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Gorakhpur News: सरकार की नजर में अवैध.... फिर भी शहर से लेकर गांव तक फैला है सूदखोरी का धंधा
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गोरखपुर। सूदखोरों के मकड़जाल में फंसकर कई हंसती खेलती जिंदगियां तबाह हो गईं। कोई इनके 10 प्रतिशत ब्याज वाले कर्ज से उद्यमी बनने का सपना देख रहा था तो कोई बच्चों की पढ़ाई करा रहा था। ऐसा नहीं है कि ये लोग कर्ज चुका नहीं रहे थे, बल्कि लोग कर्ज से कई गुना ब्याज दे चुके थे। लेकिन न जाने कौन सा गणित इन सूदखोरों का है, जो एक बार कर्ज लेने वाला पाई-पाई बेचकर लिया गया मूलधन भी वापस नहीं कर पाता। यह स्थिति शहर से लेकर गांव तक है। हालांकि, पूरे प्रदेश में सूदखोरी प्रतिबंधित है, पुलिस शिकायतों पर कार्रवाई भी करती है लेकिन सूद के इस धंधे में कर्ज लेने वाले भी खामोश रहते हैं। यही वजह है कि यह धंधा हर जगह खूब फलफूल रहा है।
ताजा प्रकरण मोहद्दीपुर में रहने वाले शिवेंद्र कुमार गौड़ का है जो सूदखोरों के जाल में इस कदर फंस गए कि दुकान से लेकर मकान तक बिक गया, लेकिन ब्याज की रकम आज भी बरकरार है। कार्मल स्कूल में इंटर की परीक्षा में टॉप करने वाली इनकी होनहार बिटिया की पढ़ाई रुपये के अभाव में छूट गई। शिवेंद्र ने कानून की शरण ली और पुलिस जांच भी कर रही है, लेकिन शहर से लेकर गांव तक तमाम शिवेंद्र ऐसे हैं, जो इस मकड़जाल से न तो बाहर निकल पा रहे हैं और न ही पुलिस तक अपनी गुहार लगा पा रहे हैं।
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एक कर्ज चुकाने को लेते हैं, दूसरा कर्ज
सूदखोरी के इन धंधेबाजों ने बड़े कायदे से अपना जाल बुना है। पहले कर्ज लिए आदमी को खूब परेशान करते हैं, इसके बाद दूसरा सूदखोर मददगार बनकर आता है और वह ब्याज चुकाने को नया कर्ज दे देता है। उलझन में पड़ा आदमी दूसरा कर्ज लेकर पहले कर्ज का ब्याज चुकाता है। अभी वह सांस भी नहीं ले पाता, तब तक दो कर्जों का ब्याज एक साथ चुकाने का दबाव पड़ना शुरू होता है। अब यहां से उसकी व्यवस्था बिगड़ने लगती है। आय के स्रोत दुकान, खेती पर नजर गड़ाए सूदखोर वहां अपना कब्जा जमाते हैं, जिससे किस्त टूटनी शुरू होती है। इसके बाद ब्याज का ब्याज ही मूलधन से कई गुना अधिक हो जाता है और आदमी कर्जाें के इस मकड़जाल से बाहर निकलने के बाद मकान, दुकान, जमीन बेचने लगता है। कई बार इसके चक्कर में लोग इतने तनाव में आ जाते हैं कि खुद आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। लेकिन, सूदखोरों पर कार्रवाई नहीं होती है।
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ब्लैंक चेक, एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कराकर हो रहा धंधा
गली-गली में सूदखोरी का धंधा फल-फूल रहा है, लेकिन एडीएम वित्त के दफ्तर के रजिस्टर में केवल 4 साहूकार ही रजिस्टर्ड हैं। वह भी वर्ष 2023 के हैं।कोई रजिस्टर्ड साहूकार छोटी रकम ही दे सकता है। बड़ी रकम कतई नहीं देने का उसको अधिकार है। नियम के तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज ही वसूल सकता है। जबकि ब्लैंक चेक, एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कराकर ना जाने कितने धंधेबाज सूद पर रुपया देने का काम कर रहे हैं। कहने को तो सूद चक्रवृद्धि ब्याज के अनुसार वसूलते हैं। लेकिन इनकी ब्याज दर वार्षिक या अर्द्धवार्षिक नहीं बल्कि मासिक होती है और वह भी
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नये कानून में संगठित अपराध की श्रेणी में सूदखोरी का धंधा
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता कृष्णानंद तिवारी का कहना है कि आजादी के पहले से ही सूदखोरी एक बड़ी समस्या रही है। इससे निपटने के लिए उत्तर प्रदेश रेगूलेशन ऑफ मनी लैंड्रि्ंग एक्ट लाया गया। जिसमें अवैध रुप से सूदखोरी को दंडनीय अपराध बनाया गया। जिसमें तीन वर्ष का कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना है। वहीं वर्तमान भारतीय न्याय संहिता में इसे संगठित अपराध के रूप में धारा 111 में शामिल किया गया है। जिसमें पांच वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा है और पांच से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना है।
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शिकायत करने पर होगी कार्रवाई: एसएसपी
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि जबरन सूद पर रुपये देने या जबरन ब्याज की वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जाती है। शिवेंद्र गौड़ के मामले में केस दर्ज कर जांच कराया जा रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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केस-1
16 नवंबर 2022 को शाहपुर के गीता वाटिका के पास रहने वाले दिव्यांग जितेंद्र श्रीवास्तव ने दो बेटियों के साथ आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। जबकि दोनों बेटिंया बेहद मेधावी थीं। बेटियों के शव पंखे के सहारे लटका था। उनके कई सपने थी, जिसका उल्लेख उन्होंने अपनी डायरी में किया था। उनकी स्कूल की फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही थी कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया कि उन्होंने खुद को समाप्त करना ही उचित समझा।
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केस-2
7 फरवरी 2023 को गोला थाना क्षेत्र में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। गोला के देवकली गांव में सूदखोरों से परेशान होकर एक व्यक्ति ने अपने दो बच्चों और पत्नी सहित खुद को जलाकर मार डाला। पीड़ित इंद्र बहादुर मौर्य सूदखोरों की प्रताड़ना से काफी पेरशान थे। उसने पत्नी सुशीला, बेटी चांदनी और अर्श को जिंदा जला दिया था और फिर खुदकुशी कर ली थी। सूदखोराें की प्रताड़ना से उसके आत्मघाती कदम उठाने से सनसनी फैल गई।
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केस- 3
04 फरवरी 2019 को राजघाट निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता ने पत्नी सरिता, बेटी रचना, पायल व छोटे बेटे आयुष को खाने में जहर देकर हत्या की थी। फिर खुद ट्रेन के सामने कूदकर उसने खुदकुशी की थी। पूरे परिवार के साथ आत्मघाती कदम उठाने के पीछे भी सूदखोरों के कर्ज से परेशान होने का मामला सामने आया था। सूदखोर और उनके आदमी ब्याज के लिए घर पर पहुंच कर परिवार को प्रताड़ित कर रहे थे।
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ताजा प्रकरण मोहद्दीपुर में रहने वाले शिवेंद्र कुमार गौड़ का है जो सूदखोरों के जाल में इस कदर फंस गए कि दुकान से लेकर मकान तक बिक गया, लेकिन ब्याज की रकम आज भी बरकरार है। कार्मल स्कूल में इंटर की परीक्षा में टॉप करने वाली इनकी होनहार बिटिया की पढ़ाई रुपये के अभाव में छूट गई। शिवेंद्र ने कानून की शरण ली और पुलिस जांच भी कर रही है, लेकिन शहर से लेकर गांव तक तमाम शिवेंद्र ऐसे हैं, जो इस मकड़जाल से न तो बाहर निकल पा रहे हैं और न ही पुलिस तक अपनी गुहार लगा पा रहे हैं।
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एक कर्ज चुकाने को लेते हैं, दूसरा कर्ज
सूदखोरी के इन धंधेबाजों ने बड़े कायदे से अपना जाल बुना है। पहले कर्ज लिए आदमी को खूब परेशान करते हैं, इसके बाद दूसरा सूदखोर मददगार बनकर आता है और वह ब्याज चुकाने को नया कर्ज दे देता है। उलझन में पड़ा आदमी दूसरा कर्ज लेकर पहले कर्ज का ब्याज चुकाता है। अभी वह सांस भी नहीं ले पाता, तब तक दो कर्जों का ब्याज एक साथ चुकाने का दबाव पड़ना शुरू होता है। अब यहां से उसकी व्यवस्था बिगड़ने लगती है। आय के स्रोत दुकान, खेती पर नजर गड़ाए सूदखोर वहां अपना कब्जा जमाते हैं, जिससे किस्त टूटनी शुरू होती है। इसके बाद ब्याज का ब्याज ही मूलधन से कई गुना अधिक हो जाता है और आदमी कर्जाें के इस मकड़जाल से बाहर निकलने के बाद मकान, दुकान, जमीन बेचने लगता है। कई बार इसके चक्कर में लोग इतने तनाव में आ जाते हैं कि खुद आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। लेकिन, सूदखोरों पर कार्रवाई नहीं होती है।
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ब्लैंक चेक, एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कराकर हो रहा धंधा
गली-गली में सूदखोरी का धंधा फल-फूल रहा है, लेकिन एडीएम वित्त के दफ्तर के रजिस्टर में केवल 4 साहूकार ही रजिस्टर्ड हैं। वह भी वर्ष 2023 के हैं।कोई रजिस्टर्ड साहूकार छोटी रकम ही दे सकता है। बड़ी रकम कतई नहीं देने का उसको अधिकार है। नियम के तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज ही वसूल सकता है। जबकि ब्लैंक चेक, एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर कराकर ना जाने कितने धंधेबाज सूद पर रुपया देने का काम कर रहे हैं। कहने को तो सूद चक्रवृद्धि ब्याज के अनुसार वसूलते हैं। लेकिन इनकी ब्याज दर वार्षिक या अर्द्धवार्षिक नहीं बल्कि मासिक होती है और वह भी
नये कानून में संगठित अपराध की श्रेणी में सूदखोरी का धंधा
दीवानी कचहरी के अधिवक्ता कृष्णानंद तिवारी का कहना है कि आजादी के पहले से ही सूदखोरी एक बड़ी समस्या रही है। इससे निपटने के लिए उत्तर प्रदेश रेगूलेशन ऑफ मनी लैंड्रि्ंग एक्ट लाया गया। जिसमें अवैध रुप से सूदखोरी को दंडनीय अपराध बनाया गया। जिसमें तीन वर्ष का कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना है। वहीं वर्तमान भारतीय न्याय संहिता में इसे संगठित अपराध के रूप में धारा 111 में शामिल किया गया है। जिसमें पांच वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा है और पांच से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना है।
शिकायत करने पर होगी कार्रवाई: एसएसपी
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि जबरन सूद पर रुपये देने या जबरन ब्याज की वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जाती है। शिवेंद्र गौड़ के मामले में केस दर्ज कर जांच कराया जा रहा है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
केस-1
16 नवंबर 2022 को शाहपुर के गीता वाटिका के पास रहने वाले दिव्यांग जितेंद्र श्रीवास्तव ने दो बेटियों के साथ आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। जबकि दोनों बेटिंया बेहद मेधावी थीं। बेटियों के शव पंखे के सहारे लटका था। उनके कई सपने थी, जिसका उल्लेख उन्होंने अपनी डायरी में किया था। उनकी स्कूल की फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही थी कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया कि उन्होंने खुद को समाप्त करना ही उचित समझा।
केस-2
7 फरवरी 2023 को गोला थाना क्षेत्र में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। गोला के देवकली गांव में सूदखोरों से परेशान होकर एक व्यक्ति ने अपने दो बच्चों और पत्नी सहित खुद को जलाकर मार डाला। पीड़ित इंद्र बहादुर मौर्य सूदखोरों की प्रताड़ना से काफी पेरशान थे। उसने पत्नी सुशीला, बेटी चांदनी और अर्श को जिंदा जला दिया था और फिर खुदकुशी कर ली थी। सूदखोराें की प्रताड़ना से उसके आत्मघाती कदम उठाने से सनसनी फैल गई।
केस- 3
04 फरवरी 2019 को राजघाट निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता ने पत्नी सरिता, बेटी रचना, पायल व छोटे बेटे आयुष को खाने में जहर देकर हत्या की थी। फिर खुद ट्रेन के सामने कूदकर उसने खुदकुशी की थी। पूरे परिवार के साथ आत्मघाती कदम उठाने के पीछे भी सूदखोरों के कर्ज से परेशान होने का मामला सामने आया था। सूदखोर और उनके आदमी ब्याज के लिए घर पर पहुंच कर परिवार को प्रताड़ित कर रहे थे।