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लिंक एक्सप्रेस-वे : मिट्टी नहीं थर्मल प्लांट की राख से भरे जाएंगे गड्ढे
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एक्सप्रेस-वे के किनारे ग्रीनबेल्ट की मिट्टी काटकर भरी गई थी सड़क
गोरखपुर। लिंक एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट की मिट्टी काटकर सड़क बना दी गई। अब जब गड्ढों में पानी भरा है, उसे थर्मल पॉवर प्लांट की राख से भरने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। निर्माण एजेंसी को टांडा थर्मल प्लांट की राख से इन गड्ढों को भरना है। दिक्कत यह है कि अगर राख भरी गई तो फिर इन पर लगने वाले पौधों का विकास नहीं होगा। इससे ग्रीन बेल्ट की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी।
गोरखपुर के जैतपुर से आजमगढ़ के सालारपुर तक 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य मिट्टी की कमी की वजह से प्रभावित हो गया था। हालांकि निर्माण एजेंसी को मिट्टी के लिए अलग से बजट मिला था। निर्माण कार्य में देरी के चलते बाद में यह आदेश दिया गया कि निर्माण एजेंसी नजदीक से मिट्टी लेकर सड़क भर दे। एजेंसी की तरफ से सर्विस लेन के बगल की मिट्टी काटकर एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा करा दिया गया। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर गया। गड्ढा होने की वजह से इस पर पौधरोपण भी नहीं हो पाया। अब शासन स्तर से इन गड्ढों को जल्द भरने का आदेश दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इन गड्ढों में थर्मल पॉवर प्लांट की राख गिरा दी जाए।
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ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, पौधे भी नहीं बढ़ेंगे
जानकारों का कहना है कि थर्मल पॉवर प्लांट की राख भरने पर एक खतरा तो यह रहेगा कि एक्सप्रेस-वे के बगल में ही मिट्टी कमजोर होगी। दूसरी चिंता यह है कि राख वाली जगह पर जो पौधे लगाए जाएंगे, उनका विकास नहीं होगा। इससे एक्सप्रेस-वे के किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
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गोरखपुर। लिंक एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट की मिट्टी काटकर सड़क बना दी गई। अब जब गड्ढों में पानी भरा है, उसे थर्मल पॉवर प्लांट की राख से भरने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। निर्माण एजेंसी को टांडा थर्मल प्लांट की राख से इन गड्ढों को भरना है। दिक्कत यह है कि अगर राख भरी गई तो फिर इन पर लगने वाले पौधों का विकास नहीं होगा। इससे ग्रीन बेल्ट की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी।
गोरखपुर के जैतपुर से आजमगढ़ के सालारपुर तक 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य मिट्टी की कमी की वजह से प्रभावित हो गया था। हालांकि निर्माण एजेंसी को मिट्टी के लिए अलग से बजट मिला था। निर्माण कार्य में देरी के चलते बाद में यह आदेश दिया गया कि निर्माण एजेंसी नजदीक से मिट्टी लेकर सड़क भर दे। एजेंसी की तरफ से सर्विस लेन के बगल की मिट्टी काटकर एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा करा दिया गया। बारिश होने पर इन गड्ढों में पानी भर गया। गड्ढा होने की वजह से इस पर पौधरोपण भी नहीं हो पाया। अब शासन स्तर से इन गड्ढों को जल्द भरने का आदेश दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इन गड्ढों में थर्मल पॉवर प्लांट की राख गिरा दी जाए।
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ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, पौधे भी नहीं बढ़ेंगे
जानकारों का कहना है कि थर्मल पॉवर प्लांट की राख भरने पर एक खतरा तो यह रहेगा कि एक्सप्रेस-वे के बगल में ही मिट्टी कमजोर होगी। दूसरी चिंता यह है कि राख वाली जगह पर जो पौधे लगाए जाएंगे, उनका विकास नहीं होगा। इससे एक्सप्रेस-वे के किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित करने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
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