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Gorakhpur News: मासूम के शव को सरयू में किया प्रवाहित, गांव में पसरा मातम
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गगहा थाना क्षेत्र के बरईपार बड़गो की घटना
खंभे में करंट उतरने से नौ वर्षीय मासूम की गई जान
गगहा। थाना क्षेत्र के बरईपार बड़गो गांव में सोमवार की देर रात खंभे में उतरे करंट की चपेट में आने से जान गंवाने वाले नौ वर्षीय हर्ष पासवान का शव मंगलवार को जैसे ही घर पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। दोपहर बाद परिजनों ने उसके शव को बड़हलगंज मुक्ति पथ पर सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया।
बरईपार बड़गो निवासी मृत्युंजय पासवान का बेटा हर्ष पासवान (9) रोज की तरह सोमवार की शाम घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान उसने बिजली के खंभे को छू लिया। खंभे में करंट उतरने के कारण हर्ष बुरी तरह झटके से चिपक गया। परिजन दौड़कर उसे छुड़ाए और आनन-फानन में एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम करीब पांच बजे जैसे ही शव गांव में पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। दरवाजे पर बेटे का शव देख माता-पिता बार-बार बेहोश हो जा रहे थे। गांव का माहौल गमगीन हो गया। शाम छह बजे बड़हलगंज मुक्तिपथ पर सरयू नदी में जब हर्ष का शव प्रवाहित किया गया तो उसके पिता मृत्युंजय पासवान फफक पड़े। मासूम अपनी चंचलता और प्यारी आदतों के कारण पूरे गांव में लोकप्रिय था। उसके यूं अचानक चले जाने से हर किसी की आंखें नम हो गईं।
पिता मृत्युंजय पासवान का आरोप है कि गांव के इस खंभे में काफी दिनों से करंट उतर रहा था लेकिन विभाग की ओर से लापरवाही बरती गई।
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खंभे में करंट उतरने से नौ वर्षीय मासूम की गई जान
गगहा। थाना क्षेत्र के बरईपार बड़गो गांव में सोमवार की देर रात खंभे में उतरे करंट की चपेट में आने से जान गंवाने वाले नौ वर्षीय हर्ष पासवान का शव मंगलवार को जैसे ही घर पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। दोपहर बाद परिजनों ने उसके शव को बड़हलगंज मुक्ति पथ पर सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया।
बरईपार बड़गो निवासी मृत्युंजय पासवान का बेटा हर्ष पासवान (9) रोज की तरह सोमवार की शाम घर के बाहर खेल रहा था। इस दौरान उसने बिजली के खंभे को छू लिया। खंभे में करंट उतरने के कारण हर्ष बुरी तरह झटके से चिपक गया। परिजन दौड़कर उसे छुड़ाए और आनन-फानन में एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम करीब पांच बजे जैसे ही शव गांव में पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। दरवाजे पर बेटे का शव देख माता-पिता बार-बार बेहोश हो जा रहे थे। गांव का माहौल गमगीन हो गया। शाम छह बजे बड़हलगंज मुक्तिपथ पर सरयू नदी में जब हर्ष का शव प्रवाहित किया गया तो उसके पिता मृत्युंजय पासवान फफक पड़े। मासूम अपनी चंचलता और प्यारी आदतों के कारण पूरे गांव में लोकप्रिय था। उसके यूं अचानक चले जाने से हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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पिता मृत्युंजय पासवान का आरोप है कि गांव के इस खंभे में काफी दिनों से करंट उतर रहा था लेकिन विभाग की ओर से लापरवाही बरती गई।