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Gorakhpur News: कुंभकरण की मौत की गुत्थी सुलझी, सर्पदंश के मिले प्रमाण
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चड़ीगढ़ पहुंची गोरखपुर पुलिस ने ढूंढ़ निकाला पता, दर्ज किए बयान
वर्ष 2005 में बतौर ट्रक चालक नौकरी करने गया था कुंभकरण, नहीं लौटा गांव
18 वर्ष पहले महिला समेत तीन के खिलाफ दर्ज हुआ था अपहरण का केस
गोरखपुर। 20 वर्ष पहले बतौर ट्रक चालक नौकरी करने चंड़ीगढ़ गए पीपीगंज क्षेत्र के रहने वाले कुंभकरण की मौत की गुत्थी लगभग सुलझ गई है। सीओ कैंपियरगंज की जांच में सर्पदंश से उसकी मौत के प्रमाण मिले हैं। चंड़ीगढ़ गई गोरखपुर पुलिस की टीम ने उसका पता तस्दीक करने के साथ ही आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। सीओ जल्द ही रिपोर्ट एसएसपी को सौंपेंगे।
पीपीगंज इलाके के बढ़नी गांव का रहने वाला कुंभकरण चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। बहन सुमित्रा के मुताबिक कुंभकरण आठ मई 2005 को गुलरिहा निवासी ममेरे भाई के साथ चंड़ीगढ़ के रहने वाले ट्रांसपोर्टर अमरजीत सिंह के यहां नौकरी करने गया था। इसके बाद वापस नहीं लौटा। परिजन खोजबीन करते हुए चंड़ीगढ़ गए तो ट्रांसपोर्टर ने सर्पदंश से कुंभकरण की मृत्यु की जानकारी दी। इसके बाद कुंभकरण के पिता राजाराम ने वर्ष 2007 में कोर्ट में अर्जी दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर एक युवती समेत सात के विरुद्ध अपहरण का केस दर्ज किया गया। सुमित्रा का आरोप है कि मामले की जांच कर रहे विवेचक ने सर्पदंश से कुंभकरण की मृत्यु होने का हवाला देते हुए केस में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
इसके बाद कुंभकरण की बहन सुमित्रा ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जिसमें कहा गया कि विवेचक ने सर्पदंश से भाई की मौत होने का दावा करते हुए केस में एफआर तो लगा दी लेकिन उसके बारे में नहीं बता सके। न ही कोई प्रमाणपत्र ही दिखाया। कोर्ट ने एसएसपी गोरखपुर को किसी राजपत्रित अधिकारी से मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद मामले की जांच तत्कालीन सीओ कैंपियरगंज गौरव त्रिपाठी को सौंपी गई थी।
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कोट
चंड़ीगढ़ का पता तस्दीक करने के साथ ही वहां रह रहे लोगों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। इसके साथ ही चंड़ीगढ़ पीजीआई से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होना भी प्रमाणित हो गया है। रिपोर्ट जल्द ही उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
-विवेक कुमार तिवारी, सीओ कैंपियरगंज
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आईजीआरएस पर भी की थी शिकायत
सुमित्रा ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों के साथ आईजीआरएस पोर्टल पर भी की थी। परिवार का दावा था कि अगर नए सिरे से मामले की जांच हो तो आरोपियों की साजिश का पर्दाफाश हाे सकता है। एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच सीओ कैंपियरगंज को सौंपी गई है। विवेचना जारी है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
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वर्ष 2005 में बतौर ट्रक चालक नौकरी करने गया था कुंभकरण, नहीं लौटा गांव
18 वर्ष पहले महिला समेत तीन के खिलाफ दर्ज हुआ था अपहरण का केस
गोरखपुर। 20 वर्ष पहले बतौर ट्रक चालक नौकरी करने चंड़ीगढ़ गए पीपीगंज क्षेत्र के रहने वाले कुंभकरण की मौत की गुत्थी लगभग सुलझ गई है। सीओ कैंपियरगंज की जांच में सर्पदंश से उसकी मौत के प्रमाण मिले हैं। चंड़ीगढ़ गई गोरखपुर पुलिस की टीम ने उसका पता तस्दीक करने के साथ ही आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। सीओ जल्द ही रिपोर्ट एसएसपी को सौंपेंगे।
पीपीगंज इलाके के बढ़नी गांव का रहने वाला कुंभकरण चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। बहन सुमित्रा के मुताबिक कुंभकरण आठ मई 2005 को गुलरिहा निवासी ममेरे भाई के साथ चंड़ीगढ़ के रहने वाले ट्रांसपोर्टर अमरजीत सिंह के यहां नौकरी करने गया था। इसके बाद वापस नहीं लौटा। परिजन खोजबीन करते हुए चंड़ीगढ़ गए तो ट्रांसपोर्टर ने सर्पदंश से कुंभकरण की मृत्यु की जानकारी दी। इसके बाद कुंभकरण के पिता राजाराम ने वर्ष 2007 में कोर्ट में अर्जी दाखिल की। कोर्ट के आदेश पर एक युवती समेत सात के विरुद्ध अपहरण का केस दर्ज किया गया। सुमित्रा का आरोप है कि मामले की जांच कर रहे विवेचक ने सर्पदंश से कुंभकरण की मृत्यु होने का हवाला देते हुए केस में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
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इसके बाद कुंभकरण की बहन सुमित्रा ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जिसमें कहा गया कि विवेचक ने सर्पदंश से भाई की मौत होने का दावा करते हुए केस में एफआर तो लगा दी लेकिन उसके बारे में नहीं बता सके। न ही कोई प्रमाणपत्र ही दिखाया। कोर्ट ने एसएसपी गोरखपुर को किसी राजपत्रित अधिकारी से मामले की जांच कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद मामले की जांच तत्कालीन सीओ कैंपियरगंज गौरव त्रिपाठी को सौंपी गई थी।
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कोट
चंड़ीगढ़ का पता तस्दीक करने के साथ ही वहां रह रहे लोगों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। इसके साथ ही चंड़ीगढ़ पीजीआई से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होना भी प्रमाणित हो गया है। रिपोर्ट जल्द ही उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
-विवेक कुमार तिवारी, सीओ कैंपियरगंज
आईजीआरएस पर भी की थी शिकायत
सुमित्रा ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों के साथ आईजीआरएस पोर्टल पर भी की थी। परिवार का दावा था कि अगर नए सिरे से मामले की जांच हो तो आरोपियों की साजिश का पर्दाफाश हाे सकता है। एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच सीओ कैंपियरगंज को सौंपी गई है। विवेचना जारी है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।