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Gorakhpur News: कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव सनातन का पहला संस्कार

Fri, 12 Sep 2025 02:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:32 AM IST
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Gorakhpur News: The feeling of gratitude towards the doer is the first rite of Sanatan
गोरखनाथ मंदिर स्थित स्मृति सभागार में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ म
सीएम योगी ने 11वीं पुण्यतिथि पर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को दी श्रद्धांजलि
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गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना सनातन धर्म का पहला संस्कार है। भारतीय मनीषा के ज्ञान दर्शन में इस बात को प्रतिष्ठित किया गया है कि जीवन में हमारे प्रति, समाज और राष्ट्र के प्रति किसी ने योगदान दिया हो तो उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए।



मुख्यमंत्री योगी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं व ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री ने रामायण काल में हनुमान और मैनाक पर्वत के बीच हुए संवाद के मुख्य उद्धरण ‘कृते च कर्तव्यम एषः धर्म सनातनः’ को समझाते हुए कहा कि यह भाव सनातन से ही मिलता है। सनातन की परंपरा में पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने के लिए आश्विन माह का पूरा कृष्ण पक्ष ही समर्पित किया गया है। गोरक्षपीठ में ब्रह्मलीन महंतद्वय की पुण्य स्मृति में साप्ताहिक आयोजन भी कृतज्ञता ज्ञापन का ही आयाम है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का स्मरण करते हुए कहा कि महंतद्वय समाज, राष्ट्र और लोक जीवन से जुड़े हर मुद्दे पर सनातन धर्म और भारत के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे।

उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और राष्ट्रीयता के जिन मूल्यों और आदर्शों को स्थापित किया, उन्हें महंत अवेद्यनाथ ने आत्मसात कर आगे बढ़ाया। इन मूल्यों और आदर्शों के लिए, देश और धर्म के लिए महंतद्वय आजीवन समर्पित रहे। दोनों ने सदैव देश और धर्म को प्राथमिकता दी। गोरक्षपीठ आज भी उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहा है।
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