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Gorakhpur News: मरीज माफिया फिर सक्रिय, रात में नाम बदल कर काम को अंजाम दे रहा गैंगस्टर
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक बार सक्रिय होने लगे मरीज माफिया
मरीज की खरीद फरोख्त में पहले पकड़े जा चुके दो आरोपियों पर गुलरिहा पुलिस ने लगाया था गैंगस्टर एक्ट
दोनों गैंगस्टर एक्ट के आरोपियों ने फिर से शुरू किया अवैध धंधा, रात में दौड़ाने लगे मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर मरीज माफिया सक्रिय होने लगे हैं। पूर्व में पुलिस ने मरीज की खरीद फरोख्त करने के दो आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। अब दोनों आरोपी जेल से बाहर आ गए हैं। एक ने अपनी तीन एंबुलेंस चालकों के नाम पर ट्रांसफर कर दी है। जबकि दूसरे आरोपी ने दो एंबुलेंस अपने भाई के नाम पर कर दी है। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक, दोनों गैंगस्टर के आरोपियों ने एक बार फिर धंधा शुरू किया है। पहले 24 घंटे वह मेडिकल कॉलेज में ही जमे रहते थे। अब वे रात के अंधेरे में मरीजों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। दोनों काफी समय से इस धंधे में लगे हैं। इसलिए मेडिकल कॉलेज के आस-पास, बेतियाहाता, रामगढ़ताल, रुस्तमपुर के साथ ही लखनऊ के निजी हॉस्पिटलों में इनकी अच्छी जान पहचान है। वहां हर मरीज के बदले इन्हें मोटी रकम मिलती है। वहीं मेडिकल कॉलेज के अंदर पहले से ही कर्मचारियों से उनका अच्छा संबंध रहा है। मरीज के बदले कर्मचारियों को भी फायदा दिया जाता है। दोनों आरोपियों के सक्रिय होने की चर्चा पूरे मेडिकल कॉलेज में शुरू हो गई है। इसके बाद पुलिस भी एक बार फिर सक्रिय हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों गैंगस्टर के आरोपियों पर पहले से काफी केस दर्ज हैं, इसलिए वे खुद मेडिकल कॉलेज के बाहर बैठकर यह धंधा चला रहे हैं। मरीज मिलते ही एंबुलेंस चालक इनके पास कॉल करते हैं, इसके बाद शहर के निजी हॉस्पिटलों में कॉल कर सौदा तय किया जाता है। सौदा तय होने मरीज माफिया एंबुलेंस चालक को उस हॉस्पिटल मरीज भेजते हैं। मरीज भर्ती करके एंबुलेंस चालक को वहीं पर पेमेंट कर दिया जाता है। जितनी गंभीर बीमारी होती है, उतनी ही मोटी रकम धंधेबाजों को मिलती है।
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पुलिस पर हमला के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
पिछले वर्ष उच्चाधिकारियों के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने प्राइवेट एंबुलेंस चालकों पर शिकंजा कसना शुरू किया था। नौ जुलाई 2024 की रात एंबुलेंस माफिया मेडिकल काॅलेज के उत्तरी गेट पर पुलिस हमला कर भाग गए थे। इसके बाद ताबड़तोड़ प्राइवेट एंबुलेंस चालकों, संचालकों पर कार्रवाई शुरू हुई थी। इसके बाद कई मरीजों की खरीद फरोख्त करने वाले धंधेबाजों पर गैंगस्टर की कार्रवाई कर जेल भिजवाया गया था। इसके बाद मरीज माफिया की सक्रियता कम हो गई थी। एक बार फिर वे सक्रिय होने लगे हैं, इस बात की भनक पुलिस को भी लग गई है। पुलिस रात के समय भी गस्त बढ़ा दी है।
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कोट-
पुलिस टीम मेडिकल कॉलेज परिसर और बाहर दोनों ही जगहों पर निगरानी कर रही है। मरीजों के खरीद-फरोख्त की बात सामने आई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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मरीज की खरीद फरोख्त में पहले पकड़े जा चुके दो आरोपियों पर गुलरिहा पुलिस ने लगाया था गैंगस्टर एक्ट
दोनों गैंगस्टर एक्ट के आरोपियों ने फिर से शुरू किया अवैध धंधा, रात में दौड़ाने लगे मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर मरीज माफिया सक्रिय होने लगे हैं। पूर्व में पुलिस ने मरीज की खरीद फरोख्त करने के दो आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी। अब दोनों आरोपी जेल से बाहर आ गए हैं। एक ने अपनी तीन एंबुलेंस चालकों के नाम पर ट्रांसफर कर दी है। जबकि दूसरे आरोपी ने दो एंबुलेंस अपने भाई के नाम पर कर दी है। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे में इस धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के मुताबिक, दोनों गैंगस्टर के आरोपियों ने एक बार फिर धंधा शुरू किया है। पहले 24 घंटे वह मेडिकल कॉलेज में ही जमे रहते थे। अब वे रात के अंधेरे में मरीजों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। दोनों काफी समय से इस धंधे में लगे हैं। इसलिए मेडिकल कॉलेज के आस-पास, बेतियाहाता, रामगढ़ताल, रुस्तमपुर के साथ ही लखनऊ के निजी हॉस्पिटलों में इनकी अच्छी जान पहचान है। वहां हर मरीज के बदले इन्हें मोटी रकम मिलती है। वहीं मेडिकल कॉलेज के अंदर पहले से ही कर्मचारियों से उनका अच्छा संबंध रहा है। मरीज के बदले कर्मचारियों को भी फायदा दिया जाता है। दोनों आरोपियों के सक्रिय होने की चर्चा पूरे मेडिकल कॉलेज में शुरू हो गई है। इसके बाद पुलिस भी एक बार फिर सक्रिय हुई है।
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सूत्रों के मुताबिक, दोनों गैंगस्टर के आरोपियों पर पहले से काफी केस दर्ज हैं, इसलिए वे खुद मेडिकल कॉलेज के बाहर बैठकर यह धंधा चला रहे हैं। मरीज मिलते ही एंबुलेंस चालक इनके पास कॉल करते हैं, इसके बाद शहर के निजी हॉस्पिटलों में कॉल कर सौदा तय किया जाता है। सौदा तय होने मरीज माफिया एंबुलेंस चालक को उस हॉस्पिटल मरीज भेजते हैं। मरीज भर्ती करके एंबुलेंस चालक को वहीं पर पेमेंट कर दिया जाता है। जितनी गंभीर बीमारी होती है, उतनी ही मोटी रकम धंधेबाजों को मिलती है।
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पुलिस पर हमला के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
पिछले वर्ष उच्चाधिकारियों के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने प्राइवेट एंबुलेंस चालकों पर शिकंजा कसना शुरू किया था। नौ जुलाई 2024 की रात एंबुलेंस माफिया मेडिकल काॅलेज के उत्तरी गेट पर पुलिस हमला कर भाग गए थे। इसके बाद ताबड़तोड़ प्राइवेट एंबुलेंस चालकों, संचालकों पर कार्रवाई शुरू हुई थी। इसके बाद कई मरीजों की खरीद फरोख्त करने वाले धंधेबाजों पर गैंगस्टर की कार्रवाई कर जेल भिजवाया गया था। इसके बाद मरीज माफिया की सक्रियता कम हो गई थी। एक बार फिर वे सक्रिय होने लगे हैं, इस बात की भनक पुलिस को भी लग गई है। पुलिस रात के समय भी गस्त बढ़ा दी है।
कोट-
पुलिस टीम मेडिकल कॉलेज परिसर और बाहर दोनों ही जगहों पर निगरानी कर रही है। मरीजों के खरीद-फरोख्त की बात सामने आई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी