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Gorakhpur News: सेवानिवृत्त शिक्षक आउट ऑफ स्कूल बनाएंगे बच्चों का भविष्य
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ड्रापआउट बच्चों को खोजकर पढ़ाएंगे सेवानिवृत शिक्षक
गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों से सहयोग लेगा। सेवानिवृत शिक्षकों को ड्रापआउट बच्चों को खोजकर उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई छोड़कर रोजगार लगे या विशेष परिस्थितियों के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे छात्रों को शिक्षा से जोड़ना है।
प्राथमिक विद्यालयों में शारदा कार्यक्रम के तहत छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षित करने के लिए सेवानिवृत शिक्षकों को मानदेय पर रखा जाएगा। बता दें अभी ड्रापआउट बच्चों का चिह्नांकन किया जा रहा है। जिन स्कूलों में पांच से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, वहां सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रतिमाह निश्चित मानदेय पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा। यह शिक्षक नौ महीनों तक ड्रापआउट बच्चों को विशेष शिक्षा देकर उनकी उम्र के अनुसार दक्षता स्तर प्राप्त करने में सहयोग करेंगे जिससे वह नियमित कक्षाओं में शामिल हो सकें। स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चयन प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। चयन ब्लॉक स्तर पर गठित समिति के माध्यम से होगा। सेवानिवृत्त शिक्षक नहीं मिलने पर स्नातक एवं डीएलएड/बीटीसी/बीएड उत्तीर्ण योग्य वॉलंटियर का चयन विद्यालय प्रबंध समिति की चार सदस्यीय उप समिति करेगी। बीएसए रमेंद्र कुमार ने बताया कि यह पहल बच्चों को शिक्षा से दोबारा जोड़ने में मददगार साबित होगी।
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गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों से सहयोग लेगा। सेवानिवृत शिक्षकों को ड्रापआउट बच्चों को खोजकर उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई छोड़कर रोजगार लगे या विशेष परिस्थितियों के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे छात्रों को शिक्षा से जोड़ना है।
प्राथमिक विद्यालयों में शारदा कार्यक्रम के तहत छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षित करने के लिए सेवानिवृत शिक्षकों को मानदेय पर रखा जाएगा। बता दें अभी ड्रापआउट बच्चों का चिह्नांकन किया जा रहा है। जिन स्कूलों में पांच से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, वहां सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रतिमाह निश्चित मानदेय पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा। यह शिक्षक नौ महीनों तक ड्रापआउट बच्चों को विशेष शिक्षा देकर उनकी उम्र के अनुसार दक्षता स्तर प्राप्त करने में सहयोग करेंगे जिससे वह नियमित कक्षाओं में शामिल हो सकें। स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चयन प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। चयन ब्लॉक स्तर पर गठित समिति के माध्यम से होगा। सेवानिवृत्त शिक्षक नहीं मिलने पर स्नातक एवं डीएलएड/बीटीसी/बीएड उत्तीर्ण योग्य वॉलंटियर का चयन विद्यालय प्रबंध समिति की चार सदस्यीय उप समिति करेगी। बीएसए रमेंद्र कुमार ने बताया कि यह पहल बच्चों को शिक्षा से दोबारा जोड़ने में मददगार साबित होगी।
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