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Gorakhpur News: बरसात में भी सूखी है राप्ती-रोहिन, दोनों नदियों में अभी कमर भर भी पानी नहीं

Mon, 04 Aug 2025 12:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:27 AM IST
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Gorakhpur News: Rapti-Rohin is dry even in rain, there is no water even up to waist in both the rivers
पहले जुलाई में ही लबालब भर जाती थीं दोनों नदियां, नेपाल में कम बारिश से नदियों के बहाव पर दिख रहा असर
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गोरखपुर। हर साल बरसात में गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और गोरखपुर जिले में बाढ़ का कारण बनने वाली राप्ती नदी इस बार पानी के संकट से जूझ रही है। अगस्त का पहला सप्ताह शुरू हो गया है लेकिन नदी का जलस्तर एक बार भी राजघाट पुल के पास बनी सीढि़यों तक पहुंच सका है। यही हाल इसकी सहायक रोहिन नदी का भी है। स्थानीय बारिश से भी उफना जाने वाली इस नदी में भी पानी कम है।
हिमालय के निचले हिस्से से निकलकर नेपाल के मैदानी इलाकों से होते हुए राप्ती नदी बहराइच जिले में यूपी में आती है। गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर होते हुए बड़हलगंज के पटना घाट के पास सरयू नदी में मिल जाती है। करीब 600 किलोमीटर लंबी इस नदी में हर साल जून के अंतिम या जुलाई के पहले सप्ताह में नेपाल के पहाड़ी हिस्सों में होने वाली बारिश से जलस्तर तेजी से बढ़ता है। संतकबीरनगर जिले के करमैनीघाट के पास इस नदी में बूढ़ी राप्ती समेत तीन छोटी-छोटी नदियां मिल जाती हैं। इसके बाद गोरखपुर शहर से पहले डोमिनगढ़ के पास इस नदी में रोहिन भी मिल जाती है। रोहिन नदी हिमालय से ही निकलती है और महराजगंज जिले से होकर गोरखपुर में आती है। डाेमिनगढ़ में इनके मिलने के बाद राप्ती का जलस्तर और बढ़ जाता है।
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इस नदी के व्यवहार को जानने वालों का कहना है कि ऐसा शायद ही कभी हुआ होगा, जब राप्ती में सावन के महीने में इतना कम पानी रहा हो। सिंचाई विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार, नदी अभी खतरे के निशान से करीब पांच मीटर नीचे है। राजघाट पुल के पास बनी सीढि़यों से देखने पर नदी सूखी दिख रही है। दो दिन पहले डीडीयू के छात्रनेता इस नदी में आंदोलन करने पहुंचे तो वे इसकी मुख्य धारा में आधी दूरी तक चले गए, तब जाकर पानी कमर तक पहुंचा। जबकि जुलाई में नदी का पानी राजघाट की सीढि़यों तक चढ़ जाता है और अंदर जाना तो दूर, किनारे खड़े होना मुश्किल रहता है। रोहिन नदी भी अभी खतरे के निशान से पौने पांच मीटर नीचे बह रही है। रोहिन नदी की खासियत है कि वह एक तेज बारिश में लाल निशान पार कर जाती है। लेकिन आज वह खतरे के निशान से बहुत नीचे बह रही है। यही हाल गोर्रा नदी का है। इसका असर गोरखपुर के अलावा बगल के जिले देवरिया में भी पड़ता है। वह भी खतरे के निशान से चार मीटर नीचे बह रही है।
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वर्जन
गोरखपुर-बस्ती मंडल की हर नदी का अलग-अलग उद्गम स्रोत है। जिस नदी के उद्गम स्थल के आसपास अधिक बारिश होती है, उसमें पानी का स्तर भी उसी अनुपात में बढ़ता है। इस बार अभी राप्ती व उसकी सहायक नदियों के इलाके में कम बारिश होने की वजह से इसमें पानी का अभाव दिख रहा है।
- विकास कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग
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