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Gorakhpur News: थाने में एसओ के कमरे में बैठकर वहाब चलाता था पशु तस्करी का नेटवर्क

Sat, 27 Sep 2025 10:19 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Sep 2025 10:19 PM IST
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Gorakhpur News: Wahab used to run the animal smuggling network sitting in the SO's room in the police station.
संतकबीरनगर जिले के एक थाना प्रभारी पर मिलीभगत का शक, एसटीएफ जांच में जुटी
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एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में खुला राज-खुद को अमित बताकर थाने में बैठता था वहाब

गोरखपुर। पशु तस्करों से पुलिस की मिलीभगत की चर्चा आम है लेकिन एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में जो पता चला है, वह हैरान कर देने वाला है। पता चला है कि गोंडा में मोस्ट वांटेड जिस पशु तस्कर वहाब को पुलिस यूपी से लेकर बिहार तक ढूंढ़ने में जुटी है, वह बीते दिनों तक संतकबीनगर के एक थाने में एसओ के कमरे में बैठकर पशु तस्करी का नेटवर्क चलाता था। अब एसटीएफ वहाब को तलाशने के साथ एसओ की भूमिका भी जांच रही है। एसओ पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
यही नहीं, वहाब ने इनामी घोषित होने के बाद अपना नाम छिपा लिया और खुद को अमित बताने लगा। सूत्रों के अनुसार, ऐसा उसने एसओ की मिलीभगत से की। उसने ऐसा इसलिए किया कि सबको पता था कि वहाब बड़ा पशु तस्कर है। अमित नाम रख लेने से वह आराम से तस्करी का नेटवर्क संचालित कर लेता।
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मूलरूप से संतकबीरनगर जिले के रहने वाले वहाब को पुलिस अंतरराज्यीय पशु तस्करी गिरोह का सरगना मानती है। छह माह पहले वहाब की गोंडा में पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में वहाब के चालक के पैर में गोली लगी थी लेकिन वह खुद मौके से भाग निकला था। पिपराइच में छात्र दीपक की हत्या के मामले में भी वह आरोपी है।
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एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, अभी तक की जांच में पता चला है कि संतकबीरनगर जिले के एक थाना प्रभारी की सीधी मिलीभगत से वहाब को पुलिस का संरक्षण मिला हुआ था। वह न केवल पुलिस सुरक्षा के बीच रह रहा था बल्कि थाने को ही अपने सुरक्षित अड्डे की तरह इस्तेमाल कर रहा था। पशु तस्करी का धंधा चलाने के लिए वह पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी पहले से जुटा लेता था। इससे दबिश विफल हो जाती थी।

अधिकारियों को पता चला है कि वहाब अमित के नाम से थाने में दाखिल होता था और वहां लंबे समय तक ठहरता भी था। उसके ठहरने और संचालन की पूरी जानकारी थाना प्रभारी को थी। यही वजह है कि अब एसटीएफ ने थाना प्रभारी की भूमिका की जांच के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंप दी है। इस खुलासे के बाद यह संदेह और गहरा हो गया है कि पशु तस्करी के नेटवर्क में केवल अपराधी ही नहीं बल्कि कुछ जिम्मेदार भी साझेदार हैं।
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