{"_id":"683763a69bb0dfe30105eb10","slug":"gorakhpur-news-rpf-intelligence-team-also-started-investigation-questioned-some-railway-employees-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-952232-2025-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम ने भी शुरू की जांच, कुछ रेलकर्मियों से पूछताछ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम ने भी शुरू की जांच, कुछ रेलकर्मियों से पूछताछ
विज्ञापन
अधिकारी के फर्जी लेटर हेड पर एचओ कोटा से टिकट कंफर्म कराने का मामला
जांच शुरू होने से मचा हड़कंप, विजिलेंस टीम को दलाल से मिले अहम सुराग
गोरखपुर। अफसरों के फर्जी लेटर हेड पर एचओ (हेड आफिस) कोटे के तहत ट्रेनों में सीट कंफर्म कराने का मामला सामने आने के बाद अब विजिलेंस के बाद आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम भी जांच में जुट गई है। टीम ने बुधवार को कुछ रेलकर्मियों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई। उधर, विजिलेंस को पकड़े गए दलाल से कुछ अहम जानकारी मिली है, जिसके जरिए पूरे नेटवर्क को पकड़ने की कोशिश शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागीय लोगों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है।
रेलवे के वाणिज्य विभाग से टिकट कंफर्मेशन के लिए एचओ (हेड आफिस) कोटा जारी होता है। इस समय भीड़ ज्यादा होने के चलते लोगों को कंफर्म सीट नहीं मिल पा रही। कुछ दलाल एचओ कोटे से टिकट कंफर्म कराने में लगे हुए हैं। इसके लिए वे रेलवे अधिकारियों का फर्जी लेटर हेड हस्ताक्षर व मुहर के साथ हेड ऑफिस में भेज देते हैं। अधिकारी के लेटर हेड पर आवेदन होने के चलते कोटा अलॉट करने वाले अधिकारी को भी शक नहीं होता है। लेकिन, पिछले दिनों गोरखपुर-यशवंतपुर ट्रेन में एक अधिकारी के फर्जी लेटर हेड पर भेजे गए आवेदन को संदेह होने पर पकड़ लिया गया है। क्रॉस चेक करने पर पता चला कि अधिकारी ने भेजा ही नहीं था।
-
कैसे मिला लेटर हेड का फाॅर्मेट
इस मामले को रेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। अब आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम भी जांच करने लगी है। जिस विभाग से अधिकारी का फर्जी लेटर हेड आया था, अब वहां के कर्मचारियों पर भी शक गहरा गया है। हर विभाग के अधिकारी के लेटर हेड पर आवेदन का फाॅर्मेट और मुहर अलग होता है। अब सवाल यह भी है कि जालसाज को फाॅर्मेट और मुहर की डिजाइन कहां से मिली? इन बिंदुओं पर भी जांच चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जांच शुरू होने से मचा हड़कंप, विजिलेंस टीम को दलाल से मिले अहम सुराग
गोरखपुर। अफसरों के फर्जी लेटर हेड पर एचओ (हेड आफिस) कोटे के तहत ट्रेनों में सीट कंफर्म कराने का मामला सामने आने के बाद अब विजिलेंस के बाद आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम भी जांच में जुट गई है। टीम ने बुधवार को कुछ रेलकर्मियों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई। उधर, विजिलेंस को पकड़े गए दलाल से कुछ अहम जानकारी मिली है, जिसके जरिए पूरे नेटवर्क को पकड़ने की कोशिश शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागीय लोगों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है।
रेलवे के वाणिज्य विभाग से टिकट कंफर्मेशन के लिए एचओ (हेड आफिस) कोटा जारी होता है। इस समय भीड़ ज्यादा होने के चलते लोगों को कंफर्म सीट नहीं मिल पा रही। कुछ दलाल एचओ कोटे से टिकट कंफर्म कराने में लगे हुए हैं। इसके लिए वे रेलवे अधिकारियों का फर्जी लेटर हेड हस्ताक्षर व मुहर के साथ हेड ऑफिस में भेज देते हैं। अधिकारी के लेटर हेड पर आवेदन होने के चलते कोटा अलॉट करने वाले अधिकारी को भी शक नहीं होता है। लेकिन, पिछले दिनों गोरखपुर-यशवंतपुर ट्रेन में एक अधिकारी के फर्जी लेटर हेड पर भेजे गए आवेदन को संदेह होने पर पकड़ लिया गया है। क्रॉस चेक करने पर पता चला कि अधिकारी ने भेजा ही नहीं था।
विज्ञापन
-
कैसे मिला लेटर हेड का फाॅर्मेट
इस मामले को रेल प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। अब आरपीएफ इंटेलिजेंस की टीम भी जांच करने लगी है। जिस विभाग से अधिकारी का फर्जी लेटर हेड आया था, अब वहां के कर्मचारियों पर भी शक गहरा गया है। हर विभाग के अधिकारी के लेटर हेड पर आवेदन का फाॅर्मेट और मुहर अलग होता है। अब सवाल यह भी है कि जालसाज को फाॅर्मेट और मुहर की डिजाइन कहां से मिली? इन बिंदुओं पर भी जांच चल रही है।
विज्ञापन