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Gorakhpur News: जानवरों में भी गंभीर रोग...बाघिन को मोतियाबिंद तो तेंदुए को कैंसर और डायबिटीज
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चिड़ियाघर में मिर्गी का दौरा पड़ने से बब्बर शेर, कैंसर से तेंदुआ की हो चुकी है मौत
बाघिन मैलानी को है मोतियाबिंद, एक तेंदुआ को हुआ थायराइड और डायबिटीज
गोरखपुर। चिड़ियाघर में अब जानवर भी इंसानों जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बदलते खान-पान, सीमित गतिविधियों और कृत्रिम माहौल के कारण इन वन्यजीवों में अब ऐसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं जो केवल इंसानों को होती हैं। बाघिन को मोतियाबिंद तो तेंदुए को डायबिटीज है। दोनों का इलाज चल रहा है। कैंसरग्रस्त एक तेंदुए की मौत हो चुकी है।
हाल ही में चिड़ियाघर के बब्बर शेर भरत की मौत मिर्गी के दौरे से हो गई थी। बीते मई में तेंदुए मोना में कैंसर की पुष्टि हुई। उम्र अधिक होने की वजह से उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। बाद में उसने दम तोड़ दिया। वहीं पशु अस्पताल में रह रहे एक तेंदुए को ट्राइग्लिसराइड (रक्त में पाए जाने वाला एक प्रकार का वसा (फैट)) हो गया है। शरीर में सूजन होने के बाद चिकित्सकाें ने इसके खून की जांच कराई, जिसमें इस बीमारी की पुष्टि हुई।
इसके अलावा तेंदुए में थायराइड और सामान्य से कई गुना कोलोस्ट्राल भी बढ़ा मिला है। वहीं, बाघिन मैलानी की दोनों आंखें 90 प्रतिशत खराब हो चुकी हैं। इसके सही होने की उम्मीद भी नहीं है।
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कैद की वजह से बढ़ती हैं मेटाबॉलिक बीमारियां
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चिड़ियाघर में वन्यजीवों की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है। उन्हें घूमने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। एक ही तरह का भोजन मिलता है। जंगल में वह आजाद होकर घूमते हैं। अपनी इच्छानुसार जानवरों का शिकार कर खाते हैं। चिड़ियाघर में सीमित व्यायाम, बंद वातावरण और मानसिक तनाव होता है। जंगल में ये जानवर निरंतर शिकार और दौड़-भाग करते हैं जिससे उनका शारीरिक संतुलन बना रहता है। जबकि कैद में उनकी सक्रियता घट जाती है जिससे हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिक बीमारियां बढ़ती हैं।
चिड़ियाघर में जानवरों की होती है स्वास्थ्य जांच
गोरखपुर प्राणि उद्यान के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जानवरों में यह बीमारियां पहले से ही रहती हैं। जंगल में होने की वजह से उनकी जांच नहीं हो पाती। चिड़ियाघर में उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है और कोई भी समस्या होने पर तुरंत जांच कराई जाती है। इससे उनके अंदर पल रही बीमारी का पता चल जाता है और उसके अनुसार इलाज किया जाता है। बाघिन मैलानी और तेंदुए का इलाज किया जा रहा है।
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बाघिन मैलानी को है मोतियाबिंद, एक तेंदुआ को हुआ थायराइड और डायबिटीज
गोरखपुर। चिड़ियाघर में अब जानवर भी इंसानों जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बदलते खान-पान, सीमित गतिविधियों और कृत्रिम माहौल के कारण इन वन्यजीवों में अब ऐसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं जो केवल इंसानों को होती हैं। बाघिन को मोतियाबिंद तो तेंदुए को डायबिटीज है। दोनों का इलाज चल रहा है। कैंसरग्रस्त एक तेंदुए की मौत हो चुकी है।
हाल ही में चिड़ियाघर के बब्बर शेर भरत की मौत मिर्गी के दौरे से हो गई थी। बीते मई में तेंदुए मोना में कैंसर की पुष्टि हुई। उम्र अधिक होने की वजह से उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। बाद में उसने दम तोड़ दिया। वहीं पशु अस्पताल में रह रहे एक तेंदुए को ट्राइग्लिसराइड (रक्त में पाए जाने वाला एक प्रकार का वसा (फैट)) हो गया है। शरीर में सूजन होने के बाद चिकित्सकाें ने इसके खून की जांच कराई, जिसमें इस बीमारी की पुष्टि हुई।
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इसके अलावा तेंदुए में थायराइड और सामान्य से कई गुना कोलोस्ट्राल भी बढ़ा मिला है। वहीं, बाघिन मैलानी की दोनों आंखें 90 प्रतिशत खराब हो चुकी हैं। इसके सही होने की उम्मीद भी नहीं है।
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कैद की वजह से बढ़ती हैं मेटाबॉलिक बीमारियां
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चिड़ियाघर में वन्यजीवों की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है। उन्हें घूमने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। एक ही तरह का भोजन मिलता है। जंगल में वह आजाद होकर घूमते हैं। अपनी इच्छानुसार जानवरों का शिकार कर खाते हैं। चिड़ियाघर में सीमित व्यायाम, बंद वातावरण और मानसिक तनाव होता है। जंगल में ये जानवर निरंतर शिकार और दौड़-भाग करते हैं जिससे उनका शारीरिक संतुलन बना रहता है। जबकि कैद में उनकी सक्रियता घट जाती है जिससे हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिक बीमारियां बढ़ती हैं।
चिड़ियाघर में जानवरों की होती है स्वास्थ्य जांच
गोरखपुर प्राणि उद्यान के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जानवरों में यह बीमारियां पहले से ही रहती हैं। जंगल में होने की वजह से उनकी जांच नहीं हो पाती। चिड़ियाघर में उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है और कोई भी समस्या होने पर तुरंत जांच कराई जाती है। इससे उनके अंदर पल रही बीमारी का पता चल जाता है और उसके अनुसार इलाज किया जाता है। बाघिन मैलानी और तेंदुए का इलाज किया जा रहा है।