{"_id":"67c8a364bc353d78a60ef6c7","slug":"gorakhpur-news-yashpal-is-the-mastermind-has-been-suspended-in-the-year-2022-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-861066-2025-03-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: मास्टरमाइंड है यशपाल, वर्ष 2022 में किया जा चुका है निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: मास्टरमाइंड है यशपाल, वर्ष 2022 में किया जा चुका है निलंबित
विज्ञापन
एचडीएफसी बैंक में समूह लोन में धोखाधड़ी का मामला, पुलिस ने तेजी की छानबीन
गोरखपुर। एचडीएफसी बैंक में समूह लोन में धोखाधड़ी का आरोपी सेल्स ऑफिसर यशपाल यादव मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि वर्ष 2022 में उसने लोगों को बैंक से समूह लोन दिलवाया था। मासिक किस्त वसूलने की जिम्मेदारी उसे ही सौंपी गई थी। इसके बाद उसने खेल शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि उस समय मामला सामने आया तो वह भाग गया। इसके बाद बैंक की ओर से उसे निलंबित कर दिया गया था। इधर, पुलिस ने मामले में छानबीन तेज कर दी है।
रिलेशनशिप मैनेजर शुभम श्रीवास्तव ने बताया कि मामला 2022 का है। उस समय के अधिकांश कर्मचारी बदल चुके हैं। समूह लोन की जिम्मेदारी यशपाल यादव को मिली थी। वह सहजनवां का रहने वाला बताया जाता है। वही मामले में मुख्य आरोपी है। इससे अधिक जानकारी नहीं है। उस पर आरोप है कि समूह लोन का किस्त लोगों से वसूलता गया लेकिन बैंक में जमा नहीं किया। जब शिकायत हुई तो जांच शुरू हो गई। इसके बाद यशपाल यादव भाग गया। जांच के बाद उसे निलंबित भी कर दिया गया था। इसके बाद भी मामले की छानबीन चलती रही। इस दौरान कई लोग नौकरी छोड़ कर भी चले गए।
तीन साल बाद मामले में दर्ज किया केस
मामले में तीन साल बाद मंगलवार को गोरखनाथ थाने में केस दर्ज किया। हालांकि इतने साल बाद केस दर्ज क्यों किया गया, इसका जवाब स्थानीय अफसर और कर्मी नहीं दे सके। रिलेशनशिप मैनेजर शुभम श्रीवास्तव ने लखनऊ के अफसर ने केस दर्ज कराया है। आरोपी बनाए गए लोगों में एक ने बाद में नौकरी ज्वाइन की है। इनके बारे में अफसरों को बता दिया गया है। इनका नाम केस से हटवाया जाएगा।
विज्ञापन
केस दर्ज होने के बाद बैंक में हड़कंप
गोरखनाथ थाने में केस दर्ज होने के बाद एचडीएफसी बैंक में हड़कंप मचा हुआ है। दिन भर आरोपी यशपाल यादव व अन्य आरोपियों के बारे में चर्चा होती रही। बुधवार को रिलेशनशिप मैनेजर और उनके साथ कर्मचारी चर्चा कर रहे थे कि अब केस दर्ज किया है जब अधिकांश आरोपी बैंक में कार्यरत नहीं है। यह भी चर्चा रही कि एक दो को आरोपी बना दिया गया जबकि वह उस समय यहां कार्यरत नहीं थे। उन्होंने अफसरों से भी इसके बारे में बातचीत की।
4 अक्तूबर को छोड़ दी थी नौकरी
मामले में एक आरोपी दिव्य नारायण ने बताया कि उनका यशपाल यादव से कोई लेना देना नहीं है। यशपाल के जाने के बाद उन्होंने एक साल तक बैंक में काम किया। 4 सितंबर को नौकरी से रिजाइन किया और चार अक्तूबर को नौकरी छोड़ दी। उन्हें फर्जी फंसाया गया है।
विज्ञापन
गोरखपुर। एचडीएफसी बैंक में समूह लोन में धोखाधड़ी का आरोपी सेल्स ऑफिसर यशपाल यादव मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि वर्ष 2022 में उसने लोगों को बैंक से समूह लोन दिलवाया था। मासिक किस्त वसूलने की जिम्मेदारी उसे ही सौंपी गई थी। इसके बाद उसने खेल शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि उस समय मामला सामने आया तो वह भाग गया। इसके बाद बैंक की ओर से उसे निलंबित कर दिया गया था। इधर, पुलिस ने मामले में छानबीन तेज कर दी है।
रिलेशनशिप मैनेजर शुभम श्रीवास्तव ने बताया कि मामला 2022 का है। उस समय के अधिकांश कर्मचारी बदल चुके हैं। समूह लोन की जिम्मेदारी यशपाल यादव को मिली थी। वह सहजनवां का रहने वाला बताया जाता है। वही मामले में मुख्य आरोपी है। इससे अधिक जानकारी नहीं है। उस पर आरोप है कि समूह लोन का किस्त लोगों से वसूलता गया लेकिन बैंक में जमा नहीं किया। जब शिकायत हुई तो जांच शुरू हो गई। इसके बाद यशपाल यादव भाग गया। जांच के बाद उसे निलंबित भी कर दिया गया था। इसके बाद भी मामले की छानबीन चलती रही। इस दौरान कई लोग नौकरी छोड़ कर भी चले गए।
विज्ञापन
तीन साल बाद मामले में दर्ज किया केस
मामले में तीन साल बाद मंगलवार को गोरखनाथ थाने में केस दर्ज किया। हालांकि इतने साल बाद केस दर्ज क्यों किया गया, इसका जवाब स्थानीय अफसर और कर्मी नहीं दे सके। रिलेशनशिप मैनेजर शुभम श्रीवास्तव ने लखनऊ के अफसर ने केस दर्ज कराया है। आरोपी बनाए गए लोगों में एक ने बाद में नौकरी ज्वाइन की है। इनके बारे में अफसरों को बता दिया गया है। इनका नाम केस से हटवाया जाएगा।
विज्ञापन
केस दर्ज होने के बाद बैंक में हड़कंप
गोरखनाथ थाने में केस दर्ज होने के बाद एचडीएफसी बैंक में हड़कंप मचा हुआ है। दिन भर आरोपी यशपाल यादव व अन्य आरोपियों के बारे में चर्चा होती रही। बुधवार को रिलेशनशिप मैनेजर और उनके साथ कर्मचारी चर्चा कर रहे थे कि अब केस दर्ज किया है जब अधिकांश आरोपी बैंक में कार्यरत नहीं है। यह भी चर्चा रही कि एक दो को आरोपी बना दिया गया जबकि वह उस समय यहां कार्यरत नहीं थे। उन्होंने अफसरों से भी इसके बारे में बातचीत की।
4 अक्तूबर को छोड़ दी थी नौकरी
मामले में एक आरोपी दिव्य नारायण ने बताया कि उनका यशपाल यादव से कोई लेना देना नहीं है। यशपाल के जाने के बाद उन्होंने एक साल तक बैंक में काम किया। 4 सितंबर को नौकरी से रिजाइन किया और चार अक्तूबर को नौकरी छोड़ दी। उन्हें फर्जी फंसाया गया है।