फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur News: Writers and artists will travel from Nepal to Gorakhpur for world peace.

Gorakhpur News: विश्व शांति के लिए नेपाल से गोरखपुर की यात्रा करेंगे लेखक-कलाकार

Tue, 30 Sep 2025 02:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Sep 2025 02:20 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur News: Writers and artists will travel from Nepal to Gorakhpur for world peace.
बुद्ध के विचारों पर आधारित साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्रा ''''चरथ भिक्खवे'''' का दूसरा चरण पांच से
विज्ञापन

समापन मौके पर 12 अक्तूबर को बौद्ध संग्रहालय में संगोष्ठी और कविता पाठ
गोरखपुर। बुद्ध के विचारों पर आधारित साहित्यिक-सांस्कृतिक यात्रा ''''चरथ भिक्खवे'''' का दूसरा चरण 5 से 12 अक्तूबर तक होगा। यह यात्रा रोहिन नदी के उद्गम स्थान नेपाल के देवदह से शुरू होकर गोरखपुर तक होगी। यहां रोहिन और राप्ती नदी का मिलन होता है। इस यात्रा में कवि, लेखक, कलाकार, इतिहासविद् और समाजशास्त्रियों का समूह शामिल हो रहा है।


यह जानकारी यात्रा के संयोजक प्रेमचंद साहित्य संस्थान के निदेशक और बीएचयू के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो सदानंद शाही ने एक विज्ञप्ति में दी। उन्होंने बताया कि साखी शोध कार्यशाला की ओर से आयोजित इस यात्रा में बौद्ध स्थलों का भ्रमण, स्थानीय लोगों से संवाद के साथ-साथ विचार गोष्ठी व काव्य पाठ के कार्यक्रम भी होंगे।
विज्ञापन

प्रो शाही ने बताया कि यात्रा में शामिल होने वाले कवि, लेखक, कलाकार, इतिहासविद् और समाजशास्त्री चार अक्तूबर को लुम्बिनी में एकत्र होंगे। लुम्बिनी और कपिलवस्तु के भ्रमण के बाद छह अक्तूबर को देवदह में रोहिन नदी के साथ यात्रा प्रारंभ होगी जो महराजगंज जनपद के रतनपुर, चौक, टेढ़ीघाट, तीनमुहानी, कांधपुर, भौराबारी, गायघाट, दौलतपुर, बालापार, महेसरा होते हुए गोरखपुर में संपन्न होगी। गोरखपुर में यात्रा के समापन मौके पर 12 अक्तूबर को रामगढ़ताल स्थित बौद्ध संग्रहालय में संगोष्ठी और कविता पाठ का आयोजन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि रोहिन नदी का बुद्ध के जीवन से गहरा संबंध है। बुद्ध के वैराग्य के मूल में रोहिन नदी के जल को लेकर शाक्य और कोलिय लोगों के बीच होता आया विवाद था। पालि ग्रंथ में इसके प्रमाण मौजूद हैं। रामग्राम के कोलिय और कपिलवस्तु के शाक्यों के बीच रोहिन के पानी के लिए युद्ध की नौबत आ गयी थी जिसे बुद्ध ने संवाद और पंचायत के जरिए रोका। यात्रा के जरिये इस सच्चाई को जानना और इसे लोग तक पहुंचाना है। दूसरी बात यह कि नदियों के साथ बुद्ध के रिश्ते को समझना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed