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Gorakhpur News: पानी में मिलावट...लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रहे धंधेबाज

Sun, 14 Sep 2025 01:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:42 AM IST
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Gorakhpur News : Mother, I am sorry... I could not fulfill your dreams, please give me your womb again in the next birth
रहें होशियार : बिना जांच के बिक रहा पानी, रेलवे स्टेशन से लेकर मोहल्लों तक धंधेबाजों का नेटवर्क
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सेहत पर खतरा, नमूने फेल होने के बावजूद धंधेबाजी पर नहीं लग पा रही रोक
गोरखपुर। पानी पिलाना पुण्य का काम होता है, लेकिन अपने मोटे मुनाफे के लिए धंधेबाज इसमें मिलावट कर लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। शहर में शुद्ध पानी के नाम पर हो रहा धंधा सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है। रेलवे स्टेशन, मोहल्लों और दुकानों तक जो पानी जार, बोतल या पैकेट में मिल रहा है, उसकी कोई जांच नहीं होती। इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं।
रेलवे स्टेशन के सामने की दुकानों पर रोजाना ऑटो से बोतलबंद पानी उतरता है। इसे प्लेटफार्म व ट्रेनों में बेच दिया जाता है जबकि रेलवे स्टेशन पर कुछ चुनिंदा ब्रांड का ही पानी बेचने की अनुमति है। शहर में पिछले छह महीने में हुई अलग-अलग जांच में पर्दाफाश हुआ कि बोतलबंद और पैकेट वाले पानी में आवश्यक खनिज तत्व नहीं हैं। पैक्ड पानी के नमूनों में कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।
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इस बैक्टीरिया की वजह से पेट से संबंधित गंभीर बीमारियां होती हैं। इससे पहले जांच में केवल क्लोरीन मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन अब बैक्टीरिया की मौजूदगी ने खतरे को और बढ़ा दिया है। इसके बावजूद शुद्ध पानी के नाम पर हर दिन शहर में करीब 20 लाख लीटर पानी की सप्लाई आरओ प्लांट के जरिये हो रही है।
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गीडा से निकल रहीं लाखों बोतलें
गीडा स्थित पैकेज्ड वाटर यूनिट संचालक पुनीत श्रीवास्तव के अनुसार, गीडा व शहर में लगे प्लांटों से प्रतिदिन करीब चार लाख बोतल पानी बाजार में जाता है। इसके अलावा डेढ़ लाख बोतलें बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से सप्लाई होती हैं। इतना ही नहीं, शहर में 10 से अधिक अवैध पैकेजिंग प्लांट भी सक्रिय हैं, जहां बिना मानक पालन किए बोतल और पैकेट में पानी भरकर सीधे दुकानों और ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।


हाल की जांच में अधोमानक पाए गए नमूने
पिछले दिनों गोरखनाथ क्षेत्र समेत कई इलाकों में पैकेट और बोतल वाले पानी के नमूने लिए गए। इनमें से दो नमूनों की रिपोर्ट अधोमानक आई। सूत्रों का कहना है कि इन नमूनों में सिर्फ क्लोरीन पाया गया, जबकि आवश्यक खनिज तत्व नदारद थे। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने आठ पंजीकृत कारखानों से 10 नए नमूने लिए हैं और इन्हें विशेष जांच के लिए भेजा है। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि यह जांच शहर में बिकने वाले पानी की असली तस्वीर सामने लाएगी।


आरओ प्लांट से हर दिन बिकता है 12 लाख लीटर से अधिक पानी
शहर में करीब 600 आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश किसी विभाग में पंजीकृत हैं और न ही इनके पानी की नियमित जांच होती है। हर प्लांट से औसतन 2000 लीटर से अधिक पानी रोज बेचा जाता है। इस हिसाब से देखें तो हर दिन करीब 12 लाख लीटर पानी तो केवल इन प्लांटों से ही घर-घर जा रहा है, जिनकी कोई जांच नहीं होती। हालात ये हैं कि कई संचालक अब ऑटो पर 1000 लीटर की टंकी रखकर मोहल्लों में घूम-घूमकर पानी बेचते हैं। जबकि नियम यह है कि पानी सील जार में ही उपलब्ध कराया जाएगा और उस पर निर्माता का नाम, उत्पादन तिथि और घुलनशील तत्वों की जानकारी अंकित होगा लेकिन ऐसा कहीं नहीं हो रहा।


बिना रोक-टोक ट्रेनों तक पहुंच रहीं पानी की बोतलें
पानी का धंधा मोहल्लों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक फैला है। स्टेशन के गेट नंबर तीन के सामने चाय की एक दुकान के पास हर दिन ऑटो से पानी की बोतलें उतारी जाती हैं। यहां दो घंटे तक इन बोतलों को डीप फ्रीजर में रखा जाता है। इसके बाद पानी की बोतलें प्लेटफाॅर्म नंबर एक से लेकर नौ तक पहुंचा दी जाती हैं। ट्रेन आने के वक्त इन्हें प्लेटफाॅर्म व फुटओवरब्रिज पर कहीं किनारे रखा जाता है और जैसे ही ट्रेन चलने लगती है, इसको बोगियों में रखवा दिया जाता है। रास्ते में भी यात्रियों को बिना जांच वाला पानी पीने को मिलता है। कई बार जांच में ऐसा पकड़ा भी जा चुका है लेकिन धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है।

वर्जन
जब भी शिकायत आती है, जांच की जाती है। अभी तीन दिन पहले ही चार नमूनों की जांच रिपोर्ट आई है। लोगों को भी पानी खरीदते समय कंपनी का नाम, पैक करने की तारीख, आईएसआई मार्का आदि का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा बोतलबंद पानी का सील होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर पानी खरीदने से बचें।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
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