफसर माथापच्ची कर रहे हैं, तो थानेदार मौज। हालात ऐसे हैं कि नाली-खड़ंजा का विवाद हो या फिर लूट, दुष्कर्म, हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराध के मामले, सभी में अफसरों को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
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घटना के बाद पुलिस महज शांतिभंग में दोनों पक्ष का चालान कर अपने काम की इतिश्री कर दे रही है। मामला अफसरों के संज्ञान में आने के बाद ही केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई हो रही है। इसकी बानगी पुलिस अफसरों के दफ्तर में रोजाना देखने को मिल रही है। सभी दफ्तरों में फरियादियों की लंबी कतार लग रही है।
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यूं तो घर के करीब थाने-चौकी पर ही न्याय मिल जाना चाहिए, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। छोटे से लेकर बड़े मामले में बिना पुलिस अफसर के आदेश के एफआईआर दर्ज कर न्याय देने की जहमत थाने-चौकी पर बैठे पुलिसकर्मी नहीं उठाना चाहते हैं। कई मामले तो ऐसे सामने आ रहे हैं, जिसमें आदेश के बाद भी पुलिसकर्मी कार्रवाई की जगह बगले झांकते हैं। फटकार के बाद ही कार्रवाई की ओर अपना एक कदम बढ़ाते हैं।
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एडीजी जोन, डीआईजी रेंज, एसएसपी हो या फिर एसपी सिटी, एसपी साउथ, एसपी नॉर्थ सभी के दफ्तरों में रोजाना 150 से ज्यादा फरियादी प्रार्थना पत्र लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं। अब अफसरों ने आने वाले फरियादियों की मॉनीटरिंग शुरू कर दी है, ताकि थानेदार का मूल्यांकन हो सके।

न्याय मांगने वाले को भी मारने वाले जितनी सजा
जिले की पुलिस धारा 151 (शांतिभंग) को कानूनी हथियार बना चुकी है। मारपीट के मामले में अगर पीड़ित ने पुलिस से मदद मांगी तो उसे भी उतनी ही सजा मिलती है, जितनी कि मारने वाले को। इस तरह के मामले आने पर पुलिस सही, गलत जानकर कार्रवाई की जगह, एक ही कार्रवाई सभी पर कर देती है। ऐसे में पीड़ित का न्याय पर विश्वास कम हो रहा है।

 

केस एक
सात जून को कैंपियरगंज पुलिस ने दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी को जेल भेजा। इस मामले में सात महीने से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम की एक महिला दौड़ रही थी। धर्मांतरण कराकर उससे दुष्कर्म और फिर उसकी बच्ची के साथ भी इस तरह की घटना सामने आई थी। महिला एसएसपी के पास पहुंची, तब पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई की। इसमें भी धर्मांतरण और पॉक्सो का धारा लगाना पुलिस भूल गई।

केस दो  
छह जून को बड़हलगंज के कोल्हुआ गांव में घर में घुसकर दंपती के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। आरोप था कि नकदी, जेवरात भी उठा ले गए। तहरीर मिलने के बाद भी पुलिस ने मामले में केस दर्ज नहीं किया। मामला अफसरों के संज्ञान में आया तो एसपी के निर्देश पर नौ जून को पुलिस ने डकैती, लूट, मारपीट की धाराओं में केस दर्ज कर लिया। सख्ती के बाद पुलिस ने अब मामले में कार्रवाई तेज कर दी है।

केस तीन
नौ जून को गुलरिहा पुलिस ने कानपुर के एक व्यापारी की तहरीर पर जालसाजी का केस दर्ज किया। पीड़ित कानपुर के सिविल लाइंस निवासी संजीव अग्रवाल डेढ़ महीने पहले अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और वह कानपुर लौट गए। दोबारा कानपुर से केस दर्ज कराने आए और सात जून को एसएसपी से मुलाकात की, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।

केस चार
आठ जून को सहजनवां पुलिस ने एक युवक पर चाकू से हमला करने के मामले में केस दर्ज किया। पीड़ित बांसगांव के घईसरा गांव निवासी सतीश बरात गए थे। बरात में विवाद के बाद रास्ते में उन पर चाकू, डंडे से हमला कर मारपीट कर घायल कर दिया गया था। पीड़ित बांसगांव से लेकर सहजनवां तक फरियाद लिए दौड़ रहा था। आखिरकार एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि पुलिस की लापरवाही के मामले सामने आने पर कार्रवाई की गई है। हाल के दिनों में चार पुलिसकर्मियों पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया। कई पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच जारी है। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित को त्वरित न्याय मिले, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
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