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Gorakhpur News: सख्ती बढ़ी तो हटे डग्गामार वाहन.... बिचौलियों का खेल अब भी जारी
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रेलवे बस स्टेशन और कचहरी बस स्टेशन के एक किमी की परिधि में नहीं नजर आए डग्गामार वाहन
बस स्टेशन के पास जमे रहे बिचौलिए, यात्रियों को लुभावने ऑफर देते दिखे
गोरखपुर। यातायात विभाग और परिवहन विभाग की सख्ती के बाद बुधवार को रेलवे बस स्टेशन और कचहरी बस स्टेशन के एक किमी की परिधि में डग्गामार बस और टैक्सी नहीं दिखी। वहीं, डग्गामार बस और टैक्सी संचालकों के बिचौलिए रोज की तरह ही सक्रिय नजर आए। यात्रियों को बहलाकर वह ले जाने की कोशिश करते दिखे।
बुधवार की दोपहर 12:30 बजे यूनिवर्सिटी चौराहे से महाराणा प्रताप की प्रतिमा के बीच और रोडवेज तिराहे से सिविल लाइंस के बीच एक भी डग्गामार बस या टैक्सी सड़क किनारे खड़ी नजर नहीं आई। डीएम कार्यालय के सामने यातायात पुलिस के जवान इंटरसेप्टर वाहन के साथ डग्गामार वाहनों की निगरानी करते हुए दिखे। वहीं, रेलवे स्टेशन रोड पर भी डग्गामार वाहन रोज की तरह खड़े हुए नहीं दिखे। बस स्टेशन के आसपास बिचौलिए यात्रियों को परेशान करते दिखाई दिए। रोडवेज तिराहे पर यातायात पुलिस के जवान यातायात को नियंत्रित कर रहे थे, वहीं यातायात पुलिस के बूथ के सामने ही डग्गामार वाहनों के बिचौलिए सक्रिय नजर आए।
दोपहर करीब एक बजे बजे रेलवे बस स्टेशन पर ऑटो से लखनऊ की बस पकड़ने के लिए एक ही परिवार के तीन लोग पहुंचे। ऑटो से उतरते ही एक बिचौलिए ने उन्हें रोक लिया और पूछा कि कहां जाना है? उन्होंने बताया कि लखनऊ जाना है। बिचौलिए ने कहा कि साधारण बस से जितना किराया लखनऊ का लगता है उतने ही किराये में एसी कार से लखनऊ ले चलूंगा। कहा कि रोडवेज बस से जितना समय लगता है उससे दो घंटे कम समय में लखनऊ पहुंचा दूंगा। सवारी ने पूछा कितना किराया लगेगा? बिचौलियों ने बताया कि एक सवारी का 500 रुपये। उन्हाेंने कहा कि एक सवारी का 450 रुपये दूंगा। पहले तो बिचौलिए ने उनकी बात नहीं मानी लेकिन जब वह आगे बढ़ने लगे तो बिचौलिए ने उन्हें रोक लिया और 450 रुपये में लखनऊ ले जाने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद बिचौलियों ने तीनों सवारियों को ई-रिक्शा में बैठाकर मोहद्दीपुर की ओर टैक्सी में बैठाने के लिए भेज दिया। इस बीच एक युवक दिल्ली जाने के लिए पहुंचा तो एक बिचौलिया विजिटिंग कार्ड लेकर वहां पहुंच गया और उस यात्री को देने की कोशिश करने लगा। यात्री ने जब विजिटिंग कार्ड नहीं लिया तो बिचौलिए ने कहा कि वह सिर्फ 900 रुपये में उसे दिल्ली एसी बस से भिजवा देगा। जबकि रोडवेज की एसी बस का किराया 1800 रुपये है। यात्री ने उसकी बात नहीं मानी और वह रोडवेज बस में जाकर बैठ गया।
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विरोध के बाद बनी सहमति थी सहमति
बस स्टेशन के आसपास से हो रहे डग्गामार वाहनों के संचालन के विरोध में सोमवार को रोडवेज के अधिकारियों और कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। परिवहन विभाग पर डग्गामार वाहन संचालकों से मिलीभगत होने का आरोप लगाया था। इसके बाद मंगलवार को परिवहन विभाग, यातायात विभाग और रोडवेज के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया था कि बस स्टेशन के एक किलोमीटर परिधि में निजी बसें संचालित नहीं होंगी।
............
वर्जन...
परिवहन विभाग की ओर से डग्गामार वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत करीब 40 टैक्सी और बसों पर कार्रवाई की गई है। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
- संजय कुमार झा, आरटीओ प्रवर्तन
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बस स्टेशन के पास जमे रहे बिचौलिए, यात्रियों को लुभावने ऑफर देते दिखे
गोरखपुर। यातायात विभाग और परिवहन विभाग की सख्ती के बाद बुधवार को रेलवे बस स्टेशन और कचहरी बस स्टेशन के एक किमी की परिधि में डग्गामार बस और टैक्सी नहीं दिखी। वहीं, डग्गामार बस और टैक्सी संचालकों के बिचौलिए रोज की तरह ही सक्रिय नजर आए। यात्रियों को बहलाकर वह ले जाने की कोशिश करते दिखे।
बुधवार की दोपहर 12:30 बजे यूनिवर्सिटी चौराहे से महाराणा प्रताप की प्रतिमा के बीच और रोडवेज तिराहे से सिविल लाइंस के बीच एक भी डग्गामार बस या टैक्सी सड़क किनारे खड़ी नजर नहीं आई। डीएम कार्यालय के सामने यातायात पुलिस के जवान इंटरसेप्टर वाहन के साथ डग्गामार वाहनों की निगरानी करते हुए दिखे। वहीं, रेलवे स्टेशन रोड पर भी डग्गामार वाहन रोज की तरह खड़े हुए नहीं दिखे। बस स्टेशन के आसपास बिचौलिए यात्रियों को परेशान करते दिखाई दिए। रोडवेज तिराहे पर यातायात पुलिस के जवान यातायात को नियंत्रित कर रहे थे, वहीं यातायात पुलिस के बूथ के सामने ही डग्गामार वाहनों के बिचौलिए सक्रिय नजर आए।
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दोपहर करीब एक बजे बजे रेलवे बस स्टेशन पर ऑटो से लखनऊ की बस पकड़ने के लिए एक ही परिवार के तीन लोग पहुंचे। ऑटो से उतरते ही एक बिचौलिए ने उन्हें रोक लिया और पूछा कि कहां जाना है? उन्होंने बताया कि लखनऊ जाना है। बिचौलिए ने कहा कि साधारण बस से जितना किराया लखनऊ का लगता है उतने ही किराये में एसी कार से लखनऊ ले चलूंगा। कहा कि रोडवेज बस से जितना समय लगता है उससे दो घंटे कम समय में लखनऊ पहुंचा दूंगा। सवारी ने पूछा कितना किराया लगेगा? बिचौलियों ने बताया कि एक सवारी का 500 रुपये। उन्हाेंने कहा कि एक सवारी का 450 रुपये दूंगा। पहले तो बिचौलिए ने उनकी बात नहीं मानी लेकिन जब वह आगे बढ़ने लगे तो बिचौलिए ने उन्हें रोक लिया और 450 रुपये में लखनऊ ले जाने के लिए तैयार हो गया। इसके बाद बिचौलियों ने तीनों सवारियों को ई-रिक्शा में बैठाकर मोहद्दीपुर की ओर टैक्सी में बैठाने के लिए भेज दिया। इस बीच एक युवक दिल्ली जाने के लिए पहुंचा तो एक बिचौलिया विजिटिंग कार्ड लेकर वहां पहुंच गया और उस यात्री को देने की कोशिश करने लगा। यात्री ने जब विजिटिंग कार्ड नहीं लिया तो बिचौलिए ने कहा कि वह सिर्फ 900 रुपये में उसे दिल्ली एसी बस से भिजवा देगा। जबकि रोडवेज की एसी बस का किराया 1800 रुपये है। यात्री ने उसकी बात नहीं मानी और वह रोडवेज बस में जाकर बैठ गया।
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विरोध के बाद बनी सहमति थी सहमति
बस स्टेशन के आसपास से हो रहे डग्गामार वाहनों के संचालन के विरोध में सोमवार को रोडवेज के अधिकारियों और कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। परिवहन विभाग पर डग्गामार वाहन संचालकों से मिलीभगत होने का आरोप लगाया था। इसके बाद मंगलवार को परिवहन विभाग, यातायात विभाग और रोडवेज के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया था कि बस स्टेशन के एक किलोमीटर परिधि में निजी बसें संचालित नहीं होंगी।
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वर्जन...
परिवहन विभाग की ओर से डग्गामार वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत करीब 40 टैक्सी और बसों पर कार्रवाई की गई है। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
- संजय कुमार झा, आरटीओ प्रवर्तन