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Gorakhpur News: कमिश्रनर कार्यालय जैसे बवाल की फिराक में तो नहीं था खुराफाती श्रवण..जांच शुरू

Sun, 20 Oct 2024 04:53 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2024 04:53 AM IST
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Gorakhpur News: Khurafati Shravan was not planning a ruckus like in the Commissioner's office.. investigation started
गोरखपुर। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लिए गए लोन पर कर्जमाफी की अफवाह ने गोरखपुर और आसपास के जिलों में हलचल पैदा कर दी है। यह अफवाह महराजगंज के फरेंदा और पनियरा क्षेत्र से उठी फिर तो गांव-गांव में ऐसी फैली कि सबने इसे सच मान लिया। एकजुट होकर सभी ने गोरखनाथ मंदिर की तरफ रुख कर लिया। खुराफातियों की मंशा माहौल बिगाड़ने की थी, मगर पुलिस-प्रशासन की सतर्कता से स्थिति काबू कर ली गई। पुलिस को भी शक है कि श्रवण पिछले साल कमिश्नर कार्यालय पर हुए प्रदर्शन की तरह बड़े आंदोलन की फिराक में था। प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कराने के साथ अपने स्तर से भी जानकरी जुटाना शुरू कर दिया है।
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पुलिस के खुफिया तंत्र ने अफवाह फैलाने की आरोपी सीमा गौतम व श्रवण निराला की मंशा जानने और नेटवर्क के पीछे किसी और का हाथ तो नहीं है, यह जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस और प्रशासन की जांच में सामने आया है कि महराजगंज के फरेंदा की कुछ महिलाओं ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के लोग अधिक ब्याज ले रहे हैं। इसे कम कराया जाए। आवेदन के संदर्भ में महिलाओं के पास फोन गए और शिकायत की पुष्टि की गई। महिलाओं ने इसे मान लिया कि उनका आवेदन स्वीकार हो गया।
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इस बात की जानकारी उन्होंने अन्य महिलाओं को देनी शुरू कर दी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं के जरिए यह अफवाह तेजी से फैल गई। अब पुलिस ने जांच में इसमें आंबेडकर जनमोर्चा के संयोजक श्रवण निराला की भूमिका को जांचना शुरू कर दिया है।
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श्रवण निराला ने कैंपियरगंज, फरेंदा और पनियरा में पिछले कई महीने से लगातार बैठकें कीं और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं तक पकड़ बनाई। जांच में पुलिस इस बात का भी पता लगाने में जुटी है कि कर्जमाफी के बहाने महिलाओं की सहानुभूति लेकर वह बड़ा आंदोलन खड़ा करने की फिराक में तो नहीं था। पुलिस ने लोगों के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल भी खंगालना शुरू कर दिया है।



श्रवण ने इसके पहले कमिश्नर दफ्तर परिसर में 12 अक्तूबर 2023 को धरना-प्रदर्शन के पहले बांसगांव, चौरीचौरा और फरेंदा में बैठकें कर भीड़ एकत्र किया था। प्रदर्शन में आंबेडकर जन मोर्चा का रुख ठीक उसी तरह आक्रामक था, जैसे नक्सली मूवमेंट वाले संगठनों का होता है। उस दौरान इसकी खूब चर्चा थी। पुलिस का खुफिया तंत्र अब एक-एक कड़ी को जोड़कर जांच को आगे बढ़ा रही है।



वर्जन



पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। इसके लिए सीडीओ और एडीएम को लगाया गया है। अफवाह फैलाने वालों की मंशा क्या है, यह भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



- कृष्णा करुणेश, डीएम





कर्ज माफ करने की अफवाह फैलाने के मामले में गोरखनाथ थाने में केस दर्ज कर जांच चल रही है। अभी तक जांच में पता चला है कि आईजीआरएस पोर्टल पर कुछ महिलाओं ने शिकायत की थी, इसकी पुष्टि के लिए उनके पास फोन गया तो उन्होंने मान लिया कि आवेदन स्वीकार हो गया। यहीं से अफवाह फैल गई, अब श्रवण निराला और उनके संगठन की भूमिका की भी जांच चल रही है।



- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी



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श्रवण ने डीडीयू छात्रसंघ चुनाव से शुरू की सियासी पारी...22 साल बसपा में रहा



छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, बांसगांव लोकसभा का टिकट नहीं मिला तो छोड़ी पार्टी



अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। बसपा में 22 साल तक विभिन्न जिलों के कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाने वाले श्रवण निराला ने वर्ष 2002-03 से डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी से छात्रसंघ की राजनीति शुरू की। वर्ष 2006 में अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और हार गया। इसके बाद बसपा से जुड़कर संगठन की बारीकियां सीखीं। वर्ष 2019 में बांसगांव से लोकसभा का टिकट नहीं मिला तो पार्टी छोड़ दी और आंबेडकर जनमोर्चा संगठन खड़ा कर लिया। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में वह अपने संगठन के बैनर तले चुनाव लड़ा था।



गोरखपुर के चौरीचौरा निवासी निवासी श्रवण निराला की सक्रियता हमेशा बांसगांव और महराजगंज क्षेत्र में रही है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहकर उसने दलित बिरादरी अच्छी पैठ बनाई और फिर बांसगांव क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी। बसपा से जुड़े लोग बताते हैं कि श्रवण के तेवर हमेशा से विरोध वाले रहे हैं। गोरखपुर क्लब में जुलाई 2019 के टिकट वितरण के एलान के दौरान जोनल कोऑर्डिनेटर से मंच पर ही कहासुनी हो गई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भला-बुरा कहकर चला गया था।



संगठन ने निराला को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए निष्कासित कर दिया था। निराला आंबेडकरवादी विचारधारा से जुड़कर बसपा में विभिन्न पदों पर रहा। 2008 में जोनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। आजमगढ़, अयोध्या, देवीपाटन मंडल के जोनल कोऑर्डिनेटर रह चुके निराला गोरखपुर मंडल में भी 2017 तक इसी पद पर रहा।






दिसंबर 2022 में भूमिहीन किसानों का मुद्दा उठाकर बनाई पकड़



श्रवण निराला ने वर्ष 2022 में भूमिहीन दलित किसानों का मुद्दा उठाकर गांव-गांव तक आंबेडकर जनमोर्चा की सक्रियता बढ़ाई थी। दिसंबर में गोरखपुर में एक बड़ा अधिवेशन कर बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर दलितों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाकर निशाना साधा था। इसके बाद से ही उसने महराजगंज में संगठन को फैलाना शुरू किया।
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