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Gorakhpur News: सनातन धर्म भारत की आत्मा, उपासना ही नहीं जीवन जीने की पद्धति भी
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सीएम योगी बोले- दुर्गति से बचने के लिए आचार और विचार में समन्वय जरूरी
गोरखनाथ मंदिर में श्रीरामकथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल हुए सीएम योगी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म भारत की आत्मा है। सनातन धर्म मात्र उपासना विधि नहीं बल्कि जीवन जीने की पद्धति है जिसमें कई उपासना विधियां समाहित हैं। सीएम ने कहा कि दुर्गति से बचने के लिए आचार और विचार में समन्वय जरूरी है।
सीएम योगी बृहस्पतिवार को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में श्रीरामकथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। एक मुस्लिम महिला अधिवक्ता के कथन, “हम भी सनातनी हैं, भारत का एक ही धर्म है सनातन धर्म, मेरी उपासना विधि इस्लाम है लेकिन धर्म सनातन है” का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि हमें धर्म, मत और मजहब के अंतर को समझना होगा।
सीएम ने कहा कि राम को भजते-भजते हनुमान जी भी पूज्य हो गए। अनपढ़ व्यक्ति भी हनुमान चालीसा जानता है, उसका पाठ करता है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शंकर और उनसे जुड़ीं कथाएं हमारी आस्था की प्रतीक हैं, हमारी विरासत हैं। सुसभ्य संस्कृति की उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण और उन्नयन में योगदान देना हर भारतीय का कर्तव्य होना चाहिए। राम, कृष्ण और शिव सनातन धर्म के प्रतीक हैं।
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हजारों वर्षों से सुनी जा रही श्रीराम कथा
सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम कथा हजारों वर्षों से सुनी जा रही है। यह भारत के संस्कार में शामिल है। दुनिया में ऐसा कोई भी सनातनी नहीं है जो श्रीराम कथा के प्रसंगों को न जानता हो। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे लोकप्रिय धारावाहिक रामायण है। जब देश की आबादी 100 करोड़ थी और 50 करोड़ लोगों के पास भी टेलीविजन नहीं था तब 66 करोड़ लोग रामायण धारावाहिक देखते थे। कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा था तब सबसे ज्यादा दर्शक दूरदर्शन पर रामायण देखते थे। मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा पर्व को गौरवशाली अवसर बताते हुए कहा कि यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है। भारत ही ऐसा देश है जिसने दुनिया को कृतज्ञता ज्ञापन सिखाया।
ज्ञान परंपरा को संहिताबद्ध किया वेदव्यास ने
मुख्यमंत्री ने कहा कि वेदव्यास की जन्मतिथि को गुरु पूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता है। वेद व्यास ने भारतीय मनीषा की ज्ञान परंपरा को संहिताबद्ध कर पीढ़ियों के लिए उपकार किया। भारतीयों पर यह आरोप लगता है कि उन्होंने धरोहरों को संरक्षित नहीं किया, उन्हें विज्ञान और आधुनिक ज्ञान की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है। सबको याद रखना चाहिए कि दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद है। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी तब भारत में वेदों की ऋचाएं रची जा रहीं थीं। हमारी मनीषा चेतना के विस्तार से ब्रह्मांड के रहस्यों का उद्घाटन कर रही थी। आज दुनिया भौतिक विज्ञान पर ही काम कर रही है, दुनिया जब अवचेतन मन की तरफ बढ़ेगी तब हमारे वैदिक सूत्र ही मार्गदर्शन करेंगे। दुनिया को यह जानना चाहिए कि 3500 वर्ष पूर्व हजारों ऋषियों की कार्यशाला नैमिषारण्य में भारतीय ज्ञान परंपरा की रचना को लेकर हुई थी।
ज्ञान परंपरा पर आरोप लगाने वालों का जवाव हैं वेदव्यास
सीएम योगी ने कहा कि जो लोग भारतीय ज्ञान परंपरा में विमर्श का स्थान न होने का आरोप लगाते हैं, उनके लिए महर्षि वेदव्यास जवाब हैं। उन्होंने महाभारत की रचना में पुरुषार्थ के सभी आयामों धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को समाहित कर दिया। दुनिया में कहीं और ज्ञानपरक शोध हुआ होता तो उसे पेटेंट करा लिया गया होता लेकिन हमने उसे सर्वसुलभ बनाया।
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पौधरोपण से दे सकते हैं विकास को बेहतर स्वरूप
मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक दिन में प्रदेश में 37 करोड़ से अधिक पौधरोपण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वृहद पौधरोपण से हम विकास को बेहतर स्वरूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि धरती माता के लिए नदियों की भूमिका मानव शरीर के लिए धमनियों जैसी है। नदी संस्कृति लुप्त होने से प्रदूषण और कई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषित जल का प्राकृतिक तरीके से शोधन कर सकते हैं। प्रदूषण के कारण एनसीआर में नवंबर से फरवरी माह तक बुजुर्गों के लिए हेल्थ इमरजेंसी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की कीमत पर विकास विचारणीय है। इसलिए जरूरी है कि अधिकाधिक पौधरोपण हो।
तीन साल में इंसेफेलाइटिस पर पाया नियंत्रण
मुख्यमंत्री ने इंसेफेलाइटिस की पूर्व की भयावहता और अब नियंत्रण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छह साल पूर्व यह समय इंसेफेलाइटिस के कारण भय और आशंका का होता था। 40 साल में गोरखपुर-बस्ती मंडल सहित कई जिलों के 50 हजार से अधिक बच्चों की मौत इस बीमारी के चलते हो गई थी। इस बीमारी का कारण मानव निर्मित गंदगी और अशुद्ध पेयजल था। 2017 में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद जैसे ही हर घर शौचालय की व्यवस्था की गई, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया तो इसका परिणाम रहा कि अगले तीन साल में ही बीमारी नियंत्रित और अब समाप्त हो गई।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, संजय निषाद, सांसद रविकिशन शुक्ल, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, समेत कई साधु-संत, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
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गोरखनाथ मंदिर में श्रीरामकथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव में शामिल हुए सीएम योगी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म भारत की आत्मा है। सनातन धर्म मात्र उपासना विधि नहीं बल्कि जीवन जीने की पद्धति है जिसमें कई उपासना विधियां समाहित हैं। सीएम ने कहा कि दुर्गति से बचने के लिए आचार और विचार में समन्वय जरूरी है।
सीएम योगी बृहस्पतिवार को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में श्रीरामकथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। एक मुस्लिम महिला अधिवक्ता के कथन, “हम भी सनातनी हैं, भारत का एक ही धर्म है सनातन धर्म, मेरी उपासना विधि इस्लाम है लेकिन धर्म सनातन है” का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि हमें धर्म, मत और मजहब के अंतर को समझना होगा।
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सीएम ने कहा कि राम को भजते-भजते हनुमान जी भी पूज्य हो गए। अनपढ़ व्यक्ति भी हनुमान चालीसा जानता है, उसका पाठ करता है। श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शंकर और उनसे जुड़ीं कथाएं हमारी आस्था की प्रतीक हैं, हमारी विरासत हैं। सुसभ्य संस्कृति की उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण और उन्नयन में योगदान देना हर भारतीय का कर्तव्य होना चाहिए। राम, कृष्ण और शिव सनातन धर्म के प्रतीक हैं।
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हजारों वर्षों से सुनी जा रही श्रीराम कथा
सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम कथा हजारों वर्षों से सुनी जा रही है। यह भारत के संस्कार में शामिल है। दुनिया में ऐसा कोई भी सनातनी नहीं है जो श्रीराम कथा के प्रसंगों को न जानता हो। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे लोकप्रिय धारावाहिक रामायण है। जब देश की आबादी 100 करोड़ थी और 50 करोड़ लोगों के पास भी टेलीविजन नहीं था तब 66 करोड़ लोग रामायण धारावाहिक देखते थे। कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा था तब सबसे ज्यादा दर्शक दूरदर्शन पर रामायण देखते थे। मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा पर्व को गौरवशाली अवसर बताते हुए कहा कि यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है। भारत ही ऐसा देश है जिसने दुनिया को कृतज्ञता ज्ञापन सिखाया।
ज्ञान परंपरा को संहिताबद्ध किया वेदव्यास ने
मुख्यमंत्री ने कहा कि वेदव्यास की जन्मतिथि को गुरु पूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता है। वेद व्यास ने भारतीय मनीषा की ज्ञान परंपरा को संहिताबद्ध कर पीढ़ियों के लिए उपकार किया। भारतीयों पर यह आरोप लगता है कि उन्होंने धरोहरों को संरक्षित नहीं किया, उन्हें विज्ञान और आधुनिक ज्ञान की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है। सबको याद रखना चाहिए कि दुनिया का सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद है। दुनिया जब अंधकार में जी रही थी तब भारत में वेदों की ऋचाएं रची जा रहीं थीं। हमारी मनीषा चेतना के विस्तार से ब्रह्मांड के रहस्यों का उद्घाटन कर रही थी। आज दुनिया भौतिक विज्ञान पर ही काम कर रही है, दुनिया जब अवचेतन मन की तरफ बढ़ेगी तब हमारे वैदिक सूत्र ही मार्गदर्शन करेंगे। दुनिया को यह जानना चाहिए कि 3500 वर्ष पूर्व हजारों ऋषियों की कार्यशाला नैमिषारण्य में भारतीय ज्ञान परंपरा की रचना को लेकर हुई थी।
ज्ञान परंपरा पर आरोप लगाने वालों का जवाव हैं वेदव्यास
सीएम योगी ने कहा कि जो लोग भारतीय ज्ञान परंपरा में विमर्श का स्थान न होने का आरोप लगाते हैं, उनके लिए महर्षि वेदव्यास जवाब हैं। उन्होंने महाभारत की रचना में पुरुषार्थ के सभी आयामों धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को समाहित कर दिया। दुनिया में कहीं और ज्ञानपरक शोध हुआ होता तो उसे पेटेंट करा लिया गया होता लेकिन हमने उसे सर्वसुलभ बनाया।
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पौधरोपण से दे सकते हैं विकास को बेहतर स्वरूप
मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक दिन में प्रदेश में 37 करोड़ से अधिक पौधरोपण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वृहद पौधरोपण से हम विकास को बेहतर स्वरूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि धरती माता के लिए नदियों की भूमिका मानव शरीर के लिए धमनियों जैसी है। नदी संस्कृति लुप्त होने से प्रदूषण और कई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषित जल का प्राकृतिक तरीके से शोधन कर सकते हैं। प्रदूषण के कारण एनसीआर में नवंबर से फरवरी माह तक बुजुर्गों के लिए हेल्थ इमरजेंसी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की कीमत पर विकास विचारणीय है। इसलिए जरूरी है कि अधिकाधिक पौधरोपण हो।
तीन साल में इंसेफेलाइटिस पर पाया नियंत्रण
मुख्यमंत्री ने इंसेफेलाइटिस की पूर्व की भयावहता और अब नियंत्रण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छह साल पूर्व यह समय इंसेफेलाइटिस के कारण भय और आशंका का होता था। 40 साल में गोरखपुर-बस्ती मंडल सहित कई जिलों के 50 हजार से अधिक बच्चों की मौत इस बीमारी के चलते हो गई थी। इस बीमारी का कारण मानव निर्मित गंदगी और अशुद्ध पेयजल था। 2017 में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद जैसे ही हर घर शौचालय की व्यवस्था की गई, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया तो इसका परिणाम रहा कि अगले तीन साल में ही बीमारी नियंत्रित और अब समाप्त हो गई।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, संजय निषाद, सांसद रविकिशन शुक्ल, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, समेत कई साधु-संत, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।