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कालाजार : हर तीसरे महीने आ रहा एक मरीज
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देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और बिहार से आ रहे मरीज
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर तीन महीने में कालाजार के एक-दो मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। महराजगंज से आए मरीज से पहले इसी महीने बिहार की 40 वर्षीय महिला का भी यहां इलाज हो चुका है।तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आई महिला की जांच के दौरान कालाजार की पुष्टि हुई थी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. राज किशोर सिंह ने बताया कि देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और इससे सटे बिहार के कुछ हिस्सों से कालाजार के मरीज गोरखपुर इलाज कराने आते हैं। गंभीर मरीजों को ज्यादा दिन तक निरीक्षण में रखना पड़ता है। बिहार से आई महिला को भर्ती कर पांच दिन तक इलाज किया गया। स्थिति में सुधार हुआ तो उसे घर भेज दिया गया।
डॉ. अंकुर पोद्दार ने बताया कि कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर बीमारी है, जो लीशमैनिया परजीवी के कारण होती है। यह बालू मक्खी (सैंडफ्लाई) के काटने से फैलता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह घातक भी हो सकता है। इस बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना और मच्छरों से बचाव करना जरूरी है।
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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर तीन महीने में कालाजार के एक-दो मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। महराजगंज से आए मरीज से पहले इसी महीने बिहार की 40 वर्षीय महिला का भी यहां इलाज हो चुका है।तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आई महिला की जांच के दौरान कालाजार की पुष्टि हुई थी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. राज किशोर सिंह ने बताया कि देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और इससे सटे बिहार के कुछ हिस्सों से कालाजार के मरीज गोरखपुर इलाज कराने आते हैं। गंभीर मरीजों को ज्यादा दिन तक निरीक्षण में रखना पड़ता है। बिहार से आई महिला को भर्ती कर पांच दिन तक इलाज किया गया। स्थिति में सुधार हुआ तो उसे घर भेज दिया गया।
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डॉ. अंकुर पोद्दार ने बताया कि कालाजार (विसेरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर बीमारी है, जो लीशमैनिया परजीवी के कारण होती है। यह बालू मक्खी (सैंडफ्लाई) के काटने से फैलता है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह घातक भी हो सकता है। इस बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना और मच्छरों से बचाव करना जरूरी है।
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