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नक्शा प्रोजेक्ट : सर्वेयर की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी...जल्द शुरू होगा सीमांकन

Sun, 01 Jun 2025 12:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jun 2025 12:54 AM IST
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Gorakhpur News: Map Project: Surveyor's appointment process completed...demarcation will start soon
हवाई सर्वे के बाद तैयार हो रहा मैप, सर्वेयर की टीम करेगी भौतिक सत्यापन
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गोरखपुर। नक्शा प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम ने संपत्तियों के सर्वे के लिए 52 इंजीनियरों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली है। हवाई सर्वे का मैप मिलने के बाद यह टीम उसका भौतिक सत्यापन करेगी। यह सर्वे शहर में संपत्ति के मानचित्रण और डाटाबेस बनाने में मदद करेगा। प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर में संपत्ति के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।
सर्वेयर को छह महीने के लिए नियुक्त किया जा रहा है। विवरण इकट्ठा करने के लिए शुक्रवार को 26 टीमें में बनाई गईं हैं। इनमें सर्वेयर के अलावा नगर निगम व राजस्व विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। परियोजना के बारे में जानकारी के लिए उत्तराखंड के मसूरी में दो जून से एक हफ्ते का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित है। इसमें अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह शामिल होंगे।
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निरंकार सिंह ने बताया कि सर्वेयरों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई है। हवाई सर्वे का मैप मिलने के बाद संपत्तियों का भौतिक सत्यापन शुरू होगा। प्रोजेक्ट के तहत शहर के सभी दुकान, मकान के अलावा खाली प्लाॅट के स्वामित्व का विवरण तैयार कराएगा। सर्वे टीम कोर्स और रोवर के जरिये संपत्तियों का मिलान कर रिकॉर्ड तैयार करेगी। इसके अंतर्गत टीम को रोवर मशीन उपलब्ध करवाया जाएगा और संबंधित क्षेत्र के उपलब्ध नक्शे पहले से सर्वर पर लोड किए जाएंगे। इसके बाद मशीन में संबंधित जानकारी डालकर जमीन का सटीक सीमांकन करेगा।
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सतत शहरी विकास में मिलेगी मदद

अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि नक्शा परियोजना से शहरी भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह से डिजिटल और जीआईएस-मैप पर आधारित किए जाएंगे। इससे संरक्षित, सुलभ और पारदर्शी डाटा मिलेगा। इसे आपदा प्रबंधन, पर्यावरण नियोजन और स्मार्ट सिटी विकास के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। स्पष्ट और अद्यतन स्वामित्व रिकॉर्ड विवादों को कम करेंगे, कानूनी प्रक्रियाओं को गति देंगे और संपत्ति के अधिकारों को बढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि यह रिकॉर्ड न्यायालय के मामलों, कानूनी दस्तावेजीकरण और ऐतिहासिक भूमि डेटा विश्लेषण में सहायता कर सकते हैं। इससे परिवहन नियोजन, आवास परियोजनाओं और सतत शहरी विकास में भी सहायता मिलेगी। इससे नगर निगम को संपत्ति कर संग्रह में भी मदद मिलेगी।
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