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Gorakhpur: सॉफ्टवेयर जगत में चमक रहे गोरखपुर के निशांत और रजत, खड़ा किया अपना कारोबार
Sun, 28 Aug 2022 11:17 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 28 Aug 2022 11:17 AM IST
सार
सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अवर अभियंता मुरली मनोहर श्रीवास्तव और गृहिणी कुसुम श्रीवास्तव के दोनों पुत्रों निशांत और रजत ने सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई की।
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गोरखपुर के निशांत और रजत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली के सॉफ्टवेयर जगत में गोरखपुर शहर के जटेपुर इलाके के रहने वाले निशांत श्रीवास्तव और रजत श्रीवास्तव खूब चमक रहे हैं। डिजिटल फैक्ट्री ऑपरेटिव सिस्टम (डीएफओएस) नामक सॉफ्टवेयर तैयार कर इन दोनों भाइयों ने न सिर्फ लंबा-चौड़ा कारोबार खड़ा कर दिया बल्कि देश की नामी-गिरामी कंपनियों को सॉफ्टवेयर संबंधी विभिन्न तकनीकी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं।
सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अवर अभियंता मुरली मनोहर श्रीवास्तव और गृहिणी कुसुम श्रीवास्तव के दोनों पुत्रों निशांत और रजत ने सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई की।
इसके बाद निशांत ने बजाज ऑटो तो रजत ने कैड एरिना में तकरीबन पांच साल नौकरी की। बजाज ऑटो में तकनीकी, गुणवत्ता, स्टॉक समेत अन्य कार्यों के ऑडिट में काफी समय और मानवश्रम खर्च होता था। ऐसे में निशांत और रजत ने डीएफओएस नामक सॉफ्टवेयर डेवलप किया।
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इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बजाज ऑटो के विभिन्न कार्यों के ऑडिट में 70 प्रतिशत तक का समय कम हो गया। यहीं से शुरू हुआ दोनों भाइयों का देश की नामी-गिरामी कंपनियों में अपने सॉफ्टवेयर के माध्यम से सेवा देने का सफर। दोनों ने इसके लिए ‘डिजाइन-एक्स’ नाम की कंपनी खड़ी कर दी।
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सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अवर अभियंता मुरली मनोहर श्रीवास्तव और गृहिणी कुसुम श्रीवास्तव के दोनों पुत्रों निशांत और रजत ने सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई की।
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इसके बाद निशांत ने बजाज ऑटो तो रजत ने कैड एरिना में तकरीबन पांच साल नौकरी की। बजाज ऑटो में तकनीकी, गुणवत्ता, स्टॉक समेत अन्य कार्यों के ऑडिट में काफी समय और मानवश्रम खर्च होता था। ऐसे में निशांत और रजत ने डीएफओएस नामक सॉफ्टवेयर डेवलप किया।
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इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से बजाज ऑटो के विभिन्न कार्यों के ऑडिट में 70 प्रतिशत तक का समय कम हो गया। यहीं से शुरू हुआ दोनों भाइयों का देश की नामी-गिरामी कंपनियों में अपने सॉफ्टवेयर के माध्यम से सेवा देने का सफर। दोनों ने इसके लिए ‘डिजाइन-एक्स’ नाम की कंपनी खड़ी कर दी।
कंपनी हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड, हीरो मोटोकॉर्प, डाबर, टीवीएस, मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रही है। वहीं कंपनी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तकरीबन 100 लोगों को रोजगार मिला है। इन कर्मचारियों को 20 हजार रुपये से 1.20 लाख रुपये महीने तक वेतन दिया जाता है।
निशांत और रजत कहते हैं कि सामान्य तौर पर आज काम का एक बड़ा हिस्सा कागज पर हो रहा है, जो बहुत धीमा और प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाला है। इसी कारण फैक्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ अपने काम की रियल टाइम मॉनिटरिंग नहीं कर पाते हैं।
नतीजतन उनके संसाधन बर्बाद होते हैं, गुणवत्ता में गिरावट आती और दुर्घटनाएं होती हैं। हमारे सॉफ्टवेयर डीएफओएस से इनमें गुणात्मक सुधार हुआ है। डीएफओएस भारत के आत्मनिर्भर भारत और 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के इस बड़े मिशन में एक छोटा सा योगदान है।
निशांत और रजत कहते हैं कि सामान्य तौर पर आज काम का एक बड़ा हिस्सा कागज पर हो रहा है, जो बहुत धीमा और प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाला है। इसी कारण फैक्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ अपने काम की रियल टाइम मॉनिटरिंग नहीं कर पाते हैं।
नतीजतन उनके संसाधन बर्बाद होते हैं, गुणवत्ता में गिरावट आती और दुर्घटनाएं होती हैं। हमारे सॉफ्टवेयर डीएफओएस से इनमें गुणात्मक सुधार हुआ है। डीएफओएस भारत के आत्मनिर्भर भारत और 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के इस बड़े मिशन में एक छोटा सा योगदान है।