{"_id":"688a6c939f113fa1330f8da5","slug":"gorakhpur-news-stamp-refund-fraud-was-detected-but-no-investigation-was-done-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1021427-2025-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टांप रिफंड : फर्जीवाड़ा पकड़ा गया पर नहीं हुई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टांप रिफंड : फर्जीवाड़ा पकड़ा गया पर नहीं हुई जांच
विज्ञापन
सिवान का नवाब आरजू गैंग था शक के दायरे में
2022 में एआईजी स्टांप के यहां 80 हजार के स्टांप रिफंड के लिए आया था आवेदन
गोरखपुर। फर्जी स्टांप को निबंधन कार्यालय में प्रस्तुत कर रिफंड का मामला तीन साल पहले गोरखपुर निबंधन कार्यालय में पकड़ा गया था। सिवान के नवाब आरजू गैंग का नाम इसमें सामने आया था। इसके बाद पांच साल के स्टांप की जांच तो की जा रही है लेकिन रिफंड किए गए रुपये की जांच नहीं हुई। विभाग में ही चर्चा है कि अगर रिफंड की जांच करा दी जाए तो गोरखपुर मंडल से ही कुछ मामले पकड़ में आ सकते हैं।
वर्ष 2022 में फर्जी स्टांप छापने वाले सिवान (बिहार) के कमरुद्दीन के बेटे नवाब आरजू के गिरोह से जुड़े एक युवक ने तत्कालीन एआईजी स्टांप वाल्मिकी त्रिपाठी के यहां 80 हजार रुपये का स्टांप देकर कटौती कर रुपये वापसी का आवेदन किया। नियम है कि अगर स्टांप इस्तेमाल नहीं हुआ है तो 10 प्रतिशत की कटौती करके रिफंड कर दिया जाता है। तत्कालीन एआईजी वाल्मिकी त्रिपाठी ने ट्रेजरी में स्टांप को जांच के लिए भेजा। रिकॉर्ड में पाया गया कि यह स्टांप जारी ही नहीं हुआ है, स्टांप फर्जी है। सूत्रों की माने तो आवेदन करने वाले युवक का नेटवर्क इतना तेज था कि उसे जांच की जानकारी हो गई और जब उसे बुलाया गया तो वह आया ही नहीं।
सूत्रों की माने तो नवाब आरजू और उसके पिता पहले देवरिया और कुशीनगर में फर्जी स्टांप उपलब्ध कराते थे और इसके बाद उनका दायरा बढ़ता गया। गोरखपुर के पहले उन्होंने कुछ और जिलों में रिफंड करा लिया होगा। एसटीएफ ने भी उस समय अपनी जांच में इसके संकेत दिए थे लेकिन रिफंड के मामलों की जांच नहीं हुई। हालांकि, बाद में पुलिस की जांच में सामने आया कि नवाब आरजू और उसके गैंग का फर्जी स्टांप छापने का धंधा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के अलावा देश के कई राज्यों में फैला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
2022 में एआईजी स्टांप के यहां 80 हजार के स्टांप रिफंड के लिए आया था आवेदन
गोरखपुर। फर्जी स्टांप को निबंधन कार्यालय में प्रस्तुत कर रिफंड का मामला तीन साल पहले गोरखपुर निबंधन कार्यालय में पकड़ा गया था। सिवान के नवाब आरजू गैंग का नाम इसमें सामने आया था। इसके बाद पांच साल के स्टांप की जांच तो की जा रही है लेकिन रिफंड किए गए रुपये की जांच नहीं हुई। विभाग में ही चर्चा है कि अगर रिफंड की जांच करा दी जाए तो गोरखपुर मंडल से ही कुछ मामले पकड़ में आ सकते हैं।
वर्ष 2022 में फर्जी स्टांप छापने वाले सिवान (बिहार) के कमरुद्दीन के बेटे नवाब आरजू के गिरोह से जुड़े एक युवक ने तत्कालीन एआईजी स्टांप वाल्मिकी त्रिपाठी के यहां 80 हजार रुपये का स्टांप देकर कटौती कर रुपये वापसी का आवेदन किया। नियम है कि अगर स्टांप इस्तेमाल नहीं हुआ है तो 10 प्रतिशत की कटौती करके रिफंड कर दिया जाता है। तत्कालीन एआईजी वाल्मिकी त्रिपाठी ने ट्रेजरी में स्टांप को जांच के लिए भेजा। रिकॉर्ड में पाया गया कि यह स्टांप जारी ही नहीं हुआ है, स्टांप फर्जी है। सूत्रों की माने तो आवेदन करने वाले युवक का नेटवर्क इतना तेज था कि उसे जांच की जानकारी हो गई और जब उसे बुलाया गया तो वह आया ही नहीं।
विज्ञापन
सूत्रों की माने तो नवाब आरजू और उसके पिता पहले देवरिया और कुशीनगर में फर्जी स्टांप उपलब्ध कराते थे और इसके बाद उनका दायरा बढ़ता गया। गोरखपुर के पहले उन्होंने कुछ और जिलों में रिफंड करा लिया होगा। एसटीएफ ने भी उस समय अपनी जांच में इसके संकेत दिए थे लेकिन रिफंड के मामलों की जांच नहीं हुई। हालांकि, बाद में पुलिस की जांच में सामने आया कि नवाब आरजू और उसके गैंग का फर्जी स्टांप छापने का धंधा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली के अलावा देश के कई राज्यों में फैला है।
विज्ञापन