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गोरखपुर यूको बैंक: 10 लाख के गबन का आरोपी हेड कैशियर गिरफ्तार, पहले था बैंक में ही स्वीपर- ऐसे हुई जानकारी

Sun, 29 Dec 2024 11:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 29 Dec 2024 11:13 AM IST
सार

यूको बैंक शाहपुर में हेड कैशियर के द्वारा गबन का मामला 29 नवंबर को सामने आया था। गोला थाना क्षेत्र की उचगांव निवासी राधिका पासबुक प्रिंट कराने आई थीं। उन्हें पता चला कि खाते में पैसा ही नहीं जमा है, जबकि 11 नवंबर को 43,500 रुपये जमा किए थे। जमा पर्ची भी उनके पास थी। शाखा प्रबंधक से हेड कैशियर की शिकायत की। इसी के बाद जांच से मामला खुला।

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In Gorakhpur UCO Bank, Head cashier accused of embezzlement of ten lakhs arrested
गिरफ्तार हेड कैशियर - फोटो : स्त्रोत-पुलिस

विस्तार

यूको बैंक की शाहपुर शाखा में दस लाख रुपयेे के गबन के आरोपी हेड कैशियर कलीम अहमद को बेलघाट पुलिस ने शनिवार को सिकरीगंज के घुचियारी गांव से पकड़ लिया। हालांकि मामले में एक अन्य आरोपी उसका स्वीपर भाई शमीम उर्फ रिंकू अब भी फरार है। उधर, बैंक की गोरखपुर मुख्य शाखा की तरफ से केस दर्ज कराने के लिए एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया गया है।

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यूको बैंक शाहपुर में हेड कैशियर के द्वारा गबन का मामला 29 नवंबर को सामने आया था। गोला थाना क्षेत्र की उचगांव निवासी राधिका पासबुक प्रिंट कराने आई थीं। उन्हें पता चला कि खाते में पैसा ही नहीं जमा है, जबकि 11 नवंबर को 43,500 रुपये जमा किए थे। जमा पर्ची भी उनके पास थी।
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शाखा प्रबंधक से हेड कैशियर की शिकायत की। इसके बाद जैसे-जैसे लोगों को जानकारी हुई वे भी पासबुक अपडेट कराने लगे। एक-एक कर करीब 23 लोगों ने शिकायत की। पांच मामलों में बेलघाट पुलिस ने केस दर्ज किया। आरोप है कि कैशियर उपभोक्ताओं से रुपये लेकर उन्हें फर्जी पर्ची थमा देता था।
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कुछ लोगों के रुपये फर्जी अंगूठा और हस्ताक्षर से जरिये भी निकालने का आरोप है। इसी बैंक में आरोपी कैशियर का भाई शमीम भी स्वीपर के पद पर काम करता था। उसे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद से दोनों भाई फरार हो गए। पुलिस ने कैशियर को तो दबोच लिया है, पर शमीम की तलाश जारी है।


2004 में स्वीपर था हेड कैशियर
वर्ष 2004 में कलीम अहमद संविदा पर स्वीपर के पद पर नियुक्त हुआ था। इसके बाद वह चपरासी फिर लिपिक और 2009 में कैशियर बन गया। एक ही जगह लंबे समय तक काम करने से उसकी काफी लोगों से जान-पहचान हो गई। लोग भी उस पर विश्वास कर रुपया और पासबुक देकर चले जाते थे। आरोप है कि अभी तक 23 उपभोक्ताओं से करीब 10 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। पुलिस के साथ बैंक प्रबंधन की टीम मामले की छानबीन कर रही है।

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