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Gorakhpur News: फिर सक्रिय हुए मरीज माफिया, एम्स से मरीजों को पहुंचा रहे निजी अस्पताल

Mon, 23 Dec 2024 01:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Dec 2024 01:07 AM IST
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Gorakhpur news: Patient mafia became active again, private hospitals are sending patients from AIIMS
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के बाद अब फिर से एम्स में भी मरीज माफिया ने अपना नेटवर्क फैला दिया है। इमरजेंसी वार्ड के आसपास किसी मरीज का तीमारदार बनकर घूमते दलाल गंभीर मरीजों के परिजनों को मददगार बनकर झांसे में लेते हैं और तुरंत ही बाहर से एंबुलेंस मंगाकर निजी अस्पताल भेज देते हैं। तीन-चार दिन में सारा पैसा गंवाने के बाद मरीज को गंभीर हालत में ही छोड़ देते हैं। इसके बाद परिजन फिर एम्स या मेडिकल कॉलेज में मरीज भर्ती कराने के लिए गिड़गिड़ाते हैं।
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गोपालगंज जिले के भोरे निवासी राजेंद्र चौधरी अपने घायल भतीजे को इलाज के लिए लेकर बीते सोमवार को एम्स आए थे। इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने हालत अत्यंत गंभीर बताई। परेशान राजेंद्र वार्ड के बाहर खड़े अपने रिश्तेदारों से फोन पर बात कर रहे थे, इसी दौरान एक युवक आया और मरीज की हालत को लेकर चर्चा करने लगा। मरीज के सिर व पैर में चोट की बात सुनते ही बोला कि यहां न्यूरो के एक ही डॉक्टर हैं, वह ऑपरेशन करने नहीं आएंगे। बेतियाहाता के एक अस्पताल का पता बताते हुए वहां तुरंत आयुष्मान कार्ड पर ऑपरेशन का सुझाव दिया। राजेंद्र उसकी बातों में आ गए और सरकारी एंबुलेंस बुलाने की बात कहने लगे। इस पर युवक ने कहा कि सरकारी एंबुलेंस यहां नहीं आएगी। अभी एंबुलेंस बुला देते हैं, सिर्फ 500 रुपये में पहुंचा देगी। इसके बाद युवक ने कॉल कर एंबुलेंस बुलाई को मरीज को उससे भिजवा दिया। पांच दिन में अपनी सारी जमा पूंजी गंवाने के बाद वे फिर मरीज लेकर वापस एम्स में भर्ती कराना चाहते थे। यहां डॉक्टरों ने हाथ खड़े किए, तब लेकर लखनऊ गए। एम्स में हर दिन ऐसे राजेंद्र, सुरेंद्र घूमते मिल जाएंगे, जिन्हें परिसर में मिले किसी अनजान शख्स ने मददगार बनकर निजी अस्पताल भिजवा दिया।
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पांच मिनट में बुलाते हैं एंबुलेंस
मरीजों को ले जाने के लिए एंबुलेंस इंजीनियरिंग कॉलेज रोड और कुनराघाट के आसपास खड़ी रहती है। जैसे ही कोई मरीज माफिया के चंगुल में फंसता है, फोन कर तुरंत एंबुलेंस बुला लेते हैं। नजदीक में खड़ी एंबुलेंस परिसर में पहुंचती है और तुरंत मरीज को लेकर पहले से तय अस्पताल में पहुंचा देती है।
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आयुष्मान को बना रहे आधार, फंस रहे लोग
एम्स से निजी अस्पताल मरीज भेजते वक्त दलाल यही झांसा देते हैं कि आयुष्मान कार्ड पर तो सारा इलाज सरकारी खर्च से ही होता है। लेकिन जब, मरीज अस्पताल में भर्ती हो जाता है तो कार्ड से केवल ऑपरेशन में लगे उपकरण और छोटे-छोटे अन्य खर्च कटते हैं। इस दौरान डॉक्टर जो मेडिकल स्टोर से दवाएं लिखते हैं, उनका बिल तो देना ही पड़ता है। चार-पांच दिन बाद फिर लोग अपना मरीज लेकर सरकारी अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं।

वर्जन
एम्स में उपलब्ध संसाधनों से मरीजों का बेहतर उपचार किया जा रहा है। मरीज माफिया के बारे में कोई शिकायत नहीं है। अब एम्स आए हर मरीज का इलाज किया जा रहा है। अगर कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. आराधना सिंह, मीडिया प्रभारी एम्स
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