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Gorakhpur News: अब निर्माण स्थल पर लिखवाना होगा मानचित्र नंबर व स्वीकृति की तारीख
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कार्रवाई के बाद लोग प्रस्तुत करते थे नक्शा, लगते थे आरोप-प्रत्यारोप
नंबर व तारीख लिखा होने से जीडीए कर्मी और लोग खुद भी चेक कर सकेंगे मानचित्र
गोरखपुर। जीडीए के क्षेत्र में घर या व्यावसायिक भवन बनवाने वालों को स्वीकृत मानचित्र का नंबर व तारीख निर्माण स्थल पर लिखवाना होगा। जीडीए के अफसर जब भी जांच में जाएंगे तो वहां नंबर व तारीख से मानचित्र की जांच कर सकेंगे। जल्द ही इस पर अमल कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
घर, दुकान या अन्य कामर्शियल निर्माण के लिए जीडीए से मानचित्र स्वीकृत कराना होता है। हाल ही में कई ऐसे मामले आए, जिसमें पीड़ित पक्ष का यह आरोप है कि जांच करने गए अफसर ने बिना मानचित्र देखे एकतरफा चालान काट दिया। वहीं अफसरों का तर्क होता है कि जांच के दौरान नक्शा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे वे जांच नहीं कर पाए। बुधवार को जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई इनफोर्समेंट कमेटी की बैठक में भी यह मुद्दा उठा। इसी बैठक में तय किया गया कि जीडीए की सभी काॅलोनियों और क्षेत्राधिकार में आने वाले मकानों, बहु मंजिली इमारतों या व्यावसायिक भवनों पर उनके मानचित्र स्वीकृति की जानकारी साथ करना अनिवार्य होगा।
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डिस्प्ले बोर्ड पर लिखनी होगी ये सूचनाएं
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि बैठक में इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा के बाद यह तय किया गया कि इसके लिए लोगों को अभी जागरूक करने की जरूरत है। इसके अलावा जीडीए से स्वीकृत मानचित्र का नंबर और स्वीकृत होने की तारीख घर के सामने के दरवाजे पर चस्पा करानी होगी। ये ऐसी जगह होना चाहिए, जहां आम लोग आसानी से पहुंचकर नंबरों की जांच कर सकें। वहीं जीडीए के अफसर भी जांच के दौरान इन्हीं नंबर को देखेंगे। अगर किसी कर्मचारी को शक होगा तो वह इन नंबर के सहारे ऑनलाइन भी अपने प्लाट के लिए स्वीकृत मानचित्र की वर्तमान स्थिति को जांच सकेगा।
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कोट
अक्सर ये शिकायतें आती थीं कि जांच के दौरान अफसर ने बिना मानचित्र देखे ही कार्रवाई कर दी, जबकि उनका मानचित्र स्वीकृत है। अब इस पर रोक लगाने के यह व्यवस्था की गई है कि लोग खुद ही निर्माण स्थल के सामने मानचित्र स्वीकृत होने का नंबर व तारीख चस्पा कर दें। ताकि कोई अफसर वहां पहुंचे तो आसानी से मानचित्र की जांच हाे सके।
- उदय प्रताप सिंह, सचिव जीडीए
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नंबर व तारीख लिखा होने से जीडीए कर्मी और लोग खुद भी चेक कर सकेंगे मानचित्र
गोरखपुर। जीडीए के क्षेत्र में घर या व्यावसायिक भवन बनवाने वालों को स्वीकृत मानचित्र का नंबर व तारीख निर्माण स्थल पर लिखवाना होगा। जीडीए के अफसर जब भी जांच में जाएंगे तो वहां नंबर व तारीख से मानचित्र की जांच कर सकेंगे। जल्द ही इस पर अमल कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
घर, दुकान या अन्य कामर्शियल निर्माण के लिए जीडीए से मानचित्र स्वीकृत कराना होता है। हाल ही में कई ऐसे मामले आए, जिसमें पीड़ित पक्ष का यह आरोप है कि जांच करने गए अफसर ने बिना मानचित्र देखे एकतरफा चालान काट दिया। वहीं अफसरों का तर्क होता है कि जांच के दौरान नक्शा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे वे जांच नहीं कर पाए। बुधवार को जीडीए सचिव उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई इनफोर्समेंट कमेटी की बैठक में भी यह मुद्दा उठा। इसी बैठक में तय किया गया कि जीडीए की सभी काॅलोनियों और क्षेत्राधिकार में आने वाले मकानों, बहु मंजिली इमारतों या व्यावसायिक भवनों पर उनके मानचित्र स्वीकृति की जानकारी साथ करना अनिवार्य होगा।
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डिस्प्ले बोर्ड पर लिखनी होगी ये सूचनाएं
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि बैठक में इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा के बाद यह तय किया गया कि इसके लिए लोगों को अभी जागरूक करने की जरूरत है। इसके अलावा जीडीए से स्वीकृत मानचित्र का नंबर और स्वीकृत होने की तारीख घर के सामने के दरवाजे पर चस्पा करानी होगी। ये ऐसी जगह होना चाहिए, जहां आम लोग आसानी से पहुंचकर नंबरों की जांच कर सकें। वहीं जीडीए के अफसर भी जांच के दौरान इन्हीं नंबर को देखेंगे। अगर किसी कर्मचारी को शक होगा तो वह इन नंबर के सहारे ऑनलाइन भी अपने प्लाट के लिए स्वीकृत मानचित्र की वर्तमान स्थिति को जांच सकेगा।
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अक्सर ये शिकायतें आती थीं कि जांच के दौरान अफसर ने बिना मानचित्र देखे ही कार्रवाई कर दी, जबकि उनका मानचित्र स्वीकृत है। अब इस पर रोक लगाने के यह व्यवस्था की गई है कि लोग खुद ही निर्माण स्थल के सामने मानचित्र स्वीकृत होने का नंबर व तारीख चस्पा कर दें। ताकि कोई अफसर वहां पहुंचे तो आसानी से मानचित्र की जांच हाे सके।
- उदय प्रताप सिंह, सचिव जीडीए