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एसबीआई जंगल कौड़िया : केस में जुड़ सकते हैं दो से तीन तत्कालीन बैंक मैनेजरों के नाम
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छह मार्च को 78 पन्ने की सौंपी गई रिपोर्ट में 71 लाख रुपये की धोखाधड़ी आई थी सामने
अन्य जांच रिपोर्ट आने पर एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है कुल रकम
जंगल कौड़िया(गोरखपुर)। एसबीआई शाखा जंगल कौड़िया में 71 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी मामले में यहां पूर्व में तैनात रहे दो-तीन और मैनेजरों के खिलाफ भी केस दर्ज हो सकता है। जो रिपोर्ट अभी पुलिस को सौंपी गई है, इसमें केवल लोन से संबंधित मामले हैं। जबकि फिक्स डिपाजिट संबंधित मामले की जांच अभी चल रही है। चर्चा है कि लोन और फिक्स डिपाजिट मिलाकर धोखाधड़ी की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
छह मार्च को एसबीआई लखनऊ के सहायक महाप्रबंधक जांच एवं पूछताछ विभाग के सुरेश कुमार ने 78 पन्ने की रिपोर्ट पुलिस को सौंपी थी। रिपोर्ट में मुख्य रूप से पशु और केसीसी लोन का 71 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया था। पेंशनर्स और मृतकों के नाम भी लोन किए गए थे। धोखाधड़ी के इन मामलों के दौरान दो- तीन शाखा प्रबंधक बदले गए जबकि कैशियर एक ही रहा। चर्चा है कि इस मामले में पुलिस अन्य तत्कालीन शाखा प्रबंधकों के नाम भी केस में जोड़ सकती है।
यह है मामला
वर्ष 2024 में रसूलपुर चकिया निवासी राजू सिंह ने एसबीआई की इस शाखा में दो एफडी में रकम जमा की थी। बिना उनकी जानकारी के तीन लाख रुपये की एफडी तोड़ दी गई और रकम को दूसरे के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक भास्कर भूषण, कैशियर अमरेंद्र सिंह और कैंटीन ब्वाॅय पंकज मणि त्रिपाठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक भास्कर भूषण ने अरेस्ट स्टे लिया है। इसके चलते पुलिस ने उसको गिरफ्तार नहीं किया। जबकि बीते वर्ष अक्तूबर में कैशियर अमरेंद्र सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। कैंटीन ब्वाॅय पंकज मणि त्रिपाठी ने 16 जनवरी को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। तब से वह जेल में है।
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वर्जन
इस शाखा के 50 हजार से अधिक खाताधारकों को निष्पक्ष जांच पर विश्वास है। प्रतिदिन कई लोगों के नए खाते भी खोले जा रहे हैं, फिक्स डिपाजिट और अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं।
- दीपक कुमार, शाखा प्रबंधक, एसबीआई जंगल कौड़िया
केस में पर्याप्त धाराएं पहले से लगाई जा चुकी हैं। मामले में अन्य बैंक मैनेजर या कर्मचारी संलिप्त पाए गए तो केस में उनका नाम भी नाम बढ़ाया जाएगा।
- गौरव त्रिपाठी, क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज।
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अन्य जांच रिपोर्ट आने पर एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है कुल रकम
जंगल कौड़िया(गोरखपुर)। एसबीआई शाखा जंगल कौड़िया में 71 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी मामले में यहां पूर्व में तैनात रहे दो-तीन और मैनेजरों के खिलाफ भी केस दर्ज हो सकता है। जो रिपोर्ट अभी पुलिस को सौंपी गई है, इसमें केवल लोन से संबंधित मामले हैं। जबकि फिक्स डिपाजिट संबंधित मामले की जांच अभी चल रही है। चर्चा है कि लोन और फिक्स डिपाजिट मिलाकर धोखाधड़ी की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
छह मार्च को एसबीआई लखनऊ के सहायक महाप्रबंधक जांच एवं पूछताछ विभाग के सुरेश कुमार ने 78 पन्ने की रिपोर्ट पुलिस को सौंपी थी। रिपोर्ट में मुख्य रूप से पशु और केसीसी लोन का 71 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया था। पेंशनर्स और मृतकों के नाम भी लोन किए गए थे। धोखाधड़ी के इन मामलों के दौरान दो- तीन शाखा प्रबंधक बदले गए जबकि कैशियर एक ही रहा। चर्चा है कि इस मामले में पुलिस अन्य तत्कालीन शाखा प्रबंधकों के नाम भी केस में जोड़ सकती है।
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यह है मामला
वर्ष 2024 में रसूलपुर चकिया निवासी राजू सिंह ने एसबीआई की इस शाखा में दो एफडी में रकम जमा की थी। बिना उनकी जानकारी के तीन लाख रुपये की एफडी तोड़ दी गई और रकम को दूसरे के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक भास्कर भूषण, कैशियर अमरेंद्र सिंह और कैंटीन ब्वाॅय पंकज मणि त्रिपाठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक भास्कर भूषण ने अरेस्ट स्टे लिया है। इसके चलते पुलिस ने उसको गिरफ्तार नहीं किया। जबकि बीते वर्ष अक्तूबर में कैशियर अमरेंद्र सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। कैंटीन ब्वाॅय पंकज मणि त्रिपाठी ने 16 जनवरी को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। तब से वह जेल में है।
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इस शाखा के 50 हजार से अधिक खाताधारकों को निष्पक्ष जांच पर विश्वास है। प्रतिदिन कई लोगों के नए खाते भी खोले जा रहे हैं, फिक्स डिपाजिट और अन्य कार्य भी किए जा रहे हैं।
- दीपक कुमार, शाखा प्रबंधक, एसबीआई जंगल कौड़िया
केस में पर्याप्त धाराएं पहले से लगाई जा चुकी हैं। मामले में अन्य बैंक मैनेजर या कर्मचारी संलिप्त पाए गए तो केस में उनका नाम भी नाम बढ़ाया जाएगा।
- गौरव त्रिपाठी, क्षेत्राधिकारी कैंपियरगंज।