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Gorakhpur News: सीतापुर से रेस्क्यू कर लाया गया बाघिन का शावक, बाघिन को नहीं रास आ रहा क्वारंटीन- जानिए क्यों

Sat, 11 Oct 2025 02:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 11 Oct 2025 02:23 AM IST
सार

सीतापुर के महोली तहसील के नरनी गांव के जंगल में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई थी। इसी कारण वन विभाग की टीम ने बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया था और उसे गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। अब उसी इलाके के पास उस बाघिन का शावक दिखाई देने पर वन विभाग ने उसे भी सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

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In Gorakhpur Zoo, Tigress cub rescued from Sitapur
सीतापुर से आया बाघ का शावक - फोटो : स्त्रोत- चिडि़याघर

विस्तार

शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में सीतापुर से एक बाघ के शावक को रेस्क्यू कर लाया गया है। फिलहाल उसे पशु अस्पताल के नाइटसेल में रखा गया है। कुछ दिन पूर्व उसकी मां बाघिन को भी रेस्क्यू कर यहां लाया गया था। वर्तमान में दोनों को रेस्क्यू सेंटर के अलग-अलग नाइटसेल में रखा गया है ताकि वे धीरे-धीरे नए वातावरण के अनुरूप ढल सकें।

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जानकारी के अनुसार, सीतापुर के महोली तहसील के नरनी गांव के जंगल में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई थी। इसी कारण वन विभाग की टीम ने बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया था और उसे गोरखपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। अब उसी इलाके के पास उस बाघिन का शावक दिखाई देने पर वन विभाग ने उसे भी सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
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बृहस्पतिवार की रात यह शावक गोरखपुर लाया गया। यह नर शावक लगभग एक वर्ष का बताया जा रहा है। चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि फिलहाल शावक को निगरानी में रखा गया है। बाघिन भी अभी यहां के माहौल में पूरी तरह ढली नहीं है। दोनों को अलग-अलग नाइटसेल में रखा गया है। शावक अपनी मां से बिछड़ गया था। अब बाघिन इसे नहीं अपनाएगी।
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आक्रामक हो जाती है बाघिन
चिड़ियाघर में सीतापुर के जंगल से आई बाघिन को क्वारंटीन सेंटर रास नहीं आ रहा है। नाइटसेल में वह तनाव में रहती है और कीपर के पास जाते ही आक्रामक हो जाती है। बाघिन सामान्य से कम खुराक भी ले रही है। चिड़ियाघर के चिकित्सक उसकी विशेष निगरानी कर रहे हैं।


बाघिन को खाने के लिए बकरा और पड़वे का मीट दिया जा रहा है। कीपर किनारे से सेल में मीट डालकर निकल जाते हैं। बाघिन यदि कीपर या चिकित्सक को पास में देखती है तो आक्रामक हो जाती है। कई बार वह हमला करने के चक्कर में खुद को चोटिल कर ले रही है।

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