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शारदीय नवरात्र : मंदिरों में गूंजे जय माता दी के जयकार
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नवरात्रि के पहले दिन गोलघर काली मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु ।
माता के विभिन्न मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, माता को भेंट की नारियल चुनरी
आस्था के साथ हुई कलश स्थापना, 10 दिन भक्ति पूर्ण रहेगा माहौल
गोरखपुर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार को हो गया। ब्रह्म बेला से ही श्रद्धालुओं ने घरों के साथ माता के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरु कर दी। पहले दिन माता शैल पुत्री की आराधना हुई। श्रद्धालुओं ने कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया व माता की आरती की। इस दौरान जय माता दी के जयकारे लगते रहे।
10 दिवसीय नवरात्र के पहले दिन गोलघर काली मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर और दाउदपुर काली मंदिर समेत तरकुलहा देवी मंदिर, बुढि़या माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। इस दौरान मंदिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने माता को नारियल चुनरी भेंट की। माता के पंडाल व मंदिरों में घट (कलश) स्थापना के साथ मां दुर्गा की मूर्तियों का विधिवत पूजन किया गया। तरकुलहा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही। कालीबाड़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में भक्तों ने भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कालीबाड़ी समिति के संरक्षक चंदन जायसवाल ने बताया कि कलश स्थापना की गई है। माता की प्रतिमा मंगलवार आएगी व शुक्रवार को स्थापित की जाएगी। वहीं दुर्गाबाड़ी बंगाली समिति के साहित्य सचिव दीपक चक्रवर्ती ने बताया गया कि माता की प्रतिमा आ चुकी है। जिनका शृंगार किया जाना है। 27 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त से माता के आवाहन के साथ पूजा शुरू हो जाएगी।
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आस्था के साथ हुई कलश स्थापना, रखा व्रत
घरों, मंदिरों व पंडालों में भी श्रद्धालुओं ने नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की घट स्थापना की और व्रत रखा। कलश स्थापना का मुहूर्त पूरे दिन होने से श्रद्धालुओं को सुविधा हुई। कलश को वैदिक मंत्रोचारण के बीच स्थापित कर दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ माता की आरती की गई। इसके साथ ही व्रत का शुभारंभ भी किया गया। बहुत से श्रद्धालुओं ने एक दिन का व्रत रखा।
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कुछ पंडालों में पहुंची दुर्गा प्रतिमाएं
मां दुर्गा की प्रतिमा सोमवार को कई पंडालों में पहुंच गईं। मूर्तिकार वासुदेव पाल ने बताया कि पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना के साथ सजावट का कार्य भी चल रहा है। बहुत सी समितियां नवरात्र के छठवें दिन माता की प्रतिमा ले जाएंगी। दो दिनों में 100 से ज्यादा प्रतिमाएं समितियों की ओर से ले जाया गया है।
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आस्था के साथ हुई कलश स्थापना, 10 दिन भक्ति पूर्ण रहेगा माहौल
गोरखपुर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार को हो गया। ब्रह्म बेला से ही श्रद्धालुओं ने घरों के साथ माता के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना शुरु कर दी। पहले दिन माता शैल पुत्री की आराधना हुई। श्रद्धालुओं ने कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया व माता की आरती की। इस दौरान जय माता दी के जयकारे लगते रहे।
10 दिवसीय नवरात्र के पहले दिन गोलघर काली मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर और दाउदपुर काली मंदिर समेत तरकुलहा देवी मंदिर, बुढि़या माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। इस दौरान मंदिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने माता को नारियल चुनरी भेंट की। माता के पंडाल व मंदिरों में घट (कलश) स्थापना के साथ मां दुर्गा की मूर्तियों का विधिवत पूजन किया गया। तरकुलहा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही। कालीबाड़ी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में भक्तों ने भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कालीबाड़ी समिति के संरक्षक चंदन जायसवाल ने बताया कि कलश स्थापना की गई है। माता की प्रतिमा मंगलवार आएगी व शुक्रवार को स्थापित की जाएगी। वहीं दुर्गाबाड़ी बंगाली समिति के साहित्य सचिव दीपक चक्रवर्ती ने बताया गया कि माता की प्रतिमा आ चुकी है। जिनका शृंगार किया जाना है। 27 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त से माता के आवाहन के साथ पूजा शुरू हो जाएगी।
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आस्था के साथ हुई कलश स्थापना, रखा व्रत
घरों, मंदिरों व पंडालों में भी श्रद्धालुओं ने नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की घट स्थापना की और व्रत रखा। कलश स्थापना का मुहूर्त पूरे दिन होने से श्रद्धालुओं को सुविधा हुई। कलश को वैदिक मंत्रोचारण के बीच स्थापित कर दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ माता की आरती की गई। इसके साथ ही व्रत का शुभारंभ भी किया गया। बहुत से श्रद्धालुओं ने एक दिन का व्रत रखा।
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कुछ पंडालों में पहुंची दुर्गा प्रतिमाएं
मां दुर्गा की प्रतिमा सोमवार को कई पंडालों में पहुंच गईं। मूर्तिकार वासुदेव पाल ने बताया कि पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना के साथ सजावट का कार्य भी चल रहा है। बहुत सी समितियां नवरात्र के छठवें दिन माता की प्रतिमा ले जाएंगी। दो दिनों में 100 से ज्यादा प्रतिमाएं समितियों की ओर से ले जाया गया है।