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Gorakhpur News: नगर निगम बोर्ड की बैठक में हंगामा..विपक्षी पार्षद जमीन पर लेटे

Tue, 18 Feb 2025 01:14 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 18 Feb 2025 01:14 AM IST
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Gorakhpur News: Uproar in the Municipal Corporation Board meeting..Opposition councilor lying on the ground
नगर निगम सदन की बैठक में जीआईएस सर्वे का विरोध करते सपा पार्षद ।
नगर निगम बोर्ड की 10वीं बैठक में जीआईएस सर्वे का विरोध, एजेंडे में शामिल नहीं होने के बाद भी स्वीकृत हो गया मूल बजट
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दुकानों का किराया बढ़ाने के मुद्दे पर पार्षदों ने उठाए सवाल


गोरखपुर। नगर निगम बोर्ड की 10वीं बैठक में सोमवार को सपा पार्षदों ने जीआईएस सर्वे का विरोध करते हुए जबरदस्त हंगामा किया। इसे वापस लेने की मांग को लेकर पार्षद धरने पर बैठ गए। कुछ पार्षद नीचे लेट गए। नीचे बैठकर नारेबाजी शुरू की तो मेयर और नगर आयुक्त उन्हें समझाने लगे। असमर्थ रहने पर नगर आयुक्त ने भोजनावकाश की घोषणा कर दी।
इस दौरान भी सपा पार्षद धरने से नहीं उठे। करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन के बाद उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर दिया और सदन से बाहर चले गए। हंगामे के बीच सदन की 9वीं बैठक की कार्यवाही, 7वीं बैठक की अनुपालन आख्या की पुष्टि के साथ पुनरीक्षित बजट 2024-25 और 2025-26 के मूल बजट को स्वीकृति दी गई।
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जीआईएस सर्वे पर सपा पार्षदों को भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी, सौरभ विश्वकर्मा, शिवेंद्र मिश्रा, पिंटू गौड़, ऋषि मोहन मिश्रा समेत अन्य पार्षदों ने भी समर्थन किया। बाद में जब लगा कि पार्टी के खिलाफ हो जाएगा तो धरने पर बैठने से परहेज करते हुए अपनी सीट पर आकर बैठ गए। पिंटू गौड़ ने निगम प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि ‘कितना भी लगा लो तेल, साबुन, सेंट, नगर निगम में कोई नहीं परमानेंट।’
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सपा पार्षद जियाउल इस्लाम ने कहा कि नगर निगम सदन संपत्ति कर की नियमावली नहीं बना सकता। नियमों के अनुसार इसकी नियमावली शासन बना कर आपत्ति मांगता है, उसके बाद गजट प्रकाशन होता है। दूसरा, गोरखपुर बी श्रेणी का शहर है, लेकिन यहां हम ए श्रेणी का नियम विरुद्ध 27 फीसदी संपत्ति कर ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 173 और 174 का उल्लंघन करते हुए कारपेट एरिया की गणना गलत कर रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि जिसका संपत्ति कर एक हजार रुपये आता था, उसका 12 हजार आने लगा लगा। शहर में 1.75 लाख मकान मालिक इससे पीड़ित हैं। सपा पार्षद दल के नेता अशोक यादव ने कहा कि ज्ञापन सौंपने के बाद भी एक कमेटी तक नहीं बनाई गई। जब तक सर्वे वापस नहीं होता, विरोध जारी रहेगा।
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धरने के दौरान नीचे लेट गए सहाब अंसारी
जीआईएस का विरोध करते हुए सपा के सभी पार्षद नीचे बैठ गए थे। वहीं, सहाब अंसारी हाथ में बैनर लिए हुए लेट गए। भोजनावकाश के दौरान सभी अधिकारी और भाजपा पार्षद भोजन करने चले गए लेकिन विपक्ष के सभी पार्षद वहीं धरने पर बैठे रहे। वापस सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो कुछ महिला पार्षदों ने अपनी बात रखी। 3:40 बजे धरने पर बैठे पार्षद पार्षदों ने उठकर मेयर के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध वाला बैनर मेयर के काउंटर पर रखकर बाहर निकल गए।
फरवरी में पुनरीक्षित बजट पेश करने पर घेरा
बैठक के एजेंडे में पुनरीक्षित बजट 2024-25 शामिल था। लेखाधिकारी रवि सिंह ने इसे सदन के समक्ष पेश किया। सपा पार्षद जियाउल ने समर्थन दिया लेकिन कहा कि यह फरवरी में पेश हो रहा, जिसे नवंबर में ही हो जाना था। कहा कि यह बजट सदन में सपा और भाजपा के पार्षद पास न करें तो सभी अधिकारियों की ओर से इस बजट के अनुपालन में कराए गए कार्यों के हस्ताक्षर शून्य हो जाएंगे। बजट पास नहीं हुआ तो कम से कम तीन बार कार्यकारिणी और तीन बार बोर्ड से पास करना पड़ेगा, तब जाकर शासन से पास होगा। इसपर नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने गलती को स्वीकार किया और लेखाधिकारी से जवाब मांग लिया। यह भी पूछा कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा, इसकी क्या योजना है, यह भी बताएं? उन्होंने कहा कि बैठक में निरस्त हो गया तो हम सब के हस्ताक्षरों का कोई मोल नहीं रह जाएगा। नगर आयुक्त ने चेताया कि भविष्य में ऐसा हुआ तो जवाबदेही तय करते हुए सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।
बिना एजेंडे में शामिल किए पेश हो गया मूल बजट
सदन के एजेंडे में केवल पुनरीक्षित बजट शामिल था। वहीं, जब लेखाधिकारी ने मूल बजट 2025-26 पढ़ना शुरू किया तो पार्षदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कहा कि यह सदन का अपमान है। बिना एजेंडे में शामिल किए बजट कैसे पेश कर सकते हैं। भाजपा पार्षद रणंजय सिंह जुगनू, ऋषि मोहन वर्मा ने पूछा कि बिना कॉपी मिले आखिर बजट को कैसे पढ़ेंगे? अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र ने तत्काल सभी पार्षदों को बजट की कॉपी उपलब्ध कराई। जियाउल ने सुझाव दिया कि दो दिन बाद दोबारा बैठक बुला कर मूल बजट पास करा लिया जाए। मुख्य नगर लेखा परीक्षक कर्म विक्रम श्रीवास्तव ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बिना एजेंडे के मूल बजट प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। लेकिन अधिकारियों ने दबाव बना उन्हें बैठा दिया।
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दुकानों के बढ़े किराए पर घेरा

भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने मेयर और नगर आयुक्त को निगम की 2270 दुकानों की किराया बढ़ोतरी के मुद्दे पर घेरा। कहा कि कार्यकारिणी से पास हुए किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव को निगम सदन की बैठक में सत्ता एवं विपक्ष के 80 में से 58 पार्षदों के लिखित हस्ताक्षर के साथ विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद भी यह लागू हो गया लेकिन तथ्य छिपा कर 7वीं बैठक की अनुपालन आख्या में दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि उनके सौंपे गए पत्र को अनुपालन आख्या में दर्ज किया जाए। विश्वजीत के समर्थन में कई और पार्षद भी आए। उन्होंने बढ़ा किराया रद्द कर दुकानदारों के साथ किए गए अनुबंध के आधार पर किराया वसूल किए जाने की मांग की। जवाब में नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि नगर निगम ने हाईकोर्ट में लिख कर दिया है कि 1300 दुकानदारों ने किराया जमा कर दिया है। ऐसे में हाईकोर्ट में मामले की पैरवी की जाएगी और हम जीतेंगे। उन्होंने विश्वजीत त्रिपाठी के सौंपे गए पत्र को अनुपालन आख्या में शामिल करने का आश्वासन दिया।
ये भी उठाए गए मुद्दे
पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने जलनिकासी के मुद्दा उठाते हुए कहा कि गोरखनाथ मंदिर गेट नंबर 2 के सामने जाहिदाबाद, लेबर मंडी के अंदर जाने वाली सड़क के तिराहे पर मिलता है। वहीं से एनएच द्वारा सोनौली मार्ग पर बड़ा नाला का निर्माण है, 5वीं बैठक से मांग कर रहे हैं कि उससे कॉलोनी का नाला जोड़ दिया जाए। लेकिन पीडब्ल्यूडी का कहना है कि नाला में बिजली निगम का अत्यधिक बिजली केबिल आने के कारण नाला जोड़ने में समस्या उत्पन्न हो रही है। ऋषि मोहन ने सवाल उठाया कि बिजली निगम और लोक निर्माण विभाग तालमेल बिठा कर अपने अपने हिस्से का काम कर ले रहे हैं लेकिन नगर निगम अपने जलनिकासी का समाधान क्यों नहीं करा पा रहा? यह पूरे शहर का मसला है। इस सवाल के समर्थन में सदन के अधिकांश पार्षद थे। पार्षदों ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग का कहना है कि वह कॉलोनी नहीं सड़क के पानी के निकासी के लिए नाला बनाता है। नगर आयुक्त ने सदन को आश्वस्त किया कि यह गंभीर मुद्दा है। विश्वास दिलाया कि सदन की भावना से अवगत कराते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव को पत्र लिखा जाएगा।
वार्ड नंबर 47 की पार्षद सुमन त्रिपाठी ने वार्ड में ट्रैक्टर-ट्रॉली की मांग की। साथ ही सफाई का मुद्दा उठाया। राप्तीनगर की पार्षद पूनम सिंह ने घटिया गुणवत्ता वाली गिट्टी, सीमेंट और मोरंग का निर्माण कार्यों में इस्तेमाल का मसला उठाया। इस पर अन्य पार्षदों का भी समर्थन मिला। पथ प्रकाश बिंदुओं की खरीद, ट्रिपल ए की खरीद और डबल ए गुणवत्ता के बिंदु लेने पर सवाल उठाया। वारंटी में वापस हुई लाइट का भी ब्योरा मांगने के साथ जोनल कार्यालय में 50 हजार तक के ही मामलों की सुनवाई पर भी सवाल उठाए। कल्याणपुर के पार्षद शिवेंद्र मिश्र ने बड़े काजीपुर और अन्य गलियों में पानी की आपूर्ति के साथ बालू आने की शिकायत की।
वार्ड नंबर 44 बसंतपुर के पार्षद बिजेंद्र अग्रहरि ने गारबेज ट्रांसफर स्टेशन से उठ रही गंदगी से आसपास के नागरिकों को हो रही दिक्कत का मामला उठाया। श्रीराम चौक की पार्षद लाली गुप्ता ने नगर निगम की ओर से दी गई गलत जानकारी पर नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों की जांच की मांग की। संझाई वार्ड के पार्षद अभिषेक ने सोलर लाइटों के बंद होने, बिना जलापूर्ति जलकर लिए जाने, वार्ड की सड़कों एवं जलनिकासी के लिए नालियों के निर्माण का मसला उठाया। पवन त्रिपाठी ने भी जलनिकासी का मसला उठाते हुए बड़े नालों से छोटी नालियों को जोड़ने की मांग रखी।
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सदन में इन प्रस्तावों पर मिली स्वीकृति
- सदन में मूल बजट वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय पक्ष 1281 करोड़ 88 लाख 48 हजार रुपये और 910 करोड़ 93 लाख 75 रुपये का व्यय स्वीकृत हुआ।
- पुनरीक्षित आय-व्ययक अनुमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्तियों का अनुमान 841 करोड़ 74 लाख 45 हजार रुपये और व्यय का अनुमान 970 करोड़ 74 लाख 25 हजार रुपये की स्वीकृति मिली।
- एक मार्च से से 30 जून तक डिजिटल/ऑनलाइन पेमेंट करने पर 15 फीसदी, अन्य माध्यम से भुगतान पर 10 प्रतिशत फीसदी और एक जुलाई से 31 दिसंबर तक डिजिटल/ऑनलाइन पेमेंट करने पर 12 फीसदी एवं अन्य माध्यम से भुगतान पर 8 प्रतिशत की छूट दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की।

- सदन को नक्शा प्रोजेक्ट के बारे में अवगत कराया गया।
- सुथनी में 35 एकड़ की इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना में मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं एवं नगर निगम गोरखपुर एडमिन ब्लाक निर्माण कार्य कराने जाने की स्वीकृति मिली।
- तंबाकू उत्पादकों की बिक्री के लिए लाइसेंस शुल्क निर्धारण के संबंध में मिली 470 आपत्तियों के निस्तारण उपरांत उपविधि को सदन में स्वीकृत किया गया।
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