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Gorakhpur News: राष्ट्रीय स्तर पर फाइव स्टार गारबेज फ्री सिटी का खिताब
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वाटर प्लस सर्टिफिकेट और राष्ट्रीय पुरस्कार से नगर निगम सम्मानित
स्वच्छ सर्वेक्षण 2022-23 में देश में था 75वां स्थान, इस बार चौथे पायदान पर
गोरखपुर। गोरखपुर ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गारबेज फ्री सिटी के तौर पर पहली बार शहर ने फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त की है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022-23 में देश में 75वीं और राज्य में 9वीं रैंकिंग के साथ 3 स्टार गारबेज फ्री सिटी का दर्जा प्राप्त करने वाले गोरखपुर नगर निगम ने इस बार देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर फाइव स्टार गारबेज फ्री सिटी बन गया है।
नगर निगम ने यह उपलब्धि शहर के ठोस कचरा प्रबंधन, जन भागीदारी और नवाचारी पहल से हासिल की है। इसके साथ ही, अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए वाटर प्लस सर्टिफिकेट और सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल कर गोरखपुर ने स्वच्छ भारत मिशन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर की प्रगति
2016-17: राष्ट्रीय रैंकिंग 314
2017-18: राष्ट्रीय रैंकिंग 280, राज्य रैंकिंग 18
2018-19: राष्ट्रीय रैंकिंग 226, राज्य रैंकिंग 28
2019-20: राष्ट्रीय रैंकिंग 82, राज्य रैंकिंग 9
2020-21: राष्ट्रीय रैंकिंग 111, राज्य रैंकिंग 9
2021-22: राष्ट्रीय रैंकिंग 74, राज्य रैंकिंग 7
2022-23: राष्ट्रीय रैंकिंग 75, राज्य रैंकिंग 9, गारबेज फ्री सिटी में 3 स्टार
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इन प्रयासों से मिला प्रदेश में पहला स्थान
गोरखपुर नगर निगम ने स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सुथनी में 40 एकड़ में इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी की स्थापना की है, जिसमें एनटीपीसी के सहयोग से 500 टन प्रतिदिन क्षमता का वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट, 200 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट और घरेलू खतरनाक कचरा निस्तारण प्लांट का निर्माण शुरू हुआ। इसके अलावा चरगांवा और बसंतपुर में दो गारबेज ट्रांसफर स्टेशन और पांच मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित किए गए। भूमिगत डस्टबिन और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को बढ़ावा दिया गया। महेसरा में 50 टन प्रतिदिन क्षमता का सीएंडडी (कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन) वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और हाइब्रिड एनिमल क्रिमेटोरियम का संचालन शुरू हुआ। एकला बांध पर लिगेसी वेस्ट के पहाड़ को समाप्त कर सघन पौधरोपण किया गया। डोर-टू-डोर कचरा संग्रह, होम कम्पोस्टिंग, रात्रिकालीन व्यावसायिक क्षेत्रों में सफाई, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और वाटर स्प्रिंकलर से डस्ट प्रबंधन लागू किया गया। इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की स्थापना और निजी एनजीओ के सहयोग से जनजागरूकता अभियान चलाए गए।
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सफाई मित्रों के लिए विशेष पहल से भी मिला लाभ
नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कई कदम उठाए। मैनुअल सीवर सफाई को समाप्त कर मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था लागू की गई। सीवर, नाले और सड़क की सफाई के लिए मशीनें लगाई गईं। सफाई मित्रों के लिए स्वास्थ्य शिविर, गर्मी में पानी की बोतलें और बारिश में रेनकोट उपलब्ध कराए गए। साथ ही, सफाई कर्मचारियों के लिए कल्याण कोष का सृजन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप गोरखपुर को ''''सफाई मित्र सुरक्षित शहर'''' श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
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अपशिष्ट जल प्रबंधन में वाटर प्लस की उपलब्धि
गोरखपुर ने अपशिष्ट जल के सुरक्षित निस्तारण के लिए वाटर प्लस सर्टिफिकेट हासिल किया। तकिया घाट पर बायोरेमिडिएशन तकनीक से नालों के दूषित जल को राप्ती नदी में जाने से पहले शोधित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 30 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण 2022-23 में देश में था 75वां स्थान, इस बार चौथे पायदान पर
गोरखपुर। गोरखपुर ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गारबेज फ्री सिटी के तौर पर पहली बार शहर ने फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त की है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2022-23 में देश में 75वीं और राज्य में 9वीं रैंकिंग के साथ 3 स्टार गारबेज फ्री सिटी का दर्जा प्राप्त करने वाले गोरखपुर नगर निगम ने इस बार देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर फाइव स्टार गारबेज फ्री सिटी बन गया है।
नगर निगम ने यह उपलब्धि शहर के ठोस कचरा प्रबंधन, जन भागीदारी और नवाचारी पहल से हासिल की है। इसके साथ ही, अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए वाटर प्लस सर्टिफिकेट और सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल कर गोरखपुर ने स्वच्छ भारत मिशन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर की प्रगति
2016-17: राष्ट्रीय रैंकिंग 314
2017-18: राष्ट्रीय रैंकिंग 280, राज्य रैंकिंग 18
2018-19: राष्ट्रीय रैंकिंग 226, राज्य रैंकिंग 28
2019-20: राष्ट्रीय रैंकिंग 82, राज्य रैंकिंग 9
2020-21: राष्ट्रीय रैंकिंग 111, राज्य रैंकिंग 9
2021-22: राष्ट्रीय रैंकिंग 74, राज्य रैंकिंग 7
2022-23: राष्ट्रीय रैंकिंग 75, राज्य रैंकिंग 9, गारबेज फ्री सिटी में 3 स्टार
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इन प्रयासों से मिला प्रदेश में पहला स्थान
गोरखपुर नगर निगम ने स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सुथनी में 40 एकड़ में इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी की स्थापना की है, जिसमें एनटीपीसी के सहयोग से 500 टन प्रतिदिन क्षमता का वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट, 200 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट और घरेलू खतरनाक कचरा निस्तारण प्लांट का निर्माण शुरू हुआ। इसके अलावा चरगांवा और बसंतपुर में दो गारबेज ट्रांसफर स्टेशन और पांच मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित किए गए। भूमिगत डस्टबिन और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को बढ़ावा दिया गया। महेसरा में 50 टन प्रतिदिन क्षमता का सीएंडडी (कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन) वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और हाइब्रिड एनिमल क्रिमेटोरियम का संचालन शुरू हुआ। एकला बांध पर लिगेसी वेस्ट के पहाड़ को समाप्त कर सघन पौधरोपण किया गया। डोर-टू-डोर कचरा संग्रह, होम कम्पोस्टिंग, रात्रिकालीन व्यावसायिक क्षेत्रों में सफाई, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग और वाटर स्प्रिंकलर से डस्ट प्रबंधन लागू किया गया। इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की स्थापना और निजी एनजीओ के सहयोग से जनजागरूकता अभियान चलाए गए।
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सफाई मित्रों के लिए विशेष पहल से भी मिला लाभ
नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कई कदम उठाए। मैनुअल सीवर सफाई को समाप्त कर मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था लागू की गई। सीवर, नाले और सड़क की सफाई के लिए मशीनें लगाई गईं। सफाई मित्रों के लिए स्वास्थ्य शिविर, गर्मी में पानी की बोतलें और बारिश में रेनकोट उपलब्ध कराए गए। साथ ही, सफाई कर्मचारियों के लिए कल्याण कोष का सृजन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप गोरखपुर को ''''सफाई मित्र सुरक्षित शहर'''' श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
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अपशिष्ट जल प्रबंधन में वाटर प्लस की उपलब्धि
गोरखपुर ने अपशिष्ट जल के सुरक्षित निस्तारण के लिए वाटर प्लस सर्टिफिकेट हासिल किया। तकिया घाट पर बायोरेमिडिएशन तकनीक से नालों के दूषित जल को राप्ती नदी में जाने से पहले शोधित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 30 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है।