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मुहर्रम 2025 : शाही जुलूस शानो-शौकत से निकला, कर्बला में दफन हुए ताजिए-जगह-जगह हुआ स्वागत
Mon, 07 Jul 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jul 2025 01:08 AM IST
सार
इमामबाड़ा एस्टेट का शाही जुलूस सुबह 9:30 बजे अदनान फर्रुख अली शाह (मियां साहब) के साहबजादे सैय्यद अयान अली शाह के नेतृत्व में परंपरागत तरीके से साथ निकाला गया। यह इमामबाड़ा से शुरू होकर बक्शीपुर, अलीनगर, जाफरा बाजार, घासीकटरा में कर्बला पहुंचा। जहां इमामबाड़ा एस्टेट के जुलूस में शामिल लोगों ने आराम किया।
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दसवीं मुहर्रम को इमामबाड़ा एस्टेट से निकला गया शाही जुलूस, शामिल रहे अयान अली शाह और अन्य लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
10वीं मुहर्रम को मियां साहब का परंपरागत शाही जुलूस इमामबाड़ा एस्टेट के पश्चिम फाटक से पूरी शानो-शौकत के साथ निकाला गया। इसके साथ ही मुहर्रम के प्रमुख जुलूसों का समापन हो गया। रविवार देर रात लाइन के ताजिया निकाले गए। यह सिलसिला देर रात से शुरू होकर सोमवार सुबह तक चलता रहा। वहीं नवीं मुहर्रम को इमाम चौकों पर बिठाए गए ताजिया लेकर अकीदतमंद कर्बला पहुंचे, जहां उन्हें दफन किया गया।
दसवीं मुहर्रम पर इमामबाड़ा एस्टेट से निकले गए शाही जुलूस में शामिल रहे समुदाय के लोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जहां इमामबाड़ा एस्टेट के जुलूस में शामिल लोगों ने आराम किया। यहां से परंपरागत रूप से बक्शीपुर का भगवती चौक का जुलूस मियां साहब के जुलूस के आगे चलने लगा। करीब एक घंटे बाद इमामबाड़ा एस्टेट का जुलूस फिर आगे बढ़ा और घासीकटरा, मिर्जापुर, साहबगंज, खूनीपुर, नखास, कोतवाली होता हुआ इमामबाड़ा परिसर में लौटा।
जुलूस में पुरानी रवायत के मुताबिक सबसे आगे इमामबाड़ा एस्टेट का परचम और उसके बाद शहनाई बजाने वाली का जत्था चल रहा था। शहनाई पर मातमी धुन बजाई जा रही थी। इसके अलावा घोड़े-बैंड, पुश्तैनी सैनिकों की आठ पलाटून सड़क के दोनों तरफ चल रही थी। इसके पीछे सोने-चांदी का अलम लिए हुए खास लोगों का दल था। रास्ते में कई जगहों पर जुलूस का खैर मकदम किया गया।
जुलूस में पुरानी रवायत के मुताबिक सबसे आगे इमामबाड़ा एस्टेट का परचम और उसके बाद शहनाई बजाने वाली का जत्था चल रहा था। शहनाई पर मातमी धुन बजाई जा रही थी। इसके अलावा घोड़े-बैंड, पुश्तैनी सैनिकों की आठ पलाटून सड़क के दोनों तरफ चल रही थी। इसके पीछे सोने-चांदी का अलम लिए हुए खास लोगों का दल था। रास्ते में कई जगहों पर जुलूस का खैर मकदम किया गया।
दसवीं मुहर्रम के दिन असूरन चौराहे पर निकाला गया जुलूस,शामिल विभिन्न मोहल्ले के ताजिया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जगह-जगह हुआ स्वागत
इमामबाड़ा कमाल शहीद शहीद मजार पर डाॅ. मुम्ताज अहमद की अगुवाई में स्वागत किया गया। इसके अलावा अलीनगर चौराहा पर आफताब अहमद, जाफरा बाजार चौराहा पर डॉ. सुधाकर पांडेय, जाफरा बाजार पुल के पहले इमामबाड़ा मुतवल्लियान संघ के अध्यक्ष सैय्यद इरशाद अहमद, महासचिव हाजी सोहराब खां, शकील शाही आदि ने स्वागत किया।
इसके बाद जुलूस कर्बला पहुंचा, जहां मियां साहब कुछ देर विश्राम किया गया। कर्बले से निकल कर सैय्यद अयान अली शाह ने जुलूस को पुरानी रवायत के मुताबिक आगे बढ़ाया। साहबगंज मंडी में नबी हुसैन, तारिक हुसैन, खूनीपुर चौराहे पर कौमी एकता कमेटी के अशफाक मेकरानी, इस्माइलपुर में हाजी कलीम अहमद फरजंद और अब्दुल्लाह आदि ने स्वागत किया गया।
इमामबाड़ा कमाल शहीद शहीद मजार पर डाॅ. मुम्ताज अहमद की अगुवाई में स्वागत किया गया। इसके अलावा अलीनगर चौराहा पर आफताब अहमद, जाफरा बाजार चौराहा पर डॉ. सुधाकर पांडेय, जाफरा बाजार पुल के पहले इमामबाड़ा मुतवल्लियान संघ के अध्यक्ष सैय्यद इरशाद अहमद, महासचिव हाजी सोहराब खां, शकील शाही आदि ने स्वागत किया।
इसके बाद जुलूस कर्बला पहुंचा, जहां मियां साहब कुछ देर विश्राम किया गया। कर्बले से निकल कर सैय्यद अयान अली शाह ने जुलूस को पुरानी रवायत के मुताबिक आगे बढ़ाया। साहबगंज मंडी में नबी हुसैन, तारिक हुसैन, खूनीपुर चौराहे पर कौमी एकता कमेटी के अशफाक मेकरानी, इस्माइलपुर में हाजी कलीम अहमद फरजंद और अब्दुल्लाह आदि ने स्वागत किया गया।
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दसवीं मुहर्रम के दिन असूरन चौराहे पर निकाला गया जुलूस,शामिल विभिन्न मोहल्ले के ताजिया।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंजुमन इस्लामिया के अंदर प्रधानाचार्य कारी नसीमुल्लाह ने अंजुमन के सभी बच्चों और स्टाफ के साथ मियां साहब के जुलूस का स्वागत किया गया। सैय्यद अयान अली शह के साथ जुलूस में उनके निकटतम सहयोगियों में हाजी सोहराब खान, शकील शाही, फैजीबाबा, सैय्यद शहाब अहमद, पार्षद समद गुफरान (साजू), ख्वाजा शमशुद्दीन, नेहाल, नबी हुसैन, कुरबान समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति चल रहे थे।
पुलिस प्रशासन की व्यवस्था रही चुस्त
इमामबाड़ा एस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम ने पुलिस प्रशासन के पदाधिकारियों का जुलूस को सकुशल निकलवाने और मियां साहब की सुरक्षा व्यवस्था में पूरी सक्रियता दिखाने के लिए धन्यवाद दिया। इस दौरान विशेष चौकसी रही। सीओ कोतवाली, थाना प्रभारी कोतवाली और अनेक प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों ने जुलूस के संचलन और सुरक्षा में पूरा सहयोग किया।
पुलिस प्रशासन की व्यवस्था रही चुस्त
इमामबाड़ा एस्टेट के प्रवक्ता मंजूर आलम ने पुलिस प्रशासन के पदाधिकारियों का जुलूस को सकुशल निकलवाने और मियां साहब की सुरक्षा व्यवस्था में पूरी सक्रियता दिखाने के लिए धन्यवाद दिया। इस दौरान विशेष चौकसी रही। सीओ कोतवाली, थाना प्रभारी कोतवाली और अनेक प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारियों ने जुलूस के संचलन और सुरक्षा में पूरा सहयोग किया।
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कर्बला में दफन हुए ताजिए मुहर्रम की दसवीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन और उनके जांनिसारों की शहादत को य
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कर्बला में दफन हुए ताजिए
मुहर्रम की दसवीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन और उनके जांनिसारों की शहादत को याद करते हुए सुबह से ही ताजियों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया जो देर रात तक चलता रहा। रविवार को महानगर के सभी इमाम चौकों पर बैठाए गए ताजिया के साथ अकीदतमंदों ने जुलूस निकाला और कर्बला पहुंचकर शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के बाद ताजियों को कर्बला में सुपुर्दे खाक (दफन) किया।
इमाम चौकों पर रखे गए बड़े ताजिया जुलूस में शामिल हुए। खास तौर से इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों के इसाले सवाब के लिए मस्जिद, इमाम चौकों व घरों में कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ हुई। जगह-जगह शर्बत, मीठा चावल, बिरयानी, खिचड़ा बनाया गया और अकीदतमंदों में बांटा गया। लोगों ने दसवीं मुहर्रम का रोजा भी रखा।
मुहर्रम की दसवीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन और उनके जांनिसारों की शहादत को याद करते हुए सुबह से ही ताजियों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया जो देर रात तक चलता रहा। रविवार को महानगर के सभी इमाम चौकों पर बैठाए गए ताजिया के साथ अकीदतमंदों ने जुलूस निकाला और कर्बला पहुंचकर शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के बाद ताजियों को कर्बला में सुपुर्दे खाक (दफन) किया।
इमाम चौकों पर रखे गए बड़े ताजिया जुलूस में शामिल हुए। खास तौर से इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों के इसाले सवाब के लिए मस्जिद, इमाम चौकों व घरों में कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ हुई। जगह-जगह शर्बत, मीठा चावल, बिरयानी, खिचड़ा बनाया गया और अकीदतमंदों में बांटा गया। लोगों ने दसवीं मुहर्रम का रोजा भी रखा।