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Gorakhpur News: योगगुरू योगानंद की जन्मस्थली पर बनेगा स्मृति भवन..निर्माण होली बाद
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27.66 करोड़ की लागत से बनेगा चार तल का योग भवन, कोतवाली से सटे है योगानंद की जन्मस्थली
गोरखपुर। दुनिया भर में योग को प्रसारित करने वाले योग गुरू परमहंस योगानंद की कोतवाली स्थित जन्म स्थली पर स्मृति भवन का निर्माण होली बाद शुरू हो जाएगा। स्मृति भवन में परमहंस योगानंद की यादें संजोयी जाएंगी। जिस कमरे में वे रहते थे उसमें रखे हुए सामान और उनकी जन्मस्थली की मिट्टी को धरोहर के तौर पर रखा जाएगा। भवन के बाहर लॉन बनाया जाएगा, जिसमें योगानंद की प्रतिमा लगाई जाएगी।
संन्यास के पूर्व योगानंद का नाम मुकुंद था। सन 1910 में, जब वे 17 वर्ष के थे, उनकी भेंट अपने गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि से हुई थी। गुरु के निर्देश पर उन्होंने सन् 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) की स्थापना की।
परमहंस योगानन्द ने 7 मार्च, 1952 को महासमाधि ली। शहर के कोतवाली क्षेत्र के मुफ्तीपुर में परमहंस योगानंद की जन्मस्थली पर 27.66 करोड़ से स्मृति भवन का निर्माण किया जाना है। इसके लिए कुछ ही दिन पहले ही पांच करोड़ रुपये मिले हैं। पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, पहली मंजिल पर पुस्तकालय व संग्रहालय बनेगा। इसमें योगानंद की अलग-अलग मुद्रा में चित्रों को सजाया जाएगा। उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं रखी जाएंगी। दूसरी मंजिल पर जहां वे रहते थे उस स्थान को मंदिर का स्वरूप दिया जाएगा, जहां आज से 131 वर्ष पहले पांच जनवरी को क्रिया योग के प्रणेता योगानंद का जन्म हुआ था। मंदिर के सामने केंद्र का दूसरा योग सेंटर बनाया जाएगा, जिसमें बैठकर योगानंद की शिष्य परंपरा के लोग योग व ध्यान कर सकेंगे। तीसरे और अंतिम तल पर दो हाल बनाए जाएंगे, जिसमें योगाभ्यास करने का इंतजाम रहेगा। ध्यान के लिए अगल से स्थान निर्धारित रहेगा। योग भवन का निर्माण 1360 वर्गमीटर में होगा।
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कोट
परमहंस योगानंद की जन्म स्थली पर इसी महीने में सभी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दूर-दराज से लोग इसे देखने आएंगे।
- रवींद्र कुमार मिश्र, उप निदेशक, क्षेत्रीय पर्यटन विभाग
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गोरखपुर। दुनिया भर में योग को प्रसारित करने वाले योग गुरू परमहंस योगानंद की कोतवाली स्थित जन्म स्थली पर स्मृति भवन का निर्माण होली बाद शुरू हो जाएगा। स्मृति भवन में परमहंस योगानंद की यादें संजोयी जाएंगी। जिस कमरे में वे रहते थे उसमें रखे हुए सामान और उनकी जन्मस्थली की मिट्टी को धरोहर के तौर पर रखा जाएगा। भवन के बाहर लॉन बनाया जाएगा, जिसमें योगानंद की प्रतिमा लगाई जाएगी।
संन्यास के पूर्व योगानंद का नाम मुकुंद था। सन 1910 में, जब वे 17 वर्ष के थे, उनकी भेंट अपने गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि से हुई थी। गुरु के निर्देश पर उन्होंने सन् 1917 में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) की स्थापना की।
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परमहंस योगानन्द ने 7 मार्च, 1952 को महासमाधि ली। शहर के कोतवाली क्षेत्र के मुफ्तीपुर में परमहंस योगानंद की जन्मस्थली पर 27.66 करोड़ से स्मृति भवन का निर्माण किया जाना है। इसके लिए कुछ ही दिन पहले ही पांच करोड़ रुपये मिले हैं। पर्यटन विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक, पहली मंजिल पर पुस्तकालय व संग्रहालय बनेगा। इसमें योगानंद की अलग-अलग मुद्रा में चित्रों को सजाया जाएगा। उनके द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं रखी जाएंगी। दूसरी मंजिल पर जहां वे रहते थे उस स्थान को मंदिर का स्वरूप दिया जाएगा, जहां आज से 131 वर्ष पहले पांच जनवरी को क्रिया योग के प्रणेता योगानंद का जन्म हुआ था। मंदिर के सामने केंद्र का दूसरा योग सेंटर बनाया जाएगा, जिसमें बैठकर योगानंद की शिष्य परंपरा के लोग योग व ध्यान कर सकेंगे। तीसरे और अंतिम तल पर दो हाल बनाए जाएंगे, जिसमें योगाभ्यास करने का इंतजाम रहेगा। ध्यान के लिए अगल से स्थान निर्धारित रहेगा। योग भवन का निर्माण 1360 वर्गमीटर में होगा।
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कोट
परमहंस योगानंद की जन्म स्थली पर इसी महीने में सभी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दूर-दराज से लोग इसे देखने आएंगे।
- रवींद्र कुमार मिश्र, उप निदेशक, क्षेत्रीय पर्यटन विभाग