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Gorakhpur News: सैनिक स्कूल गोरखपुर में एच3एन1 वायरस से बीमार हुए थे छात्र
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इंफ्लुएंजा का है यह वायरस, पूर्वांचल में पहले भी मिल चुके हैं इसके केस
गोरखपुर। सैनिक स्कूल के छात्रों में फरवरी महीने में अचानक फैली बीमारी के वायरस के बारे में पुष्टि हो गई है। आरएमआरसी (क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र) की जांच में छात्रों में इंफ्लुएंजा के एच3एन1 वायरस के संक्रमण के कारण छात्रों की तबीयत खराब होने की बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह वायरस इंफ्लुएंजा का एक उप प्रकार है। इसके पहले भी पूर्वांचल में इसके संक्रमण के मामले मिल चुके हैं।
आरएमआरसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के वायरस के मामले पहले भी आ चुके है, लेकिन पहली बार इतने अधिक लोगों में वायरस का प्रभाव देखने को मिला है। इसकी पहचान रियल टाइम बेस्ड किट के माध्यम से इंफ्लुएंजा की सब टाइपिंग तकनीक से की गई है। यह तकनीक वायरस के जीनोमिक घटकों की गहराई से जांच करके उसके प्रकार की पुष्टि करती है।
आरएमआरसी के निदेशक डॉ. हरीशंकर जोशी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर वायरस की पुष्टि रियल-टाइम बेस्ड किट के जरिये की गई है। इसमें इन्फुएंजा ए वायरस के उप प्रकार एच3एन1 के बारे में पता चला है। यह किट वायरस की मौजूदगी को जल्दी और सटीकता से पहचानने में सक्षम है। इसके बाद वायरस के स्वरूप में हो रहे बदलावों पर अध्ययन किया जाएगा।
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जल्द ही शुरू होगी जीनोम सिक्वेंसिंग
आरएमआरसी में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले से दो अत्याधुनिक मशीनें स्थापित कर दी गई हैं। अब इसके जांच के लिए साफ्टवेयर भी अपलोड कर दिया गया है। साथ ही मशीनों को चलाने के लिए विशेषज्ञ की भी नियुक्ति कर दी गई है। मशीन में प्रयोग किए जाने वाले रेजिडेंट आ जाने के बाद जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू कर जीनोमिक संरचना में संभावित बदलावों को बारे में पता लगाया जा सकेगा।
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गोरखपुर। सैनिक स्कूल के छात्रों में फरवरी महीने में अचानक फैली बीमारी के वायरस के बारे में पुष्टि हो गई है। आरएमआरसी (क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र) की जांच में छात्रों में इंफ्लुएंजा के एच3एन1 वायरस के संक्रमण के कारण छात्रों की तबीयत खराब होने की बात सामने आई है। वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि यह वायरस इंफ्लुएंजा का एक उप प्रकार है। इसके पहले भी पूर्वांचल में इसके संक्रमण के मामले मिल चुके हैं।
आरएमआरसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के वायरस के मामले पहले भी आ चुके है, लेकिन पहली बार इतने अधिक लोगों में वायरस का प्रभाव देखने को मिला है। इसकी पहचान रियल टाइम बेस्ड किट के माध्यम से इंफ्लुएंजा की सब टाइपिंग तकनीक से की गई है। यह तकनीक वायरस के जीनोमिक घटकों की गहराई से जांच करके उसके प्रकार की पुष्टि करती है।
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आरएमआरसी के निदेशक डॉ. हरीशंकर जोशी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर वायरस की पुष्टि रियल-टाइम बेस्ड किट के जरिये की गई है। इसमें इन्फुएंजा ए वायरस के उप प्रकार एच3एन1 के बारे में पता चला है। यह किट वायरस की मौजूदगी को जल्दी और सटीकता से पहचानने में सक्षम है। इसके बाद वायरस के स्वरूप में हो रहे बदलावों पर अध्ययन किया जाएगा।
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जल्द ही शुरू होगी जीनोम सिक्वेंसिंग
आरएमआरसी में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले से दो अत्याधुनिक मशीनें स्थापित कर दी गई हैं। अब इसके जांच के लिए साफ्टवेयर भी अपलोड कर दिया गया है। साथ ही मशीनों को चलाने के लिए विशेषज्ञ की भी नियुक्ति कर दी गई है। मशीन में प्रयोग किए जाने वाले रेजिडेंट आ जाने के बाद जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू कर जीनोमिक संरचना में संभावित बदलावों को बारे में पता लगाया जा सकेगा।