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खिचड़ी मेला : नए साल में झूलों का उठा सकेंगे लुत्फ, तेजी पर तैयारियां
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गोरखपुर। मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में लगने वाला खिचड़ी मेला नए साल के स्वागत के लिए सजकर तैयार हो रहा है। मेला परिसर में लगने वाले मनोरंजन के संसाधनों में कुछ तैयार हो गए हैं तो कुछ तैयार किए जा रहे हैं। गोरखनाथ मंदिर मेला प्रशासन के अनुसार, एक दर्जन से अधिक झूले मेला परिसर में पहुंच चुके हैं। 25 दिसंबर तक ज्यादातर झूले आ जाएंगे। सभी झूले एक जनवरी से पहले लगा लिया जाएगा। ताकि लोग नए साल में लोग झूलों का लुत्फ उठा सकें।
मेला प्रबंधक शिवशंकर उपाध्याय ने बताया कि मेले में हर बार की तरह इस बार भी झूलों के अलावा मौत का कुंआ, स्टूडियो, निशानेबाजी आदि के लिए उनके प्रोपराइटर की मांग के मुताबिक जमीन का अस्थायी आवंटन किया जा रहा है। मेले में झूले का विशेष आकर्षण होता है, इसलिए बड़ी संख्या में झूला कंपनियों ने स्थान का आवंटन कराया है। टोरा-टोरा, ब्रेक डांस, ज्वाइंट व्हील, स्लंबो, ड्रेगेन, बड़ी नाव जैसे झूले इस बार भी मेले का आकर्षण होंगे। बताया कि मेले में दुकानों का आवंटन कराने वालों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार आदि के दुकानदार और झूले वाले शामिल हैं।
नए साल में दिखेगी रौनक
वैसे तो मेले की तय अवधि मकर संक्रांति यानी 14 या 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच मानी जाती है, लेकिन रौनक साल के पहले दिन से ही दिखने लगती है। नया साल मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग गोरखनाथ मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में ज्यादातर झूले और दुकानें खिचड़ी मेले से पहले सजकर तैयार हो जाती हैं।
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पांच जनवरी तक आएंगे ज्यादातर दुकानदार
मेला प्रबंधक ने बताया कि खिचड़ी मेले की विधिवत शुरुआत वैसे तो मकर संक्रांति से होती है। हालांकि औपचारिक शुरुआत एक जनवरी से ही हो जाती है। ऐसे में करीब 50 प्रतिशत दुकानें एक जनवरी से पहले सज जाएंगी। बाकी 50 प्रतिशत दुकानें पांच जनवरी तक लग जाएंगी।
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मेला प्रबंधक शिवशंकर उपाध्याय ने बताया कि मेले में हर बार की तरह इस बार भी झूलों के अलावा मौत का कुंआ, स्टूडियो, निशानेबाजी आदि के लिए उनके प्रोपराइटर की मांग के मुताबिक जमीन का अस्थायी आवंटन किया जा रहा है। मेले में झूले का विशेष आकर्षण होता है, इसलिए बड़ी संख्या में झूला कंपनियों ने स्थान का आवंटन कराया है। टोरा-टोरा, ब्रेक डांस, ज्वाइंट व्हील, स्लंबो, ड्रेगेन, बड़ी नाव जैसे झूले इस बार भी मेले का आकर्षण होंगे। बताया कि मेले में दुकानों का आवंटन कराने वालों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार आदि के दुकानदार और झूले वाले शामिल हैं।
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नए साल में दिखेगी रौनक
वैसे तो मेले की तय अवधि मकर संक्रांति यानी 14 या 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच मानी जाती है, लेकिन रौनक साल के पहले दिन से ही दिखने लगती है। नया साल मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग गोरखनाथ मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में ज्यादातर झूले और दुकानें खिचड़ी मेले से पहले सजकर तैयार हो जाती हैं।
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पांच जनवरी तक आएंगे ज्यादातर दुकानदार
मेला प्रबंधक ने बताया कि खिचड़ी मेले की विधिवत शुरुआत वैसे तो मकर संक्रांति से होती है। हालांकि औपचारिक शुरुआत एक जनवरी से ही हो जाती है। ऐसे में करीब 50 प्रतिशत दुकानें एक जनवरी से पहले सज जाएंगी। बाकी 50 प्रतिशत दुकानें पांच जनवरी तक लग जाएंगी।