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Gorakhpur News: पहले दिन मिट्टी का चूल्हा बनाकर शुरू हुई छठ की तैयारी
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व्रती महिलाओं ने बताया कि आटे और गुड़ से बना ठेकुआ है पारंपरिक प्रसाद
अपार्टमेंट में महिलाएं बाथिंग टब के पानी में खड़े हो कर करेंगी पूजा
आज से बनाना शुरू करेंगी छठ के पकवान
गोरखपुर। महापर्व छठ की शुरुआत शनिवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ हो गया। व्रती महिलाओं ने परंपरागत तरीके से मिट्टी का चूल्हा बनाकर तैयारी की शुरुआत की। शहर के विभिन्न इलाकों से लेकर अपार्टमेंट की छतों तक छठ की रौनक दिखने लगी है। हर घर में शुद्धता, सफाई और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैल रही है। छठ व्रत की शुरुआत होते ही व्रती महिलाएं पूरी तरह सात्विक जीवन अपनाती हैं।
पादरी बाजार की व्रती रोशनी देवी ने बताया कि छठ व्रत में सबसे पहले मिट्टी का चूल्हा बनाकर उस पर भोजन पकाया जाता है। यह मिट्टी का चूल्हा पवित्रता और धरती माता से जुड़ाव का प्रतीक है। आम या आम्रपाली की लकड़ी से भोजन बनाया जाता है। पहले के समय में ये काफी आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब लकड़ी खरीदनी पड़ती है। व्रत के पहले के समय में जो भी सब्जियां प्रयोग होती थीं उसको घर की महिलाएं साल भार बीज डाल के तैयार करती थीं लेकिन अब सभी चीजें बाजार से खरीदी जाती हैं।
ठेकुआ और प्रसाद की खुशबू
व्रत का प्रमुख प्रसाद ठेकुआ बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। व्रती महिलाएं खुद ही मिट्टी के बने चूल्हा पर इसे तैयार करती हैं। गोलघर की सुनीता ने बताया कि ठेकुआ छठ का पारंपरिक और प्रिय प्रसाद है। इसे शुद्ध घी में तला जाता है और किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जाता। प्रसाद बनाने के दौरान पूरा घर पवित्र और स्वच्छ रखा जाता है। महिलाओं ने बताया कि छठ का हर नियम, हमारे परंपरा और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने से जुड़ा है।
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बाथिंग टब के पानी में खड़े हो कर करेंगी पूजा
बदलते समय के साथ परंपराओं का स्वरूप भी कुछ बदला है लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। अपार्टमेंटों में रहने वाली महिलाएं छठ पूजा बाथिंग टब में खड़े होकर करेंगी। भीड़ से बचने के लिए कुछ महिलाएं अपने घर पर ही बाथिंग टब में खड़े होकर पूजा करती है। आरती सिंह ने बताया कि हमने छत पर टब में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य देने की तैयारी की है। श्रद्धा वही है बस स्थान बदल गया है।
महिलाओं से बातचीत
पहले के समय में छठ में आटे का ठेकुआ बनता था। माना जाए तो यही पारंपरिक है। छठ घाट पर वेदी पर चढ़ाने के लिए आटा, गुड़ और सरसों के तेल से पकवान बनाया जाता था। आज के दौर में स्वाद को ध्यान के रखकर लोग केवल मैदे और सूजी का ठेकुआ बनाते है। पहले महिलाएं 15 से 20 दिन पहले से मोहल्ले की महिलाएं मिलकर तैयारियां करती थी लेकिन अब ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।
-मंजू उपाध्याय
जब गांव में रहकर व्रत करते थे तो मिट्टी के बर्तन और चूल्हा पर पकवान बनाते थे लेकिन अब गैस चूल्हे पर ही पकवान बनाते हैं। त्योहार के लिए मिट्टी का बर्तन बाजार से खरीदते हैं। दूसरे दिन से सारे पकवान बनाना शुरू कर दिया जाता है। खास बात यह है कि व्रती महिलाएं ही सारा पकवान बनाती हैं।
- सोनाली सिंह
तकनीक बदल गई है लेकिन अभी भी हमारे घर पर ठेकुए के लिए गेहूं चक्की में ही पीसा जाता है। सारी सब्जियां गांव से मंगवाई जाती हैं। हम इस त्योहार का इंतजार पूरे साल करते है। यह हमारे लिए ये बहुत खास है।
- शिवांगी मिश्रा
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अपार्टमेंट में महिलाएं बाथिंग टब के पानी में खड़े हो कर करेंगी पूजा
आज से बनाना शुरू करेंगी छठ के पकवान
गोरखपुर। महापर्व छठ की शुरुआत शनिवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ हो गया। व्रती महिलाओं ने परंपरागत तरीके से मिट्टी का चूल्हा बनाकर तैयारी की शुरुआत की। शहर के विभिन्न इलाकों से लेकर अपार्टमेंट की छतों तक छठ की रौनक दिखने लगी है। हर घर में शुद्धता, सफाई और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैल रही है। छठ व्रत की शुरुआत होते ही व्रती महिलाएं पूरी तरह सात्विक जीवन अपनाती हैं।
पादरी बाजार की व्रती रोशनी देवी ने बताया कि छठ व्रत में सबसे पहले मिट्टी का चूल्हा बनाकर उस पर भोजन पकाया जाता है। यह मिट्टी का चूल्हा पवित्रता और धरती माता से जुड़ाव का प्रतीक है। आम या आम्रपाली की लकड़ी से भोजन बनाया जाता है। पहले के समय में ये काफी आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब लकड़ी खरीदनी पड़ती है। व्रत के पहले के समय में जो भी सब्जियां प्रयोग होती थीं उसको घर की महिलाएं साल भार बीज डाल के तैयार करती थीं लेकिन अब सभी चीजें बाजार से खरीदी जाती हैं।
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ठेकुआ और प्रसाद की खुशबू
व्रत का प्रमुख प्रसाद ठेकुआ बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। व्रती महिलाएं खुद ही मिट्टी के बने चूल्हा पर इसे तैयार करती हैं। गोलघर की सुनीता ने बताया कि ठेकुआ छठ का पारंपरिक और प्रिय प्रसाद है। इसे शुद्ध घी में तला जाता है और किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जाता। प्रसाद बनाने के दौरान पूरा घर पवित्र और स्वच्छ रखा जाता है। महिलाओं ने बताया कि छठ का हर नियम, हमारे परंपरा और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने से जुड़ा है।
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बाथिंग टब के पानी में खड़े हो कर करेंगी पूजा
बदलते समय के साथ परंपराओं का स्वरूप भी कुछ बदला है लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। अपार्टमेंटों में रहने वाली महिलाएं छठ पूजा बाथिंग टब में खड़े होकर करेंगी। भीड़ से बचने के लिए कुछ महिलाएं अपने घर पर ही बाथिंग टब में खड़े होकर पूजा करती है। आरती सिंह ने बताया कि हमने छत पर टब में जल भरकर सूर्य देव को अर्घ्य देने की तैयारी की है। श्रद्धा वही है बस स्थान बदल गया है।
महिलाओं से बातचीत
पहले के समय में छठ में आटे का ठेकुआ बनता था। माना जाए तो यही पारंपरिक है। छठ घाट पर वेदी पर चढ़ाने के लिए आटा, गुड़ और सरसों के तेल से पकवान बनाया जाता था। आज के दौर में स्वाद को ध्यान के रखकर लोग केवल मैदे और सूजी का ठेकुआ बनाते है। पहले महिलाएं 15 से 20 दिन पहले से मोहल्ले की महिलाएं मिलकर तैयारियां करती थी लेकिन अब ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।
-मंजू उपाध्याय
जब गांव में रहकर व्रत करते थे तो मिट्टी के बर्तन और चूल्हा पर पकवान बनाते थे लेकिन अब गैस चूल्हे पर ही पकवान बनाते हैं। त्योहार के लिए मिट्टी का बर्तन बाजार से खरीदते हैं। दूसरे दिन से सारे पकवान बनाना शुरू कर दिया जाता है। खास बात यह है कि व्रती महिलाएं ही सारा पकवान बनाती हैं।
- सोनाली सिंह
तकनीक बदल गई है लेकिन अभी भी हमारे घर पर ठेकुए के लिए गेहूं चक्की में ही पीसा जाता है। सारी सब्जियां गांव से मंगवाई जाती हैं। हम इस त्योहार का इंतजार पूरे साल करते है। यह हमारे लिए ये बहुत खास है।
- शिवांगी मिश्रा