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Gorakhpur News: जंगल में थे तो आजाद थे, यहां बाड़ा...केसरी के बाद भैरवी ने भी दम तोड़ा

Tue, 06 May 2025 12:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 May 2025 12:40 AM IST
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Gorakhpur News: When we were in the jungle, we were free, here we are confined... After Kesari, Bhairavi also died
जंगल में पूरा जीवन बिताने के बाद चिड़ियाघर के वातावरण में नहीं ढल पा रहे वन्यजीव
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30 मार्च को बाड़े के नाइटसेल में हुई थी पीलीभीत से लाए गए बाघ केसरी की मौत
गोरखपुर। जंगल की आजादी में अपना ज्यादातर समय बिताने वाले वन्यजीवों को चिड़ियाघर का बाड़ा रास नहीं आ रहा है। पीलीभीत से आए बाघ केसरी के बाद अब बहराइच से लाई गई मादा भेड़िया भैरवी की भी मौत हो गई है। दोनों ही वन्यजीव जंगल वापस जाने के लिए परेशान नजर आते थे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल में जानवरों का जीवन बिल्कुल अलग रहता है। चिड़ियाघर का बाड़ा उनके लिए कैद की तरह है। आदमखोर होने की वजह से इन्हें जंगल में वापस नहीं छोड़ा गया, लेकिन चिड़ियाघर में इनका ज्यादा दिन तक रह पाना बहुत मुश्किल है। भैरवी की उम्र करीब 11 से 12 वर्ष थी। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि वह अपनी औसत उम्र के करीब पहुंच गई थी। आमतौर पर यह 12 से 14 वर्ष तक ही जीवित रहते हैं।
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बहराइच से लाए गए दोनों भेड़ियों को एक साथ रखा गया था। क्रॉल में आने के बाद से ही दोनों बाहर निकलने के लिए प्रयास करते थे। इस डर से चिड़ियाघर प्रशासन ने बाड़े की चहारदीवारी को भी ऊंचा करवा दिया था। 20 जनवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ ने दोनों को बाड़े में छोड़ा था। इसके बाद दोनों ने बाहर निकलने के लिए जमकर उछलकूद की थी।
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नाइटसेल से बाहर आने के बाद से ये यहां निकलने के लिए ऊंची-ऊंची छलांग लगाते थे। बाड़े में करीब चार महीने का समय बिताने के बाद भी जंगल वापस जाने के लिए प्रयास करते थे। बाड़े की कैद से उनके अंदर तनाव बढ़ रहा था। हालांकि, भैरवी की उम्र ज्यादा होने की वजह से वह ज्यादा देर तक नहीं छलांग लगाती थी।
बाघ केसरी ने भी बाहर निकलने के लिए प्रयास किया था। नाइटसेल की ग्रिल तोड़ने के लिए उसने काफी कोशिश की। शांत माहौल के बावजूद वह यहां के माहौल में खुद को नहीं ढाल सका।


नर-मादा भेड़ियों ने साथ किया भोजन लेकिन नहीं हो सकी मीटिंग
भैरव और भैरवी को करीब लाने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने काफी प्रयास किए। दोनों को एक साथ खाना दिया जा रहा था। जंगल के सबसे समझदार और चालाक जानवरों में शुमार भेड़िए जल्दी पकड़ में नहीं आते हैं। बहराइच में इन भेड़ियों ने जबरदस्त उत्पात मचा रखा था। यहां लाने के बाद पहले इन दोनों को अलग-अलग क्वारंटीन सेल में रखा गया था। इसके जब दोनों का स्वभाव शांत हुआ तो इन्हें एक ही बाड़े में रखा गया। नर भेड़िया की उम्र करीब आठ वर्ष है। वहीं, मादा भेड़िया उम्रदराज होने की वजह से अक्सर थक कर बैठ जाती थी। इसी वजह से दोनों में मीटिंग नहीं हो पाई।
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