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Gorakhpur News: मुगलकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है 1680 में बना रीड साहब धर्मशाला

Thu, 20 Feb 2025 01:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Feb 2025 01:06 AM IST
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Gorakhpur News: Reed Saheb Dharamshala built in 1680 is an excellent example of Mughal architecture.
गोरखपुर के चकलेदार काजी खलीलुर्रहमान ने सिपहसालारों के रहने के लिए कराया था निर्माण
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गोरखपुर। बेतियाहाता चौक के पास स्थित रीड साहब धर्मशाला मुगलकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसका निर्माण गोरखपुर के चकलेदार काजी खलीलुर्रहमान ने सिपहसालारों के रहने के लिए वर्ष 1680 में दुर्ग के रूप में कराया था। हालांकि, इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। शिल्प के नाम पर कुछ दीवारें और चौखटों से उखड़ते कुछ दरवाजे ही बचे हैं।
वर्ष 1839 में गोरखपुर के तत्कालीन कलक्टर ईए रीड साहब ने 5880 रुपये में तत्कालीन रइसों और व्यापारियों से चंदा वसूल कर दुर्ग को धर्मशाला का रूप दे दिया। नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1836 में तत्कालीन डीएम मिस्टर रीड ने पट्टा विलेख (लीज डीड) के माध्यम से दिलदार खान से भूमि लेकर ट्रस्ट बना धर्मशाला का निर्माण कराया। उस ट्रस्ट का सरकार ने 17 अगस्त 1844 को अपने पत्र संख्या 3633 द्वारा मान्यता दी। ट्रस्ट की व्यवस्था का संचालन करने के लिए स्थानीय निकाय को सुपुर्द कर दिया।
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1456 में हुआ बसंतपुर किले का निर्माण सतासीराज के राजा बसंत सिंह ने वर्ष 1456 ईस्वीं में कराया। 1688 में औरंगजेब ने काजी खलीलुर्रहमान, गोरखपुर को चकलेदार नियुक्त किया। उसने सतासी के राजा को बेदखल कर दिया। बसंतपुर किले में मुगल चौकी बनाकर पल्टन रहने लगी। किले का कुछ हिस्से को खलीलुर्रहमान ने कैदियों के लिए बना दिया। 1801 ईस्वीं में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस कारागार का नाम मोती महल रखा। पांच फरवरी 2003 को इसे नगर निगम के नाम रैन बसेरा के नाम से फ्री होल्ड किया गया।
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रीड साहब धर्मशाला में रहते हैं 61 परिवार
रीड साहब धर्मशाला में इस समय 61 परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले संदीप शाही ने बताया कि उनका परिवार यहां 80 वर्षों से रह रहा है। नगर निगम की ओर से यहां सीवर, पेयजल, सीसी सड़क, बिजली, पार्क, ट्यूबवेल की सुविधा दी जा रही है। संजय चौधरी ने कहा कि पांच फरवरी की नोटिस 14 फरवरी को चस्पा किया गया। वर्ष 2017 से किराया लेना बंद कर दिया गया है। अब बिना पुर्नवास किए हमें हटाए जाने की योजना बनाई जा रही है।

नगर निगम ने बसंतपुर सराय और रीड साहब धर्मशाला को खाली कराने के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में बंसतपुर सराय और रीड साहब धर्मशाला के रहवासियों से बीते कई वर्षों से किराया भी नहीं वसूल रही है। बसंतपुर सराय में 67 कोठरी हैं, जिनमें 10 खाली और 57 में परिवार रह रहे हैं। वहीं शिव गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से निगम ने किराया लेना बंद कर दिया, तभी से ध्वस्तीकरण के लिए धमकाते रहे हैं। बसंतपुर वार्ड से पार्षद विजेंद्र अग्रहरि ने कहा कि बसंत सराय को संरक्षित स्मारक घोषित करने से पहले सरकार को यहां रह रहे परिवारों के पुर्नवास का इंतजाम भी करना चाहिए।
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