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एमएमएमयूटी : एमटेक की फीस घटी, पीएचडी की फेलोशिप बढ़ी
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दोनों प्रस्तावों को विद्या परिषद ने दे दी है मंजूरी
गोरखपुर। देशभर में एमटेक के प्रति छात्रों के घटते रुझान को देखते हुए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से एमटेक की फीस कम करने का निर्णय लिया है। वहीं, पीएचडी के छात्रों की फेलोशिप भी 18 हजार रुपये प्रति माह कर दी गई है। दोनों प्रस्ताव को विद्या परिषद की बैठक में स्वीकृति मिल चुकी है। इसे आगामी वित्त समिति की बैठक में रखा जाएगा।
बीते कई वर्षों से एमटेक पाठ्यक्रमों में टेक्निकल ग्रेजुएट्स का रुझान कम हुआ है। इस कारण अच्छे शोध छात्र मिलने में अधिकांश तकनीकी विश्वविद्यालयों को कठिनाई हो रही थी क्योंकि, ज्यादातर विश्वविद्यालयों में एमटेक के बाद ही पीएचडी में प्रवेश मिलता है। इसे ध्यान रखते हुए एमटेक प्रवेश में आ रही कठिनाइयों पर विचार कर उसके निवारण करने के लिए एमएमएमयूटी ने तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें प्रो. जीउत सिंह, प्रो. वीके द्विवेदी एवं प्रो. प्रभाकर तिवारी शामिल थे।
समिति ने विचार-विमर्श के दौरान यह पाया कि ज्यादातर इंजीनियरिंग स्नातकों को टेक के आधार पर ही नौकरी मिल जाती है। जो छात्र उच्च अध्ययन करना चाहते हैं उनमें भी कई प्रबंधन विषयों में दाखिला ले लेते हैं। जो कुछ छात्र इंजीनियरिंग में परास्नातक डिग्री पूरी भी करते हैं उन्हें अपनी परास्नातक डिग्री का कोई विशेष लाभ प्लेसमेंट में नहीं मिलता। यह भी पाया कि एमएमएमयूटी में एमटेक की फीस कई आईआईटी संस्थानों से भी बहुत ज्यादा है। इसको ध्यान में रखते हुए समिति ने फीस घटाने की संस्तुति की थी। पिछले वर्ष तक एमटेक का शिक्षण शुल्क ही 60 हजार रुपये था और अन्य सभी मद मिलाकर कुल वार्षिक फीस छात्रावासियों के लिए 1, 20,000 रुपये थी। इसमें हॉस्टल एवं मेस फीस शामिल नहीं थी। इसी प्रकार कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए कुल फीस 1,22,500 रुपये थी।
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ये है नई शुल्क संरचना
प्रथम सेमेस्टर छात्रावासी के लिए (प्रति सेमेस्टर)
शिक्षण शुल्क 10,000, परीक्षा शुल्क 5,000, यूजर चार्ज 1,000, रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज 1,250, बस चार्ज 1,250, कॉशन मनी 5,000। कुल 23,500 रुपये (हॉस्टल एवं मेस शुल्क अलग से)। द्वितीय सेमेस्टर से 18,500 रुपये होगी।
प्रथम सेमेस्टर कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए (प्रति सेमेस्टर)
शिक्षण शुल्क 10,000, परीक्षा शुल्क 5,000, यूजर चार्ज 1,000, रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज 1,250, बस चार्ज 2,500, कॉशन मनी 5,000। कुल 24,750 रुपये। द्वितीय सेमेस्टर से 19,750 रुपये फीस होगी।
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इसी सत्र से बढ़ेगी फेलोशिप
अच्छे विद्यार्थियों को शोध की दिशा में प्रवृत्त करने और पीएचडी कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों की फेलोशिप को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया है। वित्त समिति की मंजूरी के बाद शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सभी पीएचडी शोधार्थियों को बढ़ी हुई फेलोशिप मिलेगी। यह फेलोशिप तीन वर्ष तक मिलेगी और पीएचडी के चतुर्थ वर्ष में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को फेलोशिप मिलेगी, जिन्होंने एससीआई/एससीआईई/एसएससीआई में शामिल शोध पत्रिकाओं में कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित किए हों। वर्ष 2023-24 तक पीएचडी के छात्रों को 12,500 रुपये प्रति माह की ही फेलोशिप मिलती थी, जिसे 2024-25 में बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था।
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वर्जन...
एमटेक में विद्यार्थियों का रुझान बढ़े, इसके लिए फीस घटाने का निर्णय लिया गया है। वहीं, शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए फेलोशिप बढ़ाई गई है। दोनों प्रस्ताव को विद्या परिषद से स्वीकृति मिल गई है। वित्त समिति से मंजूरी मिलने के बाद यह निर्णय इसी सत्र से लागू हो जाएंगे।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति
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गोरखपुर। देशभर में एमटेक के प्रति छात्रों के घटते रुझान को देखते हुए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से एमटेक की फीस कम करने का निर्णय लिया है। वहीं, पीएचडी के छात्रों की फेलोशिप भी 18 हजार रुपये प्रति माह कर दी गई है। दोनों प्रस्ताव को विद्या परिषद की बैठक में स्वीकृति मिल चुकी है। इसे आगामी वित्त समिति की बैठक में रखा जाएगा।
बीते कई वर्षों से एमटेक पाठ्यक्रमों में टेक्निकल ग्रेजुएट्स का रुझान कम हुआ है। इस कारण अच्छे शोध छात्र मिलने में अधिकांश तकनीकी विश्वविद्यालयों को कठिनाई हो रही थी क्योंकि, ज्यादातर विश्वविद्यालयों में एमटेक के बाद ही पीएचडी में प्रवेश मिलता है। इसे ध्यान रखते हुए एमटेक प्रवेश में आ रही कठिनाइयों पर विचार कर उसके निवारण करने के लिए एमएमएमयूटी ने तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें प्रो. जीउत सिंह, प्रो. वीके द्विवेदी एवं प्रो. प्रभाकर तिवारी शामिल थे।
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समिति ने विचार-विमर्श के दौरान यह पाया कि ज्यादातर इंजीनियरिंग स्नातकों को टेक के आधार पर ही नौकरी मिल जाती है। जो छात्र उच्च अध्ययन करना चाहते हैं उनमें भी कई प्रबंधन विषयों में दाखिला ले लेते हैं। जो कुछ छात्र इंजीनियरिंग में परास्नातक डिग्री पूरी भी करते हैं उन्हें अपनी परास्नातक डिग्री का कोई विशेष लाभ प्लेसमेंट में नहीं मिलता। यह भी पाया कि एमएमएमयूटी में एमटेक की फीस कई आईआईटी संस्थानों से भी बहुत ज्यादा है। इसको ध्यान में रखते हुए समिति ने फीस घटाने की संस्तुति की थी। पिछले वर्ष तक एमटेक का शिक्षण शुल्क ही 60 हजार रुपये था और अन्य सभी मद मिलाकर कुल वार्षिक फीस छात्रावासियों के लिए 1, 20,000 रुपये थी। इसमें हॉस्टल एवं मेस फीस शामिल नहीं थी। इसी प्रकार कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए कुल फीस 1,22,500 रुपये थी।
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ये है नई शुल्क संरचना
प्रथम सेमेस्टर छात्रावासी के लिए (प्रति सेमेस्टर)
शिक्षण शुल्क 10,000, परीक्षा शुल्क 5,000, यूजर चार्ज 1,000, रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज 1,250, बस चार्ज 1,250, कॉशन मनी 5,000। कुल 23,500 रुपये (हॉस्टल एवं मेस शुल्क अलग से)। द्वितीय सेमेस्टर से 18,500 रुपये होगी।
प्रथम सेमेस्टर कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए (प्रति सेमेस्टर)
शिक्षण शुल्क 10,000, परीक्षा शुल्क 5,000, यूजर चार्ज 1,000, रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज 1,250, बस चार्ज 2,500, कॉशन मनी 5,000। कुल 24,750 रुपये। द्वितीय सेमेस्टर से 19,750 रुपये फीस होगी।
इसी सत्र से बढ़ेगी फेलोशिप
अच्छे विद्यार्थियों को शोध की दिशा में प्रवृत्त करने और पीएचडी कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों की फेलोशिप को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह करने का निर्णय लिया है। वित्त समिति की मंजूरी के बाद शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सभी पीएचडी शोधार्थियों को बढ़ी हुई फेलोशिप मिलेगी। यह फेलोशिप तीन वर्ष तक मिलेगी और पीएचडी के चतुर्थ वर्ष में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को फेलोशिप मिलेगी, जिन्होंने एससीआई/एससीआईई/एसएससीआई में शामिल शोध पत्रिकाओं में कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित किए हों। वर्ष 2023-24 तक पीएचडी के छात्रों को 12,500 रुपये प्रति माह की ही फेलोशिप मिलती थी, जिसे 2024-25 में बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था।
वर्जन...
एमटेक में विद्यार्थियों का रुझान बढ़े, इसके लिए फीस घटाने का निर्णय लिया गया है। वहीं, शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए फेलोशिप बढ़ाई गई है। दोनों प्रस्ताव को विद्या परिषद से स्वीकृति मिल गई है। वित्त समिति से मंजूरी मिलने के बाद यह निर्णय इसी सत्र से लागू हो जाएंगे।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति