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Gorakhpur News: सुबह की खिलखिलाहट दहशत में बदली, अभिभावकों की आंखों में डर

Tue, 16 Sep 2025 02:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Sep 2025 02:15 AM IST
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Gorakhpur News: Morning laughter turns into panic, fear in the eyes of parents
मासूमों की चीखें…जब स्कूल बस पलटी और बच्चे सहम गए
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बच्चे बोले, हम सब रोने लगे, सीट से नीचे गिर पड़े
गोला। नारायणपुर, गोपालपुर और चंदौली गांव के घरों में सोमवार सुबह बच्चों की चहल-पहल गूंज रही थी। यूनिफाॅर्म पहनकर, बैग कंधे पर टांगकर मासूम स्कूल जाने को निकले। माता-पिता ने उन्हें प्यार से विदा किया। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद यह मुस्कान डर और दहशत में बदल गई। गोला-उरुवा मार्ग पर चंदौली गांव के पास अचानक स्कूल बस का संतुलन बिगड़ गया। गाड़ी हिली, झटका लगा और देखते ही देखते बस पलट गई। बस के अंदर बैठे 11 बच्चों की चीखें सुनकर हर किसी का दिल दहल गया। बस में बैठे बच्चों की खिलखिलाहट चीखों में बदल गई।


कांपती आवाज में बच्चों ने बताई आपबीती
बस में सवार आशुतोष कांपती आवाज में बताया कि ड्राइवर अंकल बस बहुत तेज चला रहे थे। अचानक झटका लगा और हम सब नीचे गिर गए। सब रोने लगे। बहुत डर लग रहा था। वहीं देवकली निवासी परी शर्मा और अर्नव शर्मा का कहना था कि साढ़े सात बजे बस आई थी। रास्ते में गड्ढा आया और बस पलट गई। हम सब सीट से गिरकर नीचे गिर गए। एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। घायल छात्र ओम की आंखों में काफी डर झलक रहा था। बताया कि हादसे के बाद एक दूसरी स्कूल बस आई और लोगों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकाला।
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गांव में फैली दहशत
बस पलटते ही गांव में दहशत फैल गई। बच्चों की चीखें सुनकर खेतों और घरों से लोग दौड़े। किसी ने खिड़की से हाथ डालकर बच्चों को बाहर निकाला, किसी ने दरवाजे को धक्का देकर तोड़ा। बच्चों के कांपते हाथ, आंसू से भीगी आंखें और घबराहट ने मौके पर मौजूद हर किसी को झकझोर दिया। वहीं मौके पर मौजूद एक ग्रामीण ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को रोते-चिल्लाते देखकर दिल कांप गया। वो मासूम बार-बार अपनी मां को पुकार रहे थे।
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अस्पताल पहुंचे अभिभावकों ने बच्चों को लगाया गले
अस्पताल में जब अभिभावक अपने बच्चों से मिले तो उन्हें सीने से लगा लिया। किसी ने बच्चों की आंखों से आंसू पोंछे। एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा कि हम अपने बच्चों को सुरक्षित समझकर स्कूल भेजते हैं, लेकिन अगर स्कूल बसें ही खतरा बन जाएं तो हम उन्हें कैसे भेजें। परिजनों का कहना है कि भले ही डॉक्टरों ने घायल बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया, लेकिन उनका डर अब भी कायम है। कई बच्चे हादसे को याद करके सिहर उठते हैं। अभिभावक भी आशंकित हैं कि कहीं अगली बार उनके मासूम किसी और लापरवाही का शिकार न हो जाएं।
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वर्जन
चालक पर नशे की आशंका है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
दरवेश सिंह, सीओ
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योग्य व प्रशिक्षित चालक रखे जाने की मांग
कस्बे व चौराहों पर बस दुर्घटना को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हैं जिन पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया रखते हुए विद्यालयों में योग्य व प्रशिक्षित चालक रख जाने की मांग कर रहे हैं। देवकली निवासी अनिल जायसवाल ने बताया कि स्कूल वाले जिसको चाहा बस का चालक बना देते हैं। ड्राइवरी का कोई मानक नहीं है। किसी प्रकार का प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता। तमाम बच्चों की जान खतरे में होती है, इसलिए स्कूल वालों पर योग्य व प्रशिक्षित तथा शराब न पीने वाले लोगों को ही बसों का चालक बनाया जाना चाहिए। अख्तर अली ने बताया कि स्कूल वाले एक ही रूट पर बस को दो से तीन बार चलाते हैं। इसलिए उन पर छात्रों को जल्दी छोड़ने व घर जाने का मानसिक दबाव होता है। वे जल्दबाजी में बस दौड़ाते हैं और दुर्घटना कर बैठते हैं। इसलिए इन सभी पहलुओं पर ध्यान रखने वाले योग्य चालक ही बसों में रखे जाने चाहिए।


तीन माह से नहीं हुई थी बस की सर्विसिंग
दुर्घटनाग्रस्त बस के चालक उदय प्रताप सिंह ने बताया कि वह बांसगांव थाना क्षेत्र के बेदौली गांव का रहने वाला है। पिछले तीन माह से स्कूल का बस चला रहा था। बस की हालत ठीक नहीं है। छह चक्कों वाले इस बस में चार पूरी तरह खराब हो चुके हैं। बदलने के लिए मालिक से कई बार कहा लेकिन अनसुना करते रहे। पिछले तीन माह से बस की सर्विसिंग भी नहीं हुई है। इसके कारण बस की स्टेयरिंग जाम थी। घटना के समय ट्रेलर को ओवरटेक करने के पश्चात जब स्टेयरिंग लिया तो बस आगे नहीं बढ़ी और गड्ढे में जा गिरी।



दूसरे विद्यालय के स्टाफ ने किया सहयोग
ग्रामीणों ने बताया कि दुर्घटना के समय उधर से एलपीएम स्कूल की बस गुजर रही थी। उसके बस चालक व अन्य स्टाफ ने चीख रहे बच्चों की आवाज सुनी तो रुककर खिड़की के रास्ते बच्चों को बाहर निकाला। साथ ही एक निजी अस्पताल पहुंचाया। घटना स्थल पर बच्चों की चीख पुकार सुनकर सैकड़ों अभिभावकों की भीड़ जुट गई। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि कहीं उनके बच्चों के स्कूल बस तो नहीं है।
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