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गोड़धोइया नाला : मकान दरकने के बावजूद बना रहे दो-तीन मंजिल...बढ़ रहा खतरा
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गोरखपुर। गोड़धोइया नाला के सुंदरीकरण से पूरे इलाके की शक्ल बदल जाएगी, मगर उसके पहले अफसरों के लिए एक सिरदर्दी खड़ी हो गई है। तीन दिन पहले एक मकान की दीवारें दरकने के बाद से अधिकारी परेशान हैं। परेशानी की बड़ी वजह यह भी है कि लोग अब भी दो-तीन मंजिल मकान उठाने में जुटे हुए हैं।
अधिकारियों को डर है कि यदि बरसात में नाले में पानी भरा तो मकानों को खतरा हो सकता है। हालांकि कुछ लोग खतरा भांपते हुए मकान पर निर्माण करने से बच रहे हैं। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर, जिन मकानों के पास खोदाई हो रही है, वहां लोहे की प्लेटें लगवानी शुरू कर दी हैं।
गोड़धोइया नाले का सुंदरीकरण तेजी से चल रहा है। इसी बीच खजांची पुलिया के पास राजनगर में राजेश श्रीवास्तव के मकान में दरार आने के बाद स्थानीय लोगों के साथ अधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है। इस नाले के आसपास बने करीब 350 मकानों की पड़ताल की गई तो कई ऐसे दिखे, जिनकी नींव के पास ही चार मीटर से ज्यादा गहराई में गड्ढा है। हरिसेवकपुर नंबर दो के नरिया टोले में नाला निर्माण के दौरान ही एक व्यक्ति ने दूसरी मंजिल बना ली है।
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उनके मकान को सपोर्ट देने के लिए गर्डर बनाया गया है। लोहे के गर्डर करीब चार मीटर नीचे धंसाए गए हैं, ताकि मकान का हिस्सा नाले की ओर झुके तो वे रोक सकें। हालांकि, इसी स्थान के पास चार लोगों ने अपने मकान के तोड़े गए हिस्से के बाद मकान को रोकने के लिए पिलर बनाया है, लेकिन उन्होंने नींव के नीचे की मिट्टी रोकने के लिए चार इंच की दीवार नहीं चलाई है। कुछ लोगों ने तो अपने नींव के पास की मिट्टी ही खोद ली है, इस खालीपन से मकानों पर खतरा बढ़ गया है।
इसी क्षेत्र में एक मकान में पिलर और बीम बनाकर मजबूत किया गया है, लेकिन मकान मालिक ने नींव की मिट्टी रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया, जबकि दूसरी मंजिल की दीवार भी खड़ी कर ली। उनकी बीम लचक गया, अब जल निगम के इंजीनियरों से उन्हें छत लगाने से रोक दिया है।
जल निगम के एई विनेश चौधरी ने बताया कि लोगों को मकान में नया निर्माण करने से पहले बरसात बीत जाने का इंतजार करना चाहिए। मकानों और नाला के बीच खाली जमीन के बीच पक्का निर्माण हो जाएगा तो धंसने का जोखिम बहुत कम हो जाएगा। नाले के किनारे सभी मकानों के बाहर क्लोज टिंबरिंग करने का निर्णय लिया गया है। इसमें लोह की प्लेट से गर्डर बनाकर मकान का लोड रोकेंगे, नाला निर्माण के बाद भी लोहे की प्लेट वहीं धंसी रहेगी।
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बरसात से पहले तीन किमी ही बन पाएगा नाला
जल निगम के जेई प्रमोद तिवारी ने बताया कि गोड़धोइया नाला निर्माण में चार किमी लंबाई में युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल निगम और कार्यदायी संस्था ने 31 मई तक कार्य करने की योजना बनाई है, उसके बाद शेष हिस्से को बराबर करके जलनिकासी की कोशिश की जाएगी। राजस्व गांव सेमरा, हरिसेवकपुर, जंगल छत्रधारी, बशारतपुर आंशिक एवं फातिमा अस्पताल के पास करीब तीन किमी नाला बरसात के पहले बनाने का लक्ष्य है, इसके साथ जेल बाईपास रोड के पास शाहपुर में 250 से 300 मीटर नाला बनाने की योजना है।
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और बढ़ गई दरार, चिंता भी बढ़ी
राजनगर में राजेश श्रीवास्तव के मकान में फर्श में बनी दरार शनिवार को और बढ़ गई। हालांकि, जल निगम अधिकारियों के निर्देश पर कार्यदायी संस्था युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। मकान के पास फर्श की ढलाई हो गई और एक दिन में दीवार बनाने की योजना है, ताकि पक्के निर्माण से मकान की सुरक्षा बढ़ जाए। हालांकि, राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि मकान में रहने पर हादसे का जोखिम रहेगा, इस कारण पिछले हिस्से को तोड़कर पुन: बनाना पड़ेगा।
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मेरे मकान में दरार आ गई है। मकान को तोड़ने के बाद पानी भरा हुआ है। बरसात में और पानी भरने की आशंका है। बरसात से पहले निर्माण पूरा होना बहुत आवश्यक है।
- चंद्रजीत सिंह, राजनगर
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मेरा मकान नाले से 15 फीट दूर है, लेकिन बाहर दरार आ गई है। नाला निर्माण के दौरान लोगों को पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है।
- फौजदार सिंह, राजनगर
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वर्जन
बरसात से पहले साढ़े तीन किमी नाला निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। 31 मई तक निर्माण किया जाएगा। नाला निर्माण के कारण जिन मकानों के कुछ हिस्से तोड़े गए हैं, उनकी नींव से छत तक मकान तोड़े गए हैं और मजबूती कम हो गई है, ऐसे लोगों को मकान की नींव पीलर से ज्यादा मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। बरसात के बाद ही मकान का निर्माण कराना चाहिए। वैसे नाले के किनारे के सभी मकानों की क्लोज टिंबरिंग की जाएगी और लोहे के गार्डर बाद में भी नहीं निकाले जाएंगे।
- पंकज कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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अधिकारियों को डर है कि यदि बरसात में नाले में पानी भरा तो मकानों को खतरा हो सकता है। हालांकि कुछ लोग खतरा भांपते हुए मकान पर निर्माण करने से बच रहे हैं। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर, जिन मकानों के पास खोदाई हो रही है, वहां लोहे की प्लेटें लगवानी शुरू कर दी हैं।
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गोड़धोइया नाले का सुंदरीकरण तेजी से चल रहा है। इसी बीच खजांची पुलिया के पास राजनगर में राजेश श्रीवास्तव के मकान में दरार आने के बाद स्थानीय लोगों के साथ अधिकारियों की चिंता भी बढ़ गई है। इस नाले के आसपास बने करीब 350 मकानों की पड़ताल की गई तो कई ऐसे दिखे, जिनकी नींव के पास ही चार मीटर से ज्यादा गहराई में गड्ढा है। हरिसेवकपुर नंबर दो के नरिया टोले में नाला निर्माण के दौरान ही एक व्यक्ति ने दूसरी मंजिल बना ली है।
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उनके मकान को सपोर्ट देने के लिए गर्डर बनाया गया है। लोहे के गर्डर करीब चार मीटर नीचे धंसाए गए हैं, ताकि मकान का हिस्सा नाले की ओर झुके तो वे रोक सकें। हालांकि, इसी स्थान के पास चार लोगों ने अपने मकान के तोड़े गए हिस्से के बाद मकान को रोकने के लिए पिलर बनाया है, लेकिन उन्होंने नींव के नीचे की मिट्टी रोकने के लिए चार इंच की दीवार नहीं चलाई है। कुछ लोगों ने तो अपने नींव के पास की मिट्टी ही खोद ली है, इस खालीपन से मकानों पर खतरा बढ़ गया है।
इसी क्षेत्र में एक मकान में पिलर और बीम बनाकर मजबूत किया गया है, लेकिन मकान मालिक ने नींव की मिट्टी रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया, जबकि दूसरी मंजिल की दीवार भी खड़ी कर ली। उनकी बीम लचक गया, अब जल निगम के इंजीनियरों से उन्हें छत लगाने से रोक दिया है।
जल निगम के एई विनेश चौधरी ने बताया कि लोगों को मकान में नया निर्माण करने से पहले बरसात बीत जाने का इंतजार करना चाहिए। मकानों और नाला के बीच खाली जमीन के बीच पक्का निर्माण हो जाएगा तो धंसने का जोखिम बहुत कम हो जाएगा। नाले के किनारे सभी मकानों के बाहर क्लोज टिंबरिंग करने का निर्णय लिया गया है। इसमें लोह की प्लेट से गर्डर बनाकर मकान का लोड रोकेंगे, नाला निर्माण के बाद भी लोहे की प्लेट वहीं धंसी रहेगी।
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बरसात से पहले तीन किमी ही बन पाएगा नाला
जल निगम के जेई प्रमोद तिवारी ने बताया कि गोड़धोइया नाला निर्माण में चार किमी लंबाई में युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। जल निगम और कार्यदायी संस्था ने 31 मई तक कार्य करने की योजना बनाई है, उसके बाद शेष हिस्से को बराबर करके जलनिकासी की कोशिश की जाएगी। राजस्व गांव सेमरा, हरिसेवकपुर, जंगल छत्रधारी, बशारतपुर आंशिक एवं फातिमा अस्पताल के पास करीब तीन किमी नाला बरसात के पहले बनाने का लक्ष्य है, इसके साथ जेल बाईपास रोड के पास शाहपुर में 250 से 300 मीटर नाला बनाने की योजना है।
और बढ़ गई दरार, चिंता भी बढ़ी
राजनगर में राजेश श्रीवास्तव के मकान में फर्श में बनी दरार शनिवार को और बढ़ गई। हालांकि, जल निगम अधिकारियों के निर्देश पर कार्यदायी संस्था युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। मकान के पास फर्श की ढलाई हो गई और एक दिन में दीवार बनाने की योजना है, ताकि पक्के निर्माण से मकान की सुरक्षा बढ़ जाए। हालांकि, राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि मकान में रहने पर हादसे का जोखिम रहेगा, इस कारण पिछले हिस्से को तोड़कर पुन: बनाना पड़ेगा।
मेरे मकान में दरार आ गई है। मकान को तोड़ने के बाद पानी भरा हुआ है। बरसात में और पानी भरने की आशंका है। बरसात से पहले निर्माण पूरा होना बहुत आवश्यक है।
- चंद्रजीत सिंह, राजनगर
मेरा मकान नाले से 15 फीट दूर है, लेकिन बाहर दरार आ गई है। नाला निर्माण के दौरान लोगों को पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है।
- फौजदार सिंह, राजनगर
वर्जन
बरसात से पहले साढ़े तीन किमी नाला निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। 31 मई तक निर्माण किया जाएगा। नाला निर्माण के कारण जिन मकानों के कुछ हिस्से तोड़े गए हैं, उनकी नींव से छत तक मकान तोड़े गए हैं और मजबूती कम हो गई है, ऐसे लोगों को मकान की नींव पीलर से ज्यादा मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। बरसात के बाद ही मकान का निर्माण कराना चाहिए। वैसे नाले के किनारे के सभी मकानों की क्लोज टिंबरिंग की जाएगी और लोहे के गार्डर बाद में भी नहीं निकाले जाएंगे।
- पंकज कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम