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एमएमएमयूटी: बाजार से अधिक दाम पर खरीदे गए कंप्यूटर... 55 लाख के घोटाले का आरोप
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में 13 बिंदुओं पर हुई शिकायत में कंप्यूटर व फर्नीचर खरीद के नाम पर भी घोटाला का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाजार दाम से अधिक मूल्य पर कंप्यूटर की खरीद की गई है। आरोप है कि अधिक दाम पर खरीदारी कर करीब 55 लाख रुपये की हेराफेरी की गई है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन इस आरोप को निराधार बता रहा है।
देवरिया जिले के परसिया अजमेर गांव के बह्म प्रकाश ने शिकायत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी की है। शिकायतकर्ता ने कुल 13 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार की शिकायत की है। इसमें विश्वविद्यालय में कंप्यूटर एवं फर्नीचर खरीदने में भी हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि रुसा व टेकुप योजना के आंवटन को ही बदलकर करोड़ों रुपये के कंप्यूटर खरीदे गए हैं। इस कार्य के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक अभिजीत मिश्रा को क्रय अधिकारी नामित किया गया, जबकि ऐसा कोई पद शासन की ओर से स्वीकृत नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व कुलसचिव डॉ. जयप्रकाश ने अपने कमरे के सामने ही एक कमरा दे रखा है।
इनकी ओर से सप्लायर को कमरे में बैठा कर लैपटॉप से जेम पोर्टल पर रेट भरवाते हैं। जेम पोर्टल से 28 फरवरी 2023 को एक करोड़ 96 लाख 98 हजार 620 रुपये की लागत से कंप्यूटर (डेस्कटॉप सहित) खरीदे गए। एक डेस्कटाॅप की खरीद 85,230 रुपये में की गई। आरोप है कि उसका खुदरा बाजार में कीमत 66,499 रुपया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि खुदरा दर से 28 प्रतिशत अधिक दर पर खरीदारी कर 55 लाख 15 हजार 613 रुपये की हेराफेरी की गई है। उसने हाल ही में प्रशासनिक भवन के लिए 2.50 करोड़ से फर्निचर खरीद में भी कमीशन लेने का आरोप लगाया है।
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विश्वविद्यालय का दावा...लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का है कंप्यूटर
एमएमएमयूटी प्रशासन की ओर से शिकायतकर्ता के लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार खंडन जारी किया है। शिकायतकर्ता ने जिस कंप्यूटर की विशिष्टता प्रस्तुत की है, उसमें और विश्वविद्यालय में आपूर्ति हुए कंप्यूटर के प्रोसेसर में एक जेनरेशन की तकनीकी का अंतर है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मांग के आधार पर आवश्यकता से कम संख्या में कंप्यूटर क्रय किए गए हैं। कंप्यूटर क्रय जेम पोर्टल पर ओपेन टेंडर के माध्यम से शासनादेशों में विहित प्रक्रिया के अंतर्गत किए गए थे। क्रय किए गए कंप्यूटर 12वीं जेनरेशन के प्रोसेसर के साथ विंडो प्रोफेशनल ऑपरेटिंग सिस्टम युक्त है। जबकि शिकायतकर्ता ने 11वें जेनरेशन प्रोफेसर से की है।
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वर्जन...
विश्वविद्यालय में कंप्यूटर खरीद में घोटाला का आरोप पूरी तरह से निराधार है। खरीद प्रक्रिया शासन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। लेटेस्ट वर्जन के कंप्यूटर की खरीद की गई है। जबकि शिकायतकर्ता ने जिस कंप्यूटर के दाम से तुलना की है उसमें एक जेनरेशन की तकनीकी का अंतर है। भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी ने शिकायतकर्ता के पत्र के परीक्षण कर पोर्टल पर अपलोड करने के लिए एआईसीटीई के मेंबर सेक्रेटरी से अनुरोध किया है। जांच शुरू होने की बात गलत है।
प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी
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देवरिया जिले के परसिया अजमेर गांव के बह्म प्रकाश ने शिकायत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी की है। शिकायतकर्ता ने कुल 13 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए भ्रष्टाचार की शिकायत की है। इसमें विश्वविद्यालय में कंप्यूटर एवं फर्नीचर खरीदने में भी हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि रुसा व टेकुप योजना के आंवटन को ही बदलकर करोड़ों रुपये के कंप्यूटर खरीदे गए हैं। इस कार्य के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक अभिजीत मिश्रा को क्रय अधिकारी नामित किया गया, जबकि ऐसा कोई पद शासन की ओर से स्वीकृत नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व कुलसचिव डॉ. जयप्रकाश ने अपने कमरे के सामने ही एक कमरा दे रखा है।
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इनकी ओर से सप्लायर को कमरे में बैठा कर लैपटॉप से जेम पोर्टल पर रेट भरवाते हैं। जेम पोर्टल से 28 फरवरी 2023 को एक करोड़ 96 लाख 98 हजार 620 रुपये की लागत से कंप्यूटर (डेस्कटॉप सहित) खरीदे गए। एक डेस्कटाॅप की खरीद 85,230 रुपये में की गई। आरोप है कि उसका खुदरा बाजार में कीमत 66,499 रुपया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि खुदरा दर से 28 प्रतिशत अधिक दर पर खरीदारी कर 55 लाख 15 हजार 613 रुपये की हेराफेरी की गई है। उसने हाल ही में प्रशासनिक भवन के लिए 2.50 करोड़ से फर्निचर खरीद में भी कमीशन लेने का आरोप लगाया है।
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विश्वविद्यालय का दावा...लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का है कंप्यूटर
एमएमएमयूटी प्रशासन की ओर से शिकायतकर्ता के लगाए गए आरोपों पर बिंदुवार खंडन जारी किया है। शिकायतकर्ता ने जिस कंप्यूटर की विशिष्टता प्रस्तुत की है, उसमें और विश्वविद्यालय में आपूर्ति हुए कंप्यूटर के प्रोसेसर में एक जेनरेशन की तकनीकी का अंतर है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मांग के आधार पर आवश्यकता से कम संख्या में कंप्यूटर क्रय किए गए हैं। कंप्यूटर क्रय जेम पोर्टल पर ओपेन टेंडर के माध्यम से शासनादेशों में विहित प्रक्रिया के अंतर्गत किए गए थे। क्रय किए गए कंप्यूटर 12वीं जेनरेशन के प्रोसेसर के साथ विंडो प्रोफेशनल ऑपरेटिंग सिस्टम युक्त है। जबकि शिकायतकर्ता ने 11वें जेनरेशन प्रोफेसर से की है।
वर्जन...
विश्वविद्यालय में कंप्यूटर खरीद में घोटाला का आरोप पूरी तरह से निराधार है। खरीद प्रक्रिया शासन की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है। लेटेस्ट वर्जन के कंप्यूटर की खरीद की गई है। जबकि शिकायतकर्ता ने जिस कंप्यूटर के दाम से तुलना की है उसमें एक जेनरेशन की तकनीकी का अंतर है। भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी ने शिकायतकर्ता के पत्र के परीक्षण कर पोर्टल पर अपलोड करने के लिए एआईसीटीई के मेंबर सेक्रेटरी से अनुरोध किया है। जांच शुरू होने की बात गलत है।
प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी