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Gorakhpur News: पापा से बता देना मैं आज भी श्रवण कुमार हूं
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गोरखपुर। मां की मौत का जिम्मेदार वैज्ञानिक का बेटा बाल सुधार गृह में अपनी गलती पर पछता रहा है। उससे मिलने एक रिश्तेदार गए थे। उनसे रो-रोकर एक ही बात कह रहा था-पापा से कह देना मुझे माफ कर देंगे, उनका बेटा आज भी श्रवण कुमार है।
बुधवार को पुलिस को सौंपते हुए वैज्ञानिक राममिलन ने कहा कि जिस बेटे को वह श्रवण कुमार की उपाधि देते थे, वही अब दुश्मन बन गया। इसके जवाब में बेटे ने रिश्तेदार से यह बात कही।
गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज स्थित बाल सुधार गृह में 250 से अधिक नाबालिग दुष्कर्म, मारपीट, चोरी और हत्या के केस में बंद हैं। इन बच्चों से अलग वह दिनभर अकेले बैठा रहा। बहुत प्रयास के बाद उसने थोड़ा खाना खाया, वह भी छोड़ दिया। पहली रात उसने करवटें बदलकर बीताईं।
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र चेन्नई के सहायक वैज्ञानिक राम मिलन ने बताया कि वह हमेशा पत्नी आरती से कहते थे कि बेटे के गुण श्रवण कुमार से मिलते हैं। वह हमलोगों के बारे में इतनी कम उम्र में ही सोचने लगा है। मां की देखभाल के लिए चेन्नई से उसे गोरखपुर भेज दिया था।
स्कूल से भागता था बेटा
बताया जा रहा है कि राममिलन के साथ रहकर बेटे ने चेन्नई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के स्कूल में हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी। वह पढ़ने में भी बहुत तेज था। गणित से इंटर की पढ़ाई कर रहा था। वह इंजीनियर बनना चाहता था। चेन्नई से पढ़ाई करने के बाद जब गोरखपुर आया तो यहां का स्कूल बिल्कुल भी नहीं भा रहा था। इसलिए वह हमेशा स्कूल जाने से मना करता था। पिता से कई बार उसने चेन्नई बुलाने का आग्रह भी किया था।
शेयर मार्केट में लगाता था रुपये
बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक के बेटे को चेन्नई से ही कम उम्र में रुपये कमाने की लत लग गई थी। वह शेयर मार्केट में रुपये लगाता था। उसके डीमैट अकाउंट में अभी भी 15 हजार रुपये हैं। वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था। उसे लगता था कि वह गोरखपुर में यह सब नहीं कर पाएगा, इसलिए परेशान रहने लगा था। यही वजह है कि दो दिसंबर को सुबह 8:30 बजे स्कूल जाने का दबाव बनाने पर गलती से मां आरती को धकेल दिया था। इसके बाद एक झूठ छिपाने के लिए उसे कई झूठ बोलने पड़े।
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बुधवार को पुलिस को सौंपते हुए वैज्ञानिक राममिलन ने कहा कि जिस बेटे को वह श्रवण कुमार की उपाधि देते थे, वही अब दुश्मन बन गया। इसके जवाब में बेटे ने रिश्तेदार से यह बात कही।
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गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज स्थित बाल सुधार गृह में 250 से अधिक नाबालिग दुष्कर्म, मारपीट, चोरी और हत्या के केस में बंद हैं। इन बच्चों से अलग वह दिनभर अकेले बैठा रहा। बहुत प्रयास के बाद उसने थोड़ा खाना खाया, वह भी छोड़ दिया। पहली रात उसने करवटें बदलकर बीताईं।
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र चेन्नई के सहायक वैज्ञानिक राम मिलन ने बताया कि वह हमेशा पत्नी आरती से कहते थे कि बेटे के गुण श्रवण कुमार से मिलते हैं। वह हमलोगों के बारे में इतनी कम उम्र में ही सोचने लगा है। मां की देखभाल के लिए चेन्नई से उसे गोरखपुर भेज दिया था।
स्कूल से भागता था बेटा
बताया जा रहा है कि राममिलन के साथ रहकर बेटे ने चेन्नई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के स्कूल में हाईस्कूल तक पढ़ाई की थी। वह पढ़ने में भी बहुत तेज था। गणित से इंटर की पढ़ाई कर रहा था। वह इंजीनियर बनना चाहता था। चेन्नई से पढ़ाई करने के बाद जब गोरखपुर आया तो यहां का स्कूल बिल्कुल भी नहीं भा रहा था। इसलिए वह हमेशा स्कूल जाने से मना करता था। पिता से कई बार उसने चेन्नई बुलाने का आग्रह भी किया था।
शेयर मार्केट में लगाता था रुपये
बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक के बेटे को चेन्नई से ही कम उम्र में रुपये कमाने की लत लग गई थी। वह शेयर मार्केट में रुपये लगाता था। उसके डीमैट अकाउंट में अभी भी 15 हजार रुपये हैं। वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था। उसे लगता था कि वह गोरखपुर में यह सब नहीं कर पाएगा, इसलिए परेशान रहने लगा था। यही वजह है कि दो दिसंबर को सुबह 8:30 बजे स्कूल जाने का दबाव बनाने पर गलती से मां आरती को धकेल दिया था। इसके बाद एक झूठ छिपाने के लिए उसे कई झूठ बोलने पड़े।