{"_id":"67ddc3ab0d7de48d5f0456e5","slug":"gorakhpur-news-life-is-a-story-the-one-who-weaves-it-is-the-hero-gorakhpur-news-c-7-hsr1010-876735-2025-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: जीवन एक कहानी, इसको बुनने वाला ही नायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: जीवन एक कहानी, इसको बुनने वाला ही नायक
विज्ञापन
अध्यात्मिक फिल्म महोत्सव में विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कलाकारों को एक्टिंग के गुर बताए
समापन आज, मौजूद रहेंगे फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर व पराग मेहता
गोरखपुर। आध्यात्मिक फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को लोगों ने लगभग 15 डॉक्यूमेंट्री फिल्में देखीं व इसे आत्मसात किया। इसके पहले फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कलाकारों को एक्टिंग के गुर बताए और बच्चों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि जीवन एक कहानी है। स्वयं जो उस कहानी को बुनता है वही उसका नायक होता है। शनिवार को समापन समारोह में फिल्मकार मधुर भंडारकर रहेंगे।
शुक्रवार को रंजन अग्निहोत्री की लगभग दो घंटे चली ये क्लास काफी रोचक रही। उन्होंने कहा कि हाल में आई फिल्म छावा में यह देख चुके हैं कि फिल्मों का कितना गहरा असर होता है। उन्होंने कहा कि हालांकि कश्मीर फाइल्स का भी कैसा असर रहा है इस बात से भी हम भलीभांति से परिचित हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही धर्म और अध्यात्म पर अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव हो रहा है। ताकि युवाओं में धर्म, आस्था, साधना, अध्यात्म में भी रुचि जगे।
उन्होंने कहा कि धर्म बुरा नहीं होता पर उसमें फैला अंधविश्वास बेशक बहुत बुरा हो सकता है। मैं मानता हूं कि धर्म ही कर्म है, सनातन तो जीवन का ज्ञान विज्ञान है। जिस दिन हमें लगेगा कि हमने सबकुछ जान लिया तो फिर बचा क्य। उनके अनुसार ईश्वर ने मनुष्य को दो चीजें बड़ी महत्वपूर्ण दी हैं। एक जिंदा रहने के लिए सांसें और दूसरा क्रिएटिविटी। क्रिएटिविटी और कला को मिक्स न किया जाए। मतलब कि नृत्य, संगीत या कुछ और ये आर्ट हैं, स्किल हैं पर क्रिएटिव होना बहुत ही अलग होता है।
विज्ञापन
अमेरिका की एक रिसर्च का जिक्र करते हुए विवेक ने बताया कि लगभग हजार बच्चों पर ये रिसर्च किया गया और देखा कि उसमें 98 प्रतिशत बच्चे सुपर टैलेंटेड, सुपर इंटेलिजेंट मिले। ये रिसर्च पांच साल के बच्चों पर हुआ था।
--
दिखाई गईं 15 डाक्यूमेंट्री फिल्में
पूरे दिन दो शो में छोटी बड़ी लगभग 15 फिल्में दिखाई गईं। इन सभी फिल्मों में सबसे लंंबी डॉक्यूमेंट्री फिल्म उत्तर प्रदेश के ही शैलेंद्र पांडे निर्देशित मुमुक्षु: मृत्यु की अभिलाषा थी। इसमें दिखाया गया कि काशी, जहां मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मोक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद ट्रेवलॉग फिल्म ‘खाटू श्याम मंदिर की यात्रा, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की प्रचारक डॉक्युमेंट्री ‘नैमिषारण्य’,‘जैन, जाव और बठैन गांव की होली’ और ‘महाकुंभ भी दिखाया गया।
विज्ञापन
समापन आज, मौजूद रहेंगे फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर व पराग मेहता
गोरखपुर। आध्यात्मिक फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को लोगों ने लगभग 15 डॉक्यूमेंट्री फिल्में देखीं व इसे आत्मसात किया। इसके पहले फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कलाकारों को एक्टिंग के गुर बताए और बच्चों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि जीवन एक कहानी है। स्वयं जो उस कहानी को बुनता है वही उसका नायक होता है। शनिवार को समापन समारोह में फिल्मकार मधुर भंडारकर रहेंगे।
शुक्रवार को रंजन अग्निहोत्री की लगभग दो घंटे चली ये क्लास काफी रोचक रही। उन्होंने कहा कि हाल में आई फिल्म छावा में यह देख चुके हैं कि फिल्मों का कितना गहरा असर होता है। उन्होंने कहा कि हालांकि कश्मीर फाइल्स का भी कैसा असर रहा है इस बात से भी हम भलीभांति से परिचित हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही धर्म और अध्यात्म पर अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव हो रहा है। ताकि युवाओं में धर्म, आस्था, साधना, अध्यात्म में भी रुचि जगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि धर्म बुरा नहीं होता पर उसमें फैला अंधविश्वास बेशक बहुत बुरा हो सकता है। मैं मानता हूं कि धर्म ही कर्म है, सनातन तो जीवन का ज्ञान विज्ञान है। जिस दिन हमें लगेगा कि हमने सबकुछ जान लिया तो फिर बचा क्य। उनके अनुसार ईश्वर ने मनुष्य को दो चीजें बड़ी महत्वपूर्ण दी हैं। एक जिंदा रहने के लिए सांसें और दूसरा क्रिएटिविटी। क्रिएटिविटी और कला को मिक्स न किया जाए। मतलब कि नृत्य, संगीत या कुछ और ये आर्ट हैं, स्किल हैं पर क्रिएटिव होना बहुत ही अलग होता है।
विज्ञापन
अमेरिका की एक रिसर्च का जिक्र करते हुए विवेक ने बताया कि लगभग हजार बच्चों पर ये रिसर्च किया गया और देखा कि उसमें 98 प्रतिशत बच्चे सुपर टैलेंटेड, सुपर इंटेलिजेंट मिले। ये रिसर्च पांच साल के बच्चों पर हुआ था।
दिखाई गईं 15 डाक्यूमेंट्री फिल्में
पूरे दिन दो शो में छोटी बड़ी लगभग 15 फिल्में दिखाई गईं। इन सभी फिल्मों में सबसे लंंबी डॉक्यूमेंट्री फिल्म उत्तर प्रदेश के ही शैलेंद्र पांडे निर्देशित मुमुक्षु: मृत्यु की अभिलाषा थी। इसमें दिखाया गया कि काशी, जहां मृत्यु अंत नहीं, बल्कि मोक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद ट्रेवलॉग फिल्म ‘खाटू श्याम मंदिर की यात्रा, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की प्रचारक डॉक्युमेंट्री ‘नैमिषारण्य’,‘जैन, जाव और बठैन गांव की होली’ और ‘महाकुंभ भी दिखाया गया।