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Gorakhpur News: गंभीर मरीजों को मिलेगा आईसीयू बेड, ट्रामा सेंटर का भी जल्द होगा विस्तार

Thu, 07 Nov 2024 01:55 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 01:55 AM IST
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Gorakhpur News: Serious patients will get ICU beds, trauma center will also be expanded soon
गोरखपुर। एम्स के बाद अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज भी अपने अस्पताल के ट्रामा एंड इमरजेंसी वार्ड का विस्तार करने जा रहा है। इसके लिए अलग से आईसीयू वार्ड बनने जा रहा है। इसका संचालन नेहरू अस्पताल का एनेस्थीसिया विभाग करेगा। यह सुविधा शुरू होने पर आईसीयू वाले बेडों की संख्या 48 हो जाएगी। इसे निकट भविष्य में 100 बेड तक बढ़ाया जाएगा।
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यह ट्रामा एवं आईसीयू वार्ड सुपर स्पेशयलिटी विभाग के सामने बनने वाले 150 बेड के ट्रामा एवं इमरजेंसी वार्ड से अलग होगा। यह कदम सामान्य वर्ग के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उठाया जा रहा है।
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बीआरडी मेडिकल कालेज के नेहरू अस्पताल में ट्रामा एंड इमरजेंसी वार्ड में 10 बेड का आइसीयू है, जबकि 6 बेड का आईसीयू मेडिसिन विभाग में है। जबकि हर दिन 60-70 मरीज अति गंभीर अवस्था में पहुंचते हैं। सड़क हादसे में घायल या ऑपरेशन की वजह से भी आईसीयू की जरूरत वाले मरीजों को तत्काल बेड नहीं मिल पाता।
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मरीजों को एंबु बैग से ऑक्सीजन देना पड़ता है। इसी का फायदा उठाकर दलाल गंभीर मरीजों के परिजनों को तत्काल और अच्छा इलाज का झांसा देकर उनके निजी अस्पताल भेज देते हैं। इसी को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आईसीयू वाले बेडों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। वहां से इसकी मंजूरी मिल गई है। अब इस नए आईसीयू वार्ड को खोलने के लिए वार्ड की तलाश हो रही है।
इसके लिए पहले वार्ड नंबर तीन को खाली कराया गया था, क्योंकि यह एनेस्थीसिया, सर्जरी व इमरजेंसी के बीच में था। यह आईसीयू संचालित करने के लिए बेहतर विकल्प था, लेकिन यहां प्रतीक्षा के लिए जगह नहीं थी। इसलिए इस वार्ड में अब हड्डी रोग विभाग का विस्तार किया गया है। वहीं आईसीयू वार्ड के लिए वार्ड नंबर एक में संभावना तलाशी गई है।

वर्जन
आईसीयू वाले बेड कम होने से गंभीर मरीजों को भी बेड नहीं मिल पाता। इसलिए आईसीयू वाले बेड बढ़ाए जा रहे हैं। ऑपरेशन के बाद तमाम मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है, उन्हें इस वार्ड में रखा जाएगा। वहां से हालत सुधरने पर संबंधित विभाग के वार्ड में भेज दिया जाएगा। इससे अधिक से अधिक मरीजों का इलाज आसानी से होगा और कहीं एक जगह पर अत्यधिक भीड़ भी नहीं जुटेगी।
-डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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