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Gorakhpur News: सीयर-सहजूपार के ग्रामीण अब गीडा को नहीं देना चाहते अपनी जमीन
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ग्रामीण बोले-गीडा प्रशासन पहले ही ले चुका है जमीन, जो बची है, वह उनकी और अगली पीढ़ी की जीविका का आधार
गोरखपुर। गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की विस्तार योजना का सीयर-सहजूपार के ग्रामीणों ने विरोध तेज कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन पहले ही उनकी अधिकांश जमीने औद्योगिक विकास के नाम पर ले चुका है। अब जो थोड़ी-बहुत जमीन उनके पास बची है, वही उनके और उनकी अगली पीढ़ी की आजीविका का आधार है। यदि गीडा प्रशासन इस जमीन का भी अधिग्रहण करता है, तो ग्रामीण पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे। यही कारण है कि ग्रामीणों ने मास्टर प्लान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में वे अब अपनी जमीन गीडा को नहीं देंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि आठ सितंबर 2025 को जारी सार्वजनिक सूचना की जानकारी उन्हें 17 सितंबर को हुई, जबकि आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तिथि 24 सितंबर थी। ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि पहले ही ग्राम भगवानपुर, नरकटहा और चकभोप में गीडा को जमीने दी हैं। अब उनके पास केवल सहजूपार की जमीन बची है, जिस पर उनका कृषि कार्य और आवास है। यदि यह जमीन भी चली गई, तो उनके पास न खेती करने को कुछ बचेगा और न ही रहने के लिए। छोटे किसान होने के कारण वे किसी भी दशा में और जमीन देने की स्थिति में नहीं हैं।
ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति में स्पष्ट कहा है कि गीडा द्वारा सहजूपार में तैयार किया गया मास्टर प्लान किसानों के भविष्य को संकट में डाल देगा। उनका कहना है कि यह योजना किसानों के हितों की अनदेखी करती है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे विधायक के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे।
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आपत्ति दर्ज कराने वालों में पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय दूबे, रामदयाल दुबे, केदार दुबे, कौशला नंद दुबे, अनिल दुबे, दिलीप दुबे, बालकृष्ण, अवध नारायण, गिरीश, अरुणेंद्र, विजय शंकर दुबे, जयशंकर, शिव मौर्य, सुधीर, दयाशंकर, सरविनदू, ग्राम प्रधान वीना दुबे आदि शामिल हैं।
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गोरखपुर। गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की विस्तार योजना का सीयर-सहजूपार के ग्रामीणों ने विरोध तेज कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन पहले ही उनकी अधिकांश जमीने औद्योगिक विकास के नाम पर ले चुका है। अब जो थोड़ी-बहुत जमीन उनके पास बची है, वही उनके और उनकी अगली पीढ़ी की आजीविका का आधार है। यदि गीडा प्रशासन इस जमीन का भी अधिग्रहण करता है, तो ग्रामीण पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे। यही कारण है कि ग्रामीणों ने मास्टर प्लान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी हाल में वे अब अपनी जमीन गीडा को नहीं देंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि आठ सितंबर 2025 को जारी सार्वजनिक सूचना की जानकारी उन्हें 17 सितंबर को हुई, जबकि आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तिथि 24 सितंबर थी। ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि पहले ही ग्राम भगवानपुर, नरकटहा और चकभोप में गीडा को जमीने दी हैं। अब उनके पास केवल सहजूपार की जमीन बची है, जिस पर उनका कृषि कार्य और आवास है। यदि यह जमीन भी चली गई, तो उनके पास न खेती करने को कुछ बचेगा और न ही रहने के लिए। छोटे किसान होने के कारण वे किसी भी दशा में और जमीन देने की स्थिति में नहीं हैं।
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ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति में स्पष्ट कहा है कि गीडा द्वारा सहजूपार में तैयार किया गया मास्टर प्लान किसानों के भविष्य को संकट में डाल देगा। उनका कहना है कि यह योजना किसानों के हितों की अनदेखी करती है और इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे विधायक के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करेंगे।
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आपत्ति दर्ज कराने वालों में पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय दूबे, रामदयाल दुबे, केदार दुबे, कौशला नंद दुबे, अनिल दुबे, दिलीप दुबे, बालकृष्ण, अवध नारायण, गिरीश, अरुणेंद्र, विजय शंकर दुबे, जयशंकर, शिव मौर्य, सुधीर, दयाशंकर, सरविनदू, ग्राम प्रधान वीना दुबे आदि शामिल हैं।