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Gorakhpur News: प्रदर्शन के बाद दो घंटे बेसुध पड़ा रहा प्रभात..चाचा लेकर भागे मगर बचा नहीं
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पिपरौली (गोरखपुर)। बेटे प्रभात की मौत के गम में डूबे पिता दीपक पांडेय यह कहते हुए फफक कर रो पड़े कि इस समय बेटा कांग्रेस में सक्रिय नहीं था। उसको किसने लखनऊ बुलाया, वह दो घंटे बेसुध क्यों पड़ा रहा, किसी साथी ने उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया? अब राजनीति नहीं चाहिए, बल्कि इन सभी सवालों पर जांच होनी चाहिए।
पिता बोले-मेरे कर्मों का दोष होगा कि इकलौता बेटा दुनिया से चला गया। प्रभात की मौत से मेरा सब कुछ खत्म हो गया है। लखनऊ निवासी चाचा मनीष पांडेय ने बताया कि उन्हें कांग्रेस कार्यालय से फोन आया कि प्रदर्शन के दौरान घायल उनका भतीजा दो घंटे से बेसुध पड़ा है। तब आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने अपना बच्चा खो दिया है, जो अब कभी वापस नहीं आएगा। इस पर किसी भी तरह की राजनीति की जरूरत नहीं है। उन्हें न्याय चाहिए। उन्होंने बताया कि अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य लोगों का फोन भी आया था।
प्रभात की मां माधुरी पांडेय रोते-रोते अचेत हो जा रही हैं। प्रभात की मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है। इन सब के बीच नेताओं का आना-जाना लगा है। गांव में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस फोर्स भी लगाई गई है।
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परिवार ने प्रदेश अध्यक्ष से कहा-वापस चले जाओ..हंगामे पर पहुंची पुलिस
प्रभात के दाह संस्कार के समय मुक्तिधाम घाट पर कई गांवों के 200 से अधिक लोग जुटे थे। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के आने के बाद दो पक्षों के बीच कहासुनी होने लगी। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति हो गई। ऐसे में गीडा, सहजनवां, हरपुर, खजनी समेत कई थानों की फोर्स बुला ली गई। भारी विरोध देखते हुए परिवारवालों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय से आग्रह किया कि वे वापस चले जाएं। तब वे श्रद्धांजलि देकर लौट गए। घाट पर मौजूद ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का विरोध करते हुए कहा कि समय से इलाज हुआ होता तो प्रभात की जान बच सकती थी। वहां भर्ती कराने के बजाय यहां श्रद्धांजलि देने आए हैं।
परिवार में छोटी बहन की शादी की चल रही थी तैयारी
प्रभात की एक बहन प्रज्ञा पांडेय की दो साल पहले लखनऊ में शादी हो चुकी है। दूसरी बहन श्रेया की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार में अब श्रेया की शादी की तैयारी चल रही थी। फिलहाल, प्रभात लखनऊ में रूम लेकर रहते थे। जबकि, यहां घर पर उनके माता-पिता और छोटी बहन के अलावा दादा रहते हैं।
मां-बहन को नहीं हुआ यकीन
ग्रामीणों का कहना है कि मौत की सूचना मिलते ही प्रभात के पिता दीपक पांडेय (एलआईसी में कार्यरत) बेसुध हो गए। मां, बहन और अन्य परिजन गहरे शोक में डूब गए। प्रभात के बाबा उमाशंकर पांडेय पोस्ट ऑफिस से रिटायर्ड हैं। वह नाती को याद कर बिलख रहे हैं।
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पिता बोले-मेरे कर्मों का दोष होगा कि इकलौता बेटा दुनिया से चला गया। प्रभात की मौत से मेरा सब कुछ खत्म हो गया है। लखनऊ निवासी चाचा मनीष पांडेय ने बताया कि उन्हें कांग्रेस कार्यालय से फोन आया कि प्रदर्शन के दौरान घायल उनका भतीजा दो घंटे से बेसुध पड़ा है। तब आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने अपना बच्चा खो दिया है, जो अब कभी वापस नहीं आएगा। इस पर किसी भी तरह की राजनीति की जरूरत नहीं है। उन्हें न्याय चाहिए। उन्होंने बताया कि अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य लोगों का फोन भी आया था।
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प्रभात की मां माधुरी पांडेय रोते-रोते अचेत हो जा रही हैं। प्रभात की मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है। इन सब के बीच नेताओं का आना-जाना लगा है। गांव में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस फोर्स भी लगाई गई है।
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परिवार ने प्रदेश अध्यक्ष से कहा-वापस चले जाओ..हंगामे पर पहुंची पुलिस
प्रभात के दाह संस्कार के समय मुक्तिधाम घाट पर कई गांवों के 200 से अधिक लोग जुटे थे। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के आने के बाद दो पक्षों के बीच कहासुनी होने लगी। इस दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति हो गई। ऐसे में गीडा, सहजनवां, हरपुर, खजनी समेत कई थानों की फोर्स बुला ली गई। भारी विरोध देखते हुए परिवारवालों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय से आग्रह किया कि वे वापस चले जाएं। तब वे श्रद्धांजलि देकर लौट गए। घाट पर मौजूद ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का विरोध करते हुए कहा कि समय से इलाज हुआ होता तो प्रभात की जान बच सकती थी। वहां भर्ती कराने के बजाय यहां श्रद्धांजलि देने आए हैं।
परिवार में छोटी बहन की शादी की चल रही थी तैयारी
प्रभात की एक बहन प्रज्ञा पांडेय की दो साल पहले लखनऊ में शादी हो चुकी है। दूसरी बहन श्रेया की अभी शादी नहीं हुई है। परिवार में अब श्रेया की शादी की तैयारी चल रही थी। फिलहाल, प्रभात लखनऊ में रूम लेकर रहते थे। जबकि, यहां घर पर उनके माता-पिता और छोटी बहन के अलावा दादा रहते हैं।
मां-बहन को नहीं हुआ यकीन
ग्रामीणों का कहना है कि मौत की सूचना मिलते ही प्रभात के पिता दीपक पांडेय (एलआईसी में कार्यरत) बेसुध हो गए। मां, बहन और अन्य परिजन गहरे शोक में डूब गए। प्रभात के बाबा उमाशंकर पांडेय पोस्ट ऑफिस से रिटायर्ड हैं। वह नाती को याद कर बिलख रहे हैं।